
सरकारी स्कूलों में अब पढ़ाई का मतलब केवल किताब खोलकर पाठ पढ़ लेना नहीं होगा। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के साथ उन्हें पढ़ी हुई सामग्री को समझने, उस पर चर्चा करने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने का अवसर भी मिलेगा। इसके लिए स्कूलों में प्रतिदिन सातवां कालांश विशेष रूप से पठन गतिविधियों के लिए निर्धारित किया गया है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने पढ़ो राजस्थान मिशन के तहत सातवें कालांश को स्ट्रक्चर्ड रीडिंग सपोर्ट पीरियड के रूप में संचालित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत सप्ताह के प्रत्येक कार्य दिवस के लिए अलग-अलग पठन गतिविधियां निर्धारित की गई हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नियमित पठन की आदत विकसित करने के साथ उनकी समझ, अभिव्यक्ति और चिंतन क्षमता को मजबूत करना है।
पाठ्यपुस्तक से आगे बढ़ेगा पठन
रीडिंग पीरियड में स्टूडेंट्स को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनकी आयु और रुचि के अनुसार जीवनियां, बाल पत्रिकाएं, कॉमिक्स, चित्र-पुस्तकें तथा स्थानीय भाषा की पुस्तकों को भी पठन सामग्री में शामिल किया जाएगा। हर कक्षा में रीडिंग कॉर्नर विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। विद्यार्थियों को सप्ताह में कम से कम एक पुस्तक घर ले जाकर पढ़ने का अवसर भी मिलेगा। इससे स्कूल के साथ-साथ घर में भी नियमित पठन की आदत विकसित करने पर जोर रहेगा।
35 मिनट में पढ़ना, समझना और साझा करना
रीडिंग पीरियड को एक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित किया जाएगा। शुरुआत के करीब पांच मिनट में पिछली पठन सामग्री पर विद्यार्थियों से बातचीत होगी। इसके बाद नई सामग्री अथवा गतिविधि शुरू की जाएगी। लगभग 15 से 20 मिनट निर्धारित पठन गतिविधि और शिक्षक की गाइडेड रीडिंग के लिए होंगे।
गतिविधि के अंतिम चरण में विद्यार्थी बताएंगे कि उन्होंने क्या पढ़ा, क्या समझा और उन्हें नया क्या जानने को मिला। विद्यार्थी नए शब्दों, रोचक तथ्यों या पाठ से जुड़ी अपनी बात भी शेयर करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं, बल्कि पढ़ें, समझें, चर्चा करें, साझा करें और चिंतन करें के माध्यम से विद्यार्थियों को सक्रिय पाठक बनाना है।
शिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण
रीडिंग पीरियड में शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाले की भूमिका में नहीं रहेंगे, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ने, समझने और अपनी बात रखने के लिए मार्गदर्शन देंगे। गतिविधियों के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी, समझ और अभिव्यक्ति पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे कक्षा में पढ़ने का वातावरण अधिक संवादात्मक और गतिविधि आधारित बनाने में मदद मिलेगी।
शिक्षक संघ रेसटा ने बताया सकारात्मक कदम
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया- यह सकारात्मक कदम है। विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए रीडिंग पीरियड की व्यवस्था उपयोगी पहल है। उन्होंने कहा कि यदि सातवें कालांश को नियमित रूप से गतिविधि आधारित तरीके से संचालित किया जाए तो बच्चों में केवल पठन कौशल ही नहीं, बल्कि समझने, प्रश्न पूछने, चर्चा करने और अपनी बात रखने की क्षमता भी विकसित होगी।
सलावद ने कहा कि बच्चे जब अपनी रुचि की सामग्री पढ़ेंगे, उस पर चर्चा करेंगे और उसे अपने शब्दों में व्यक्त करेंगे तो पठन उनके लिए केवल पाठ याद करने की प्रक्रिया नहीं रहेगा, बल्कि सीखने और अभिव्यक्ति का माध्यम बनेगा। रीडिंग कॉर्नर और पुस्तकें घर ले जाने की व्यवस्था से विद्यालय के साथ घर में भी पढ़ने का वातावरण तैयार होगा। इस पहल की सफलता के लिए आवश्यक है कि विद्यालयों में पर्याप्त और रुचिकर पठन सामग्री उपलब्ध हो तथा शिक्षकों को गतिविधियों के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक सहयोग मिले।
पांच दिन में पांच तरह की गतिविधियां
| दिन | गतिविधि का नाम | गतिविधि का विवरण |
| सोमवार | सस्वर पठन | विद्यार्थी पाठ को आवाज के साथ पढ़ेंगे और उच्चारण और प्रवाह पर ध्यान देंगे। |
| मंगलवार | बडी रीडिंग | दो-दो विद्यार्थियों की जोड़ी बनाकर एक-दूसरे के साथ पठन गतिविधि की जाएगी। |
| बुधवार | कहानी कार्ड | कहानी कार्ड के माध्यम से पढ़ने, समझने और कहानी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की गतिविधि होगी। |
| गुरुवार | चित्र बनाओ एवं बताओ | विद्यार्थी पढ़ी गई सामग्री को चित्र के माध्यम से व्यक्त करेंगे और उसके बारे में अपनी बात बताएंगे। |
| शुक्रवार | मौन पठन | विद्यार्थी स्वयं पढ़ेंगे और पढ़ी गई सामग्री को समझने तथा उसके भाव ग्रहण करने पर विशेष जोर रहेगा। |



