
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत राज्य कार्मिकों के समय-समय पर किए गए वेतन निर्धारणों की अब फिर से गहन जांच की जाएगी। वित्त विभाग के निर्देशों के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेशभर के संबंधित अधिकारियों को कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों के आधार पर वेतन निर्धारण की नियमानुसार जांच करने के निर्देश जारी किए हैं। जांच के दौरान पुनरीक्षित वेतनमान,पदोन्नति के बाद किए गए वेतन निर्धारण, चयनित वेतनमान, एसीपी एवं एमएसीपी के तहत किए गए वेतन निर्धारण सहित सेवा अभिलेखों में दर्ज वेतन संबंधी सभी प्रविष्टियों की पड़ताल की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद वेतन बिल में इस संबंध में निर्धारित प्रमाण-पत्र भी अंकित करना होगा।

अक्टूबर के वेतन बिल से लागू होगी प्रक्रिया
विभागीय निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया सितंबर के वेतन बिल के बजाय अक्टूबर 2026 के वेतन बिल से लागू की जाएगी। कार्यालय निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से मुख्य लेखाधिकारी ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों सहित संबंधित अधिकारियों को वित्त विभाग द्वारा 15 सितंबर को जारी परिपत्र की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षक संघ ने विभाग से आग्रह किया कि जांच एवं प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए, ताकि अक्टूबर 2026 के वेतन बिल तैयार करते समय किसी शिक्षक या कर्मचारी का वेतन अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। संगठन ने कहा कि नियमों की पालना के साथ-साथ कर्मचारियों के हितों और उनके अभिलेखों की वास्तविक स्थिति को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इन मामलों की होगी विशेष जांच:
- समय-समय पर किए गए पुनरीक्षित वेतन निर्धारण।
- पदोन्नति के बाद किए गए वेतन निर्धारण।
- चयनित वेतनमान के तहत किए गए वेतन निर्धारण।
- एसीपी एवं एमएसीपी के तहत किए गए वेतन निर्धारण।
- सेवा पुस्तिका एवं अन्य सेवा अभिलेखों के आधार पर वेतन निर्धारण में नियमों की पालना।
- पूर्व में जारी वेतन निर्धारण आदेशों एवं संबंधित अभिलेखों का सत्यापन।

रेसटा ने पारदर्शिता और राहत की मांग की
वेतन निर्धारण की फिर से जांच को लेकर शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि जांच का उद्देश्य नियमों के अनुरूप वेतन भुगतान सुनिश्चित करना है, लेकिन पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कर्मचारी हित में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा पुस्तिका और पूर्व में जारी वेतन निर्धारण आदेशों के आधार पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए, ताकि कर्मचारियों एवं शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। सलावद ने कहा कि पदोन्नति, चयनित वेतनमान, एसीपी/एमएसीपी तथा संशोधित वेतनमान के दौरान किए गए वेतन निर्धारण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
यदि किसी प्रकरण में कोई त्रुटि सामने आती है तो संबंधित कार्मिक को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिन कर्मचारियों का वेतन निर्धारण नियमों के अनुसार सही पाया जाता है, उनसे बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करवाए जाएं। साथ ही जांच के लिए सभी कार्यालयों को स्पष्ट एवं एकरूप दिशा-निर्देश उपलब्ध करवाए जाएं।






