
अभी दिल्ली में NEET को लेकर हुए Gen Z आंदोलन के बाद सख्ती बढ़ गई है। कैंडिडेट का मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराना है तो 2027 का प्लान करिए।
180 दिन के लिए कैंडिडेट को दुबई भेजेंगे। NRI कोटा बन जाएगा। फिर एडमिशन करवा लेंगे। सारे डॉक्यूमेंट्स एंबेसी से बनेंगे। कोई भी एजेंसी पकड़ नहीं पाएगी।
NRI कोटे से देश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट दिला देंगे। 5 लाख में NRI के डॉक्यूमेंट्स बनवा देंगे। ब्लड रिलेशन के साथ चाहिए तो उसका भी जुगाड़ है। सरनेम भी मैनेज हो जाएगा।
कॉलेज की फीस में भी ब्लैक एंड व्हाइट मनी की सेटिंग हो जाएगी। NEET के स्कोर की तो टेंशन छोड़िए, एक से डेढ़ करोड़ में MBBS की सीट सेट हो जाएगी..।
ये दावा देश के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीट बेचने वाले एजेंट्स कर रहे हैं, जो भास्कर के खुफिया कैमरे में डील करते कैद हुए हैं।
भास्कर के 3 अंडर कवर रिपोर्टर्स ने बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड और तमिलनाडु में 50 से अधिक एजेंट्स और कॉलेज से MBBS सीट की डील की।
इसमें 10 एजेंट्स ने पूरी मोडस ऑपरेंडी बताई। ऑपरेशन MBBS पार्ट- 2 में पढ़िए और देखिए कैसे बिक रहीं मेडिकल की सीटें..।

2026 में Gen Z आंदोलन के बाद 2027 में MBBS की सीट बेचने की तैयारी अभी से हो रही है। इसका खुलासा पटना के बिहटा में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से जुड़े एजेंट विवेक ने किया।
बिहार के 15 से अधिक एजेंट्स को खंगालने के बाद हम नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचे थे। यहां एडमिशन डिपार्टमेंट में हमारी मुलाकात एपी सिंह से हुई। उन्होंने हमारे अंडर कवर रिपोर्टर्स को एजेंट अमरेंद्र और विवेक के पास भेजा, जो सरकार की सख्ती देख स्टूडेंट्स को 180 दिन तक विदेश भेजने की बात कर रहे हैं।
एजेंट्स ने दावा किया कि अमरेंद्र और विवेक नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से जुड़े हैं। इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि डॉक्यूमेंट्स के फर्जीवाड़े का पूरा काम अमरेंद्र ही देखता है।
अमरेन्द्र ने रिपोर्टर्स को विवेक का नंबर दिया। फोन पर बातचीत में विवेक ने खुद को सहरसा के श्री नारायण मेडिकल कॉलेज का कर्मचारी बताया। अमरेंद्र से कंफर्मेशन के बाद विवेक ने ऑफिस बुलाकर पूरी डील की।
विवेक का दावा- MP-राजस्थान के रास्ते काम करवा दूंगा
215 स्कोर वाले स्टूडेंट्स के MBBS में एडमिशन के लिए बिहार में नए नियम के तहत गार्जियनशिप एक्ट के जरिए डॉक्यूमेंट्स बनवाने की शर्त आ रही है। इस मामले में कोर्ट में केस चल रहा है। इसलिए फिलहाल पहले राउंड में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
वहां परिवार के सदस्य के बजाय एक मित्र भी दूसरे मित्र की स्पॉन्सरशिप ले सकता है (मध्य प्रदेश में हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए)। मध्य प्रदेश में NRI पेपर तैयार करवा देंगे, बस 4 लाख रुपए का खर्च आएगा। इसके लिए पहले स्टूडेंट का NEET स्कोर कार्ड और पूरी फैमिली ट्री के साथ पैसे दे दीजिए।
फैमिली ट्री में माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, मामा-मौसी और उनके बच्चों तक की जानकारी होनी चाहिए। इसके बाद स्पॉन्सर तलाशने की प्रक्रिया शुरू होगी। बिहार में एडमिशन मत कराइए, नियम के खिलाफ जाकर काम कराने के बजाय मध्य प्रदेश और राजस्थान में NRI के रास्ते एडमिशन कराइए।
वहां मैं कम में काम करा दूंगा, कहीं कोई रिस्क भी नहीं होगा। मैं NRI डॉक्यूमेंट्स बनवाऊंगा तो 4 लाख लूंगा। अगर स्टूडेंट्स खुद किसी दोस्त को स्पॉन्सर के तौर पर तलाश ले तो 10 हजार रुपए में करा दूंगा। हम लोग पैसे इसलिए लेते हैं क्योंकि स्पॉन्सर करने वालों को भी उनके नाम का इस्तेमाल करने के बदले देना पड़ता है।
एजेंट बोला- 180 दिन के लिए दुबई भेज दूंगा, NRI कोटा फिक्स
बातचीत के दौरान एजेंट विवेक ने किसी भी एजेंसी के पकड़ में नहीं आने वाला ट्रिक बताया। उसने बताया कि महंगा पड़ेगा, लेकिन ऐसा सॉलिड उपाय करा दूंगा कि दुनिया की कोई भी एजेंसी पकड़ नहीं पाएगी।
रिपोर्टर – आप कौन सा उपाय बता रहे हैं जो सॉलिड होगा? विवेक – 180 दिन दुबई भेजकर NRI बनाने का अपना सॉलिड उपाय होता है।
रिपोर्टर – वो कैसे? विवेक – पूरे देश में जो भी पैसे वाले लोग हैं, यही ट्रिक अपनाते हैं।
रिपोर्टर – अच्छा, प्रॉसेस क्या होता है? विवेक – अगले साल के लिए हम लोगों की पूरे देश में बड़ी तैयारी चल रही है।
रिपोर्टर – अगले साल के लिए क्यों? विवेक – दिल्ली में धरना प्रदर्शन से सरकार सख्त हो रही है, अगर सख्ती हुई तो यह ट्रिक अच्छी रहेगी।
रिपोर्टर – क्या कैंडिडेट्स को दुबई जाना होगा? विवेक – हां, स्टूडेंट्स को 180 दिन के लिए दुबई भेज देंगे। इसके बाद सीधे NRI के पेपर बन जाएंगे। दुबई में लड़का घूम भी लेगा और कोई अच्छी सी पढ़ाई भी करा देंगे।
रिपोर्टर – बस वहां रहने से ही हो जाएगा? विवेक – 180 दिन वहां रहने के बाद बच्चा ग्रीन कार्ड होल्डर हो जाएगा। इसके बाद वह यहां के लिए NRI बन जाएगा और उसका एडमिशन आसानी से करा दिया जाएगा।
रिपोर्टर – आप कहां-कहां से पेपर बनवाते हैं? विवेक – अभी तो हम यूएई, कतर, फिलीपींस, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों से पेपर बनवाते हैं।

NEET परीक्षा से पहले शुरू होने वाला MBBS एडमिशन का खेल रिजल्ट और काउंसलिंग तक ही नहीं रुकता, मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की आखिरी प्रक्रिया तक एजेंट और एडमिशन माफिया कैंडिडेट्स सर्च करते हैं।
इन्वेस्टिगेशन के दौरान भास्कर ने बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड, तमिलनाडु से लेकर पुडुचेरी तक पड़ताल की है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पहले रिपोर्टर्स बोरिंग रोड स्थित गुरुकुल एजुकेशनल कंसल्टेंसी की सुमन से मिले, 215 स्कोर वाले कैंडिडेट्स के पैरेंट्स बनकर मिलने पहुंचे अंडर कवर रिपोर्टर को सुमन ने NRI कोटे से एडमिशन का पूरा खेल बताया।
सुमन का दावा- एजेंसी भी नहीं पकड़ पाएगी डॉक्यूमेंट्स
जनरल कैटेगरी की फीस लगभग 15 लाख रुपए है, जबकि NRI कोटे में 30 लाख हो जाती है। ट्यूशन फीस, हॉस्टल और दूसरे खर्च जोड़ने पर कुल बजट करीब 1.50 करोड़ तक जाता है। NRI नहीं हैं तो रिश्तेदार होने के कागज तैयार हो जाएंगे। विदेश में रहने वाले किसी भी रिश्तेदार को स्पॉन्सर बनवा देंगे।
इसके लिए पासपोर्ट समेत दूसरे दस्तावेजों का इंतजाम करना होगा। छात्र का उस व्यक्ति से सीधा ब्लड रिलेशन नहीं है, तो दूर का रिश्ता दिखाकर सेट कर दिया जाएगा। NRI से जुड़े डॉक्यूमेंट्स बनवा देंगे और कॉलेज में उसका वेरिफिकेशन भी करवा देंगे।
डॉक्यूमेंट्स में ऐसा संबंध दिखा देंगे जो एजेंसी भी नहीं पकड़ पाएगी। सासाराम के प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में काम हो जाएगा। बस मुझे 10 लाख रुपए अलग से दे दीजिएगा।
देश के जिस स्टेट में जिस मेडिकल कॉलेज में बोलिएगा, महाराष्ट्र से लेकर दूसरे राज्यों के निजी मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया रैंकिंग पर NRI कोटे से इसी डॉक्यूमेंट्स पर MBBS में एडमिशन दिला देंगे।

सुमन से NRI कोटे से MBBS सीट की डील के दौरान ही बिहार के एजेंट अश्वनी भारद्वाज का इनपुट मिला। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए रिपोर्टर्स गांधी मैदान के पास NEET स्कोर 215 के साथ अश्विनी से मिले। अश्विनी ने किशनगंज और कटिहार मेडिकल कॉलेज में NRI कोटे से एडमिशन का दावा किया।
अश्विनी का दावा- 5 लाख में NRI डॉक्यूमेंट्स
स्कोर कम भी होगा तो देश के किसी भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में NRI कोटे से एडमिशन करा देंगे। कटिहार और किशनगंज के मेडिकल कॉलेज में तो पूछना ही नहीं है। बजट 1.40 करोड़ रुपए तक जाएगा।
परिवार में कोई NRI नहीं है तो टेंशन नहीं लीजिए, हम सेटिंग से डॉक्यूमेंट्स बनवाएंगे। NRI के लिए जरूरी ब्लड रिलेशन भी बनवा देंगे। चाहिए तो 5 लाख में NRI का डॉक्यूमेंट्स बनवा देंगे, बाकी कॉलेज से खुद चले जाइए। कॉलेज को अपनी सीट भरनी होती है।
कॉलेज को भी तो एडमिशन चाहिए। लेकिन 213 स्कोर वाले स्टूडेंट्स के लिए तो सामान्य श्रेणी में सीट की गुंजाइश नहीं होती, बस हम NRI कोटे के रास्ते एडमिशन करा देते हैं।

एजेंट्स से बातचीत में यह साफ हो गया था कि प्राइवेट मेडिकल कॉलेज एजेंट्स के माध्यम से NRI कोटे की सीट बेच रहे हैं। 10 से ज्यादा एजेंट्स बातचीत के बाद अंडर कवर रिपोर्टर्स मेडिकल कॉलेजों में भी कैंडिडेट्स और उनके पैरेंट्स बनकर गए।
एजेंट्स से सेटिंग की कड़ी जोड़कर रिपोर्टर पटना के बिहटा में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचे। यहां एडमिशन डिपार्टमेंट में तैनात एपी सिंह से मुलाकात हुई।
मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर भी एपी सिंह का नाम है। एपी सिंह ने पहले तो मना किया लेकिन थोड़ी देर बाद NRI कोटे का फर्जीवाड़ा समझाते हुए एजेंट का नंबर दे दिया।
एपी सिंह का दावा- 3 लाख में NRI डॉक्यूमेंट्स
आपको एक नंबर देते हैं, मैं उसे आपके सामने फोन कर देता हूं। मेरा NRI का सारा काम वही देखता है। आप वहां जाइए 3 लाख रुपए दीजिएगा, NRI डॉक्यूमेंट बन जाएगा। इसके बाद मुझे दो लाख रुपए दीजिएगा, सीट होल्ड हो जाएगी।
हमारे पास NRI की 38 सीट है। आप पेपर बनवाकर लाइए, बाकी काम तो मेरा है। मेरे एजेंट्स से आप सिर्फ NRI पेपर की बात कीजिएगा, एडमिशन की कोई बात नहीं कीजिएगा, नहीं तो वह भटका के दूसरे कॉलेज में पहुंचा देगा। 3 लाख के अलावा 1 करोड़ 29 लाख 57 हजार 500 रुपए अलग-अलग किश्तों में देने होंगे।

पटना में एजेंट विवेक से बातचीत में मध्य प्रदेश और राजस्थान से लेकर कई बड़े इनपुट मिले। इसी कड़ी में हमें मुजफ्फरपुर का इनपुट मिला। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए रिपोर्टर ने एजेंट अश्विनी शर्मा का मोबाइल नंबर निकाला।
बातचीत में अश्विनी ने खुद को मुजफ्फरपुर के राधा देवी जगेश्वरी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल का कर्मचारी बताया। वेबसाइट पर जब इसकी पड़ताल की गई तो अश्विनी का नाम वहां भी मिला। अश्विनी ने NRI के फर्जी डॉक्यूमेंटस पर एडमिशन की सेटिंग बताई।
अश्विनी का दावा- पूरी सेटिंग है, बस पैसे दीजिए
NRI का डॉक्यूमेंट्स से एडमिशन हो जाएगा। आपके 1.40 करोड़ रुपए खर्च होंगे लेकिन काम पक्का होगा। पैसा जैसे चाहिएगा दे दीजिएगा। नगद या ऑनलाइन, दोनों ऑप्शन होंगे।
इसके अलावा पहले 3 से 3.50 लाख रुपए आपके डॉक्यूमेंट्स के लिए लगेंगे। आपके परिवार में कोई एनआरआई नहीं है तो चिंता मत कीजिए। यहां एनआरआई से जुड़े दस्तावेज तैयार करवा दिए जाएंगे।
आप पैसा दीजिएगा तो स्टूडेंटस के सभी डॉक्यूमेंट्स कॉलेज से ही अरेंज करा दिए जाएंगे। कहीं कोई नहीं फंसेगा आपका 3.50 से 4 लाख रुपए में काउंसलर पूरा डॉक्यूमेंट्स तैयार करा देगा। लोग 5-5 लाख रुपए लेते हैं। यहां तो कम ही बताया जा रहा है।

पटना में 10 से अधिक एजेंट्स ने बातचीत में भोपाल का इनपुट दिया। 3 एजेंट्स ने तो भोपाल के महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस एंड रिसर्च (MIMS) का नाम लिया। अश्विनी ने भी भोपाल के इसी कॉलेज का नाम लिया था।
अश्विनी ने भी दावा किया था कि आपका एडमिशन 1 करोड़ में ही NRI कोटे से करा देंगे। इन्वेस्टिगेशन के लिए 3 अंडर कवर रिपोर्टर्स कैंडिडेट्स और पैरेंट्स बनकर पटना से लगभग 1050 किलो मीटर दूर भोपाल के एयरपोर्ट बाइपास रोड आईटी पार्क के पास काॅलेज पहुंचे।
कॉलेज में हमारी मुलाकात मनीष चौधरी से हुई। मनीष ने दावा किया कि 215 स्कोर पर भी NRI कोटे से MBBS में एडमिशन हो जाएगा।
मनीष का दावा- सारे पेपर एंबेसी से तैयार होंगे
आपके परिवार में कोई भी NRI नहीं है तो भी डॉक्यूमेंट्स बनवा दिए जाएंगे। NRI कोटे के लिए सभी जरूरी पेपर बनवा लिए जाएंगे। आपको साढ़े 3 से 4 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे, सब काम हो जाएगा। इसमें सबसे बड़ी समस्या स्पांसर की होती है, अपने पास इसकी कोई कमी नहीं है।
बहुत लोग ऐसे हैं जिनका नाम और डॉक्यूमेंट्स इस्तेमाल किया जा सकता है। स्पॉन्सर से लेकर पूरा डॉक्यूमेंट्स मैनेज हो जाएगा। आप तो सिर्फ जो रेट तय है, वही दे दीजिएगा।
पेपर तो एंबेसी से तैयार होता है। इसके लिए मोटा पैसा खर्च होता है। कम से कम 3 लाख तो लग ही जाते हैं। ऐंबेसी ही में 25 हजार से अधिक खर्च हो जाते हैं। इसके लिए हमारे पास एजेंट्स हैं, उनसे जाकर मिल लीजिएगा ।
भोपाल में कॉलेज से एजेंट्स की सेटिंग का खुलासा
मनीष चौधरी ने हमें एक एजेंट का नंबर दिया और कहा कि आप इससे बात कर लीजिएगा वह सारी सेटिंग कर देगा। वह स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंसर ढूंढने के साथ पूरे डॉक्यूमेंट्स कम्पलीट करा देगा। वह हम लोगों के लिए ही काम करता है।
आप खुलकर बात कर सकते हैं। आपकी सभी समस्या का समाधान हो जाएगा। डॉक्यूमेंट्स ओरिजनल होंगे, कोई नहीं पकड़ पाएगा। मनीष चौधरी ने जिस एजेंट प्रिंस का नंबर दिया जब उससे रिपोर्टर ने बात की तो कई बड़े लिंक सामने आए। प्रिंस ने दावा किया कि देश के कई कॉलेजों में उसकी तगड़ी सेटिंग है, अधिकतर काम वही कराता है।
प्रिंस ने ये भी खुलासा कि उसके लोग अगर NRI कोटे के लिए डॉक्यूमेंट्स बनवाकर एडमिशन न कराएं तो एमपी और देश के कई अन्य राज्यों की सीटें खाली ही रह जाएंगी। कॉलेज पर सवाल खड़े हो जाएंगे, इसलिए कॉलेज हमेशा उनके कांटेक्ट में रहते हैं और कैंडिडेंटस को भी भेजते हैं।
बाद में रिपोर्टर ने अंडर कवर बनकर प्रिंस को दूसरे मोबाइल नंबर से कॉल किया और खुद को एजेंट बताकर दो एडमिशन की बात की। प्रिंस ने कमीशन के साथ NRI कोटे से देश के किसी भी प्राइवेट कॉलेज में एडमिशन कराने का दावा किया।








