
न्यूज | निवाई
राष्ट्रीय संत दिव्य तपस्वी आचार्य सुन्दर सागर महाराज के सानिध्य में चातुर्मास प्रवास के दौरान श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर में सुज्ञानीमति माताजी की संल्लेखना समाधि हो गई।
समाधि होने पर जैन समाज के श्रद्धालुओं ने दर्शन करते हुए वन्दना की। मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा एवं मंदिर अध्यक्ष सुशील आरामशीन ने बताया कि आचार्य सुन्दर सागर महाराज 22 पिच्छिका सहित अग्रवाल मंदिर में विराजमान है। इस दौरान संयम की मूर्ति सुज्ञानीमती माताजी की संयम संलेखना से समाधी हो गई है। सोमवार को अष्ट कर्म का नाश कर 8 गुणों को प्राप्त करने हेतु सुज्ञानीमती माताजी ने 28 अगस्त को दीक्षा ली थी। इस दौरान सुज्ञानीमती माताजी ने 4 दिन पूर्व संयम संलेखना धारण की थी। उससे पूर्व की बेला में दो उपवास एक आहार में मात्र जल ही लिया था। प्रतिदिन आचार्य संघ के साधु साध्वियां उनको संबोधित करते थे। इस दौरान आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने संबोधन कर बताया कि जिस प्रकार मंदिर के शिखर की शोभा कलशारोहण से होती है। उसी प्रकार साधु के जीवन में समाधि धारण करना संयम का कलशारोहण होता है। हितेश छाबड़ा ने बताया कि सुज्ञानीमती माताजी का समाधिमरण सोमवार को हो जाने पर की चकडोल यात्रा निकाली गई। जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। चकडोल यात्रा अग्रवाल मंदिर से होती हुई भगवान महावीर मार्ग, अहिंसा सर्किल होते हुए जैन नसियां मंदिर पहुंची। जहां पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए माताजी की समाधी स्थल पर हजारों श्रीफल अर्पित करके नमोस्तु किया।






