सीकर के संजय यादव का नवाचार:धनधान्य योजना के उद्घाटन पर पीएम को बताया था जैविक खेती का मॉडल

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सीकर जिले के किसान संजय यादव आठवीं तक पढ़े हैं, लेकिन खेती में उनके नवाचार देख कृषि वैज्ञानिक भी हैरान हैं। पहले उन्होंने प्राकृतिक खेती, मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। फिर दो साल अपने खेत पर रिसर्च कर पांच रंगों की मक्का उगाने लगे। होटलों- रेस्टोरेंट से इस रंगबिरंगे मक्के की मांग आने लगी। अब उन्होंने पेटेंट के लिए आवेदन किया है।

एक हेक्टेयर खेत में वे पहले रासायनिक खाद-कीटनाशकों का भी इस्तेमाल करते। 30 प्रतिशत तक बचत होती थी। रसायनों का इस्तेमाल बंद किया और तकनीक के साथ जैविक मॉडल अपनाया तो बचत 70 प्रतिशत तक होने लगी। अब दुर्गापुरा पिपराली में उनका यह कृषि फार्म क्षेत्र के किसानों के लिए प्रशिक्षण केंद्र बन चुका है। जहां वे करीब डेढ़ सौ किसानों को प्राकृतिक खेती सिखा चुके हैं। अक्टूबर 2025 में धनधान्य योजना शुरू हुई थी।

इसके उद्घाटन पर वे दिल्ली गए थे। जहां पीएम मोदी ने उनसे प्राकृतिक खेती पर जानकारी ली।यादव ने बताया कि देसी बीज, देसी गाय के गोमूत्र व गोबर से जीवामृत, घनजीवा अमृत, वर्मी कंपोस्ट, वार्निवास, सरल कंपोस्ट, चूना आदि उपयोग में ले रहे हैं। सब घर पर ही बनाकर अपने खेत में काम में लिए जिससे खर्चा घटा और आमदनी बढ़ी। बाजार से कीटनाशक लाने की बजाय अपने ही घर पर कीटनाशक बनाने लगे जिसमें अग्नि अस्त्र, ब्रह्मास्त्र, दसपार्नी, पंचगव्य आदि इस्तेमाल कर रहे हैं। संजय ने बताया कि एक हेक्टेयर जमीन पर प्राकृतिक कृषि का रजिस्ट्रेशन करवा चुका हूं। मिर्च, टमाटर, भिंडी, लौकी, करेला, बैंगन, गोभी, ब्रोकली, मूली, सिजनल सभी सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। मिश्रित खेती में हल्दी, काली हल्दी उपजाते हैं। अपने फार्म पर ही बीज उत्पादन करके किसानों को उपलब्ध करवाते हैं।

मसाला फसलों में राई, सौंफ, हल्दी आदि का भी उत्पादन कर रहे हैं। रविवार व बुधवार को सीकर शहर में अपनी सब्जियां सीधे ग्राहकों को बेच देते हैं। इससे तीन से चार लाख रुपए आय हो रही है। पांच देसी गायें हैं। इनके दूध से घी बना रहे हैं। इससे सालाना तीन से चार लाख रुपए की आमदनी हो रही है। बटन मशरूम, ओयस्टर मशरूम, मिल्की मशरूम से उनको सालाना पांच लाख से ज्यादा की कमाई हो रही है। उनके प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण केंद्र पर दूसरे राज्यों से भी किसान पहुंच रहे हैं।

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