
जिले में मानसून की बेरुखी के कारण वर्ष 2017 के बाद इस बार जिले में सबसे कम बारिश दर्ज हुई है। 15 जून से अब तक जिले में महज 443.30 मिमी बारिश हुई है। इससे बीसलपुर बांध के लगातार तीसरी बार फुल भरने की उम्मीद भी टूट गई। मानसून से पहले बांध में 313.49 आरएल मीटर पानी था, जो अब बढ़कर 313.95 आरएल मीटर ही पहुंच पाया है।

बांध की फुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर है। ऐसे में अभी भी करीब डेढ़ मीटर से अधिक पानी की कमी बनी हुई है। इससे पहले वर्ष 2017 में 15 जून से 30 सितंबर तक जिले में 418.77 मिमी बारिश दर्ज हुई थी। इस लिहाज से इस बार बारिश का आंकड़ा भले ही 2017 से थोड़ा अधिक है, लेकिन सामान्य मानसूनी स्थिति के मुकाबले यह बेहद कम है। इस बार बांध फुल नहीं भरने का असर केवल वर्तमान जलापूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। बीसलपुर बांध से टोंक के साथ जयपुर और अजमेर को भी पानी मिलता है। यदि अगले मानसून से पहले तक बांध में पर्याप्त आवक नहीं हुई तो गर्मी के महीनों में पेयजल प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं सिंचाई बांधों में भी इस बार अपेक्षित भराव नहीं होने से खरीफ के बाद रबी फसलों के लिए पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। जानकारों का कहना है कि लगातार दो वर्षों में बारिश के आंकड़ों में बड़ा अंतर रहने पर भूजल रिचार्ज भी प्रभावित होता है। कुओं और ट्यूबवेलों का जलस्तर नीचे जाने से किसानों की सिंचाई लागत बढ़ सकती है। ऐसे में अगले साल मानसून की शुरुआत तक जलस्रोतों की स्थिति पर नजर रखना जरूरी होगा। इस बार की कम बारिश ने साफ संकेत दे दिया है कि अच्छी बारिश के भरोसे ही जलसुरक्षा तय नहीं की जा सकती। पूर्व प्राचार्य बीएल बैरवा, सिंचाई विभाग के पूर्व एक्सईएन अशोक जैन सहित कई प्रबुद्धजनों का कहना है कि बारिश कम को देखते हुए पानी की बचत करना बेहद जरुरी हो गया है। ताकि आगामी वर्ष पानी संकट से बचा जा सके।






