
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर ‘गैर मुमकिन पहाड़ी’ से अतिक्रमण हटाने के नोटिस के विरोध में शनिवार को घाड़ गांव में दर्जनों परिवारों और महिलाओं ने धरना दिया। ग्रामीण मुख्य बाजार में स्थित याचिकाकर्ता के घर के बाहर अपने घरेलू सामान, लकड़ियां और बर्तन लेकर सड़क पर बैठ गए और प्रशासनिक अधिकारियों से अपनी मांगें सुनने की गुहार लगाई।
यह विरोध खसरा नंबर 1555 (रकबा 6.90 हेक्टेयर) से अतिक्रमण हटाने के लिए दिए गए नोटिस के खिलाफ था। राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि ‘गैर मुमकिन पहाड़-सिवायचक’ के रूप में दर्ज है। प्रशासन द्वारा 24 अगस्त 2026 को इस भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई निर्धारित की गई है।
धरना दे रहे ग्रामीणों और महिलाओं का कहना था कि वे पिछले कई वर्षों से इस जगह पर पक्के और कच्चे मकान बनाकर रह रहे हैं। उनका विरोध प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ था, जो उन्हें बेघर कर सकती है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दूनी तहसीलदार अजय कुमार पांडे तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए समझाया कि प्रशासन केवल अदालत के निर्देशों का पालन कर रहा है।
तहसीलदार पांडे ने ग्रामीणों को स्पष्ट किया कि इस मामले में उन्हें किसी भी प्रकार की राहत केवल कोर्ट के स्तर से ही मिल सकती है। करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद, तहसीलदार की समझाइश और नियमों की जानकारी मिलने पर ग्रामीण शांत हुए और अपने घरों को लौट गए, जिसके बाद धरना समाप्त हो गया। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया न्यायिक आदेशों के अनुपालन में निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है।






