टोंक, 3 घंटे पहले

टोंक जिले में भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं, स्वदेशी चिंतन और स्थानीय कला-साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘लोक मंथन यात्रा-2026’ कृषि ऑडिटोरियम में हुआ। विविध सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों के साथ ये कार्यक्रम पूरा हुआ। जिसमें लोक जीवन की परंपराओं, भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, साहित्य, खेल, योग और स्वदेशी उद्यमिता को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। संयोजक महेंद्र कुमार विजय ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 8 बजे यात्रा के आगमन और स्वागत कार्यक्रम से हुई। इसके बाद स्वागत गीत ने वातावरण को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। सेवा भारती की ओर से प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने राजस्थान की लोक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

गुरुकुल विषय पर हुआ पॉडकास्ट मंथन
कार्यक्रम में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के सहयोग से ‘गुरुकुल—क्यों, क्या, कैसे’ विषय पर पॉडकास्ट मंथन आयोजित किया गया। इसमें भारतीय शिक्षा परंपरा, गुरुकुल व्यवस्था और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण नर्मदा और स्थानीय लघु उद्योग प्रदर्शनी रही। आयोजकों के अनुसार इस गतिविधि का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभा, कारीगरों और लघु उद्यमों को प्रोत्साहन देने के साथ स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना रहा।
लोक काव्य गोष्ठी बनी आकर्षण का केंद्र
दोपहर में आयोजित लोक काव्य गोष्ठी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। साहित्य परिषद के सहयोग से आयोजित गोष्ठी में लोकभाषा, लोक संवेदना और भारतीय संस्कृति से जुड़े काव्य पाठ ने श्रोताओं को भाव-विभोर किया।

लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान प्राचीन व्यवस्था का मंचन किया गया
लोक मंथन यात्रा समिति से जुड़े आयोजकों ने कहा कि लोक मंथन यात्रा का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों, लोक परंपराओं और भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ना है।
कार्यक्रम में जसवंत खत्री सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर और डॉक्टर सत्यनारायण कुमावत संयोजक लोकदर्शन परिक्रमा यात्रा राजस्थान क्षेत्र सह संयोजक प्रज्ञाप्रवाह का विशेष पाथेय और मार्गदर्शन मिला।






