टोंक, 5 घंटे पहले

स्कूलों में ही आत्मरक्षा सीखेंगी बेटियां,10 दिन का विशेष प्रशिक्षण टोंक समेत प्रदेश की 36 हजार 765 स्कूल की छठवीं से बारहवीं तक की छात्राओं को मिलेगा फायदा, राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं को अब अपनी सुरक्षा के लिए किसी दूसरे संस्थान या बाहर जाने की जरूरत नहीं होगी। स्कूल में ही उन्हें आत्मरक्षा की तकनीक सिखाई जाएगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ.रश्मि शर्मा ने आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए सत्र 2026-27 के दिशा निर्देश जारी किए है। इसमें कक्षा 6 से 12 तक की सभी बालिकाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम तय किया है। यह कार्यक्रम प्रदेश के 36 हजार 765 राजकीय विद्यालयों में संचालित किया जाएगा। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल बालिकाओं को आत्मरक्षा की तकनीक सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें शारीरिक,मानसिक और भावनात्मक रूप �

राजस्थान के 36 हजार 765 सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक की बालिकाओं को अब स्कूल में ही आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जाएगी। सत्र 2026-27 के लिए जारी दिशा-निर्देशों के तहत 10 दिन का प्रशिक्षण शिविर होगा और इसके बाद अक्टूबर, दिसंबर, फरवरी और अप्रैल में नियमित अभ्यास कराया जाएगा। खास बात यह है कि छात्राओं को मार्शल आर्ट के साथ POCSO एक्ट, किशोर न्याय अधिनियम और शिकायत की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण का मकसद छात्राओं को संभावित खतरे पहचानने, असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करने और शारीरिक-मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर रहेगा।
10 दिन का शिविर, फिर पूरे साल अभ्यास
कार्यक्रम के तहत सभी बालिकाओं के बैच बनाए जाएंगे और 10 दिन का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षण को केवल शिविर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। छात्राओं के लिए नियमित अभ्यास सत्र भी होंगे। अक्टूबर 2026, दिसंबर 2026, फरवरी 2027 और अप्रैल 2027 में 15-15 दिन के अभ्यास सत्र आयोजित किए जाएंगे। कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 की छात्राओं के अलग-अलग समूह बनाए जाएंगे। प्रशिक्षण को स्कूल की समय-सारणी में प्राथमिकता दी जाएगी और चर्चा सत्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी महिला शारीरिक शिक्षक को दी गई है।
मार्शल आर्ट के साथ अधिकार और कानूनों की जानकारी
आत्मरक्षा प्रशिक्षण में छात्राओं को मार्शल आर्ट और आत्मरक्षा की तकनीकों के साथ उनके अधिकारों और बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी भी दी जाएगी। उन्हें POCSO एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम-2015 के महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में बताया जाएगा। छात्राओं को यह भी समझाया जाएगा कि किसी परेशानी, हिंसा या अपराध की स्थिति में शिकायत कहां और कैसे की जा सकती है।
बाल सुरक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं और संबंधित आयोग की जानकारी भी दी जाएगी। स्कूलों में नजदीकी पुलिस थाने के बीट कांस्टेबल और थाना प्रभारी को छात्राओं से बातचीत के लिए बुलाया जाएगा। इस दौरान बाल सुरक्षा, कानूनी प्रावधान और शिकायत की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
छात्राओं को परेशानी साझा करने का भी मौका
प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं को अपनी परेशानी बताने के लिए व्यक्तिगत बातचीत का अवसर दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर छात्राएं पर्ची के माध्यम से भी अपनी उलझन या असुरक्षा साझा कर सकेंगी। उन्हें बिना झिझक अपनी समस्या बताने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
चयनित स्कूलों को मिलेंगे 2,500 रुपए
आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए चयनित स्कूलों को सरकार की ओर से प्रति विद्यालय 2 हजार 500 रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का इस्तेमाल प्रशिक्षण से संबंधित बैनर, स्टेशनरी, फोटोकॉपी और जरूरी सामग्री पर किया जाएगा।
प्रशिक्षण से मानसिक मजबूती मिलेगी
शिक्षाविद् एवं शिक्षक नेता मोहर सिंह सलावद ने बताया कि बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना उनकी सुरक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाएं विपरीत परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा करना सीखेंगी। इससे उनमें साहस और मानसिक मजबूती विकसित होगी।






