
टोंक जिला जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद जयपुर में मृत घोषित किए गए गणदेव गुर्जर की मौत के मामले में परिजन और ग्रामीण सोमवार को प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने जेल अधीक्षक को सस्पेंड करने, मौत की जांच और जेल में बंदियों से मारपीट के आरोपों पर कार्रवाई की मांग की। करीब डेढ़ घंटे कलेक्ट्रेट में धरना देने के बाद एडीएम ने मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात कराने और बंदियों के इलाज की व्यवस्था का आश्वासन दिया।

गांधी पार्क से कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन
गणदेव गुर्जर के परिजन और ग्रामीण सुबह करीब 11 बजे टोंक के गांधी पार्क पहुंचे। यहां करीब एक घंटे धरना दिया। इसके बाद करीब डेढ़ बजे सभी लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी करते हुए परिसर में धरने पर बैठ गए। करीब डेढ़ घंटे बाद एडीएम विनोद कुमार मीणा, एसडीएम और डीएसपी मृत्युंजय मिश्रा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की।
नगर निकायों की लॉटरी के कारण कलेक्टर से नहीं हो सकी मुलाकात
एडीएम विनोद कुमार मीणा ने लोगों को बताया कि कुछ देर बाद नगर निकायों की लॉटरी निकलने वाली है। इसके चलते कलेक्टर टीना डाबी व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि मंगलवार को कलेक्टर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उनकी समस्या का समाधान करेंगी। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर खाली कर दिया और गांधी पार्क चले गए।
छह महीने से जेल में बंद था गणदेव
सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र के पांवडेरा गांव निवासी गणदेव गुर्जर (30) करीब छह महीने से टोंक जिला जेल में बंद था। वह जानलेवा हमला और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में जेल में था।
मंगलवार देर रात उसकी तबीयत बिगड़ी और उसने सीने में दर्द की शिकायत की। बुधवार सुबह उसे सआदत अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे जयपुर रेफर कर दिया। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने जेल प्रशासन पर लगाया हत्या का आरोप
गणदेव की मौत के बाद परिजनों ने जयपुर अस्पताल में ही हंगामा किया और जेल प्रशासन पर उसकी हत्या का आरोप लगाया। परिजन वहीं धरने पर बैठ गए। दो दिन बाद प्रशासन और परिजनों के बीच सहमति बनी थी। परिजनों का कहना है कि छह दिन बीतने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर वे सोमवार को टोंक के गांधी पार्क में धरने पर बैठ गए।
इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
कलेक्ट्रेट में धरने के दौरान परिजनों ने आरोप लगाया कि गणदेव के इलाज में लापरवाही बरती गई। उनका कहना था कि उसे रात में ही सीने में दर्द हो गया था तो उसी समय अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया। परिजनों ने उसकी मौत को हत्या बताते हुए जेल अधीक्षक को सस्पेंड करने की मांग की।
बंदियों से मारपीट और भूख हड़ताल का भी आरोप
परिजनों ने आरोप लगाया कि गणदेव की मौत के बाद जेल में बंदियों ने भूख हड़ताल की थी। इस दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें खाना नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने मारपीट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और जिन बंदियों के साथ मारपीट हुई है, उनका इलाज कराने की मांग भी रखी।
एडीएम विनोद कुमार मीणा ने परिजनों को मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात कराने और जेल में बंदियों के इलाज की व्यवस्था करवाने का आश्वासन दिया।






