
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लाखों का फर्जीवाड़ा सामने आया है। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में एक किसान ने एक ही खेत में एक ही फसल का 3 बार खराबा क्लेम उठा लिया।
चौंकाने वाली बात ये है जमीन बटाई (लीज) पर दी हुई थी। बटाईदार ने भी उसी फसल का खराबा दिखाकर 7 लाख से ज्यादा का क्लेम ले लिया। एक ही खेत पर क्लेम उठाने के लिए 7 बार आवेदन किए गए थे।
इनमें से 4 आवेदन मंजूर हो गए और कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपए का क्लेम खातों में पहुंच गया। इस मामले में कृषि विभाग ने बीमा कंपनी पर सवाल उठाए हैं।
फर्जीवाड़ा करने वाले किसानों, CSC/e-मित्र संचालकों के साथ बीमा कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए हैं। आखिर एक ही खेत की 4 पॉलिसियां क्लेम तक कैसे पहुंच गईं? पढ़िए इस स्टोरी में…
सबसे पहले पढ़िए- एक ही खेत पर 4 बार उठा लाखों का क्लेम
श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ के गांव कालूसर में खसरा नंबर 281/91 का असली मालिक किसान बनवारी लाल है। कुल जमीन 10.37 हेक्टेयर (करीब 40 बीघा) है।

पहला बीमा : किसान बनवारी लाल ने मूंगफली की फसल बोई थी, जिसका उसने बतौर ऋणी किसान खरीफ जुलाई 2025 में बीमा करवाया।
दूसरा बीमा : बनवारी लाल ने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) यानी ई-मित्र संचालक विकास कुमार के जरिए से 10.37 हेक्टेयर जमीन पर ही दूसरा बीमा करवाया।
तीसरा बीमा : किसान बनवारी लाल ने एक दूसरे सीएससी संचालक बिजेश के माध्यम से फिर 10.30 हेक्टेयर जमीन का तीसरा बीमा करवाया।
किसान बनवारी लाल ने तीनों आवेदनों में मूंगफली की फसल खराबा दिखाते हुए कुल 23,35,319 रुपये का बीमा क्लेम उठा लिया।

बटाईदार रिछपाल के बीमा के लिए आवेदन के दस्तावेज।
चौथा बीमा : जमीन के बटाईदार ने भी कराया बीमा
फर्जी तरीके से क्लेम उठाने का सिलसिला यहीं नहीं रुका। बनवारी लाल ने यह जमीन रिछपाल पुत्र गिरधारी को लीज (बंटाई) पर दी हुई थी।
रिछपाल ने भी 15 जून 2025 को मूंगफली की बुवाई दिखाते हुए पूरी 10.37 हेक्टेयर जमीन पर बतौर बटाईदार किसान फसल बीमा करवा लिया। खराबा होने पर रिछपाल ने भी 7 लाख 80 हजार 195 रुपए का क्लेम उठा लिया।
इस तरह 4 अलग-अलग पॉलिसी के जरिए कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपए का क्लेम फर्जी तरीके से उठा लिया गया।

कैसे हुआ खेल? : 7 बार कोशिश, 4 बार उठाया फायदा
जांच में सामने आया कि एक ही खसरा नंबर पर 7 बार अलग-अलग ई-मित्रों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के आवेदन किए गए।
बीमा कंपनी क्षेमा जनरल इंश्योरेंस (Kshema General Insurance) द्वारा सबसे पहला आवेदन अप्रूव कर दिया गया। इसका क्लेम सबसे पहले पास हुआ, जो किसान बनवारी लाल के खाते में गया।
इसके बाद 3 अलग-अलग आवेदन थोड़ी-थोड़ी डिटेल बदलकर किए गए, जिन्हें बीमा कंपनी ने अपनी जांच के दौरान रिजेक्ट कर दिया। यानी बीमा कंपनी के सिस्टम में फर्जीवाड़ा पकड़ में आ रहा था।
कुछ दिन बाद उसी जमीन पर फिर से बाद 3 आवेदन और आए। इस बार बीमा कंपनी की ओर से आवेदन को रिजेक्ट नहीं किया गया न ही कोई ऑब्जेक्शन लगाया। नतीजा ये हुआ कि फाइल आगे बढ़ती चली गई।
PM फसल बीमा की प्रक्रिया में तय समय में पॉलिसी पर आपत्ति या रिजेक्शन दर्ज नहीं होने पर वह ऑटो-अप्रूव हो सकती है।
ऐसे में बाकी के सभी 3 फर्जी आवेदन बीमा कंपनी के सिस्टम से ऑटो अप्रूव्ड (अपने आप मंजूरी) हो गए। क्लेम का सारा पैसा फर्जी आवेदनकर्ताओं के खातों में ट्रांसफर हो गया।

बीमा कंपनी संदेह के घेरे में
विभाग के अनुसार बीमा कंपनी के कई कर्मचारियों की भूमिका संदेह के दायरे में है। सबसे बड़ा सवाल है जिन पॉलिसियों के आधार पर लाखों रुपए का क्लेम दिया गया, उन्हें मंजूरी किस प्रक्रिया के तहत मिली। ऑटो अप्रूवड हुई पॉलिसी को रिजेक्ट क्यों नहीं किया गया। अब कृषि विभाग ने पॉलिसियों के चयन, स्वीकृति और अस्वीकृति की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
राजस्थान में कई मामले विभाग को मिले
श्रीगंगानगर का मामला सामने आने के बाद कृषि विभाग ने प्रदेशभर में पॉलिसी और क्लेम की जांच शुरू कर दी है। खसरा नंबर, जमीन का रकबा, किसान की पात्रता, फसल और एक ही जमीन पर बनी एक से ज्यादा पॉलिसियों का मिलान कर ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है। खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि कहीं एक ही जमीन को अलग-अलग किसानों, बटाईदारों या CSC/e-मित्र के जरिए दोबारा तो बीमित नहीं किया गया।

टोंक और जयपुर के शाहपुरा में 5 किसानों पर FIR के निर्देश
फर्जी क्लेम उठाने के मामले में कृषि विभाग ने टोंक और जयपुर जिलों में बड़ा एक्शन लिया है। 5 किसानों के खिलाफ FIR के निर्देश दिए हैं। खरीफ 2026 के दौरान टोंक जिले की मालपुरा तहसील और जयपुर जिले की शाहपुरा तहसील में भी ऐसा ही फर्जीवाड़ा सामने आया था।






