
इफको द्वारा ग्राम सेवा सहकारी समिति भवन में एक किसान सभा का आयोजन किया गया। इस सभा का उद्देश्य किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग, उनके फायदों और सही इस्तेमाल के तरीकों के बारे में जानकारी देना था। इसमें नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और अन्य जैव उर्वरकों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इफको टोंक के उप क्षेत्रीय प्रबंधक शशि प्रकाश जाखड़ ने नैनो उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत विधि समझाई। उन्होंने बताया कि फसल के बीजों को प्रति किलोग्राम 5 से 10 मिलीलीटर नैनो डीएपी से उपचारित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में 4 मिलीलीटर नैनो डीएपी प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई। इस विधि से दानेदार डीएपी की मात्रा में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है।
जाखड़ ने यह भी जानकारी दी कि नैनो यूरिया को 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर नैनो डीएपी के साथ मिलाकर फसल की 30 से 35 दिन की अवस्था में छिड़का जा सकता है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक उपयोग से होने वाले जल, मृदा और वायु प्रदूषण के साथ-साथ मानव जीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को जागरूक किया।
उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और उनके स्थान पर नैनो उर्वरक, हरी खाद, कंसोर्टिया तथा अन्य जैव उर्वरकों के इस्तेमाल पर जोर दिया। इफको के क्षेत्र प्रबंधक देवेंद्र बिश्नोई ने किसानों को फसलों में लगने वाले विभिन्न रोगों और उनके उपचार के लिए उपयोगी दवाइयों की जानकारी दी। उन्होंने नैनो कॉपर सहित इफको के नए उत्पादों के उपयोग की विधि और मात्रा के बारे में भी बताया।
इस कार्यक्रम में दत्तवास ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष मीठालाल, व्यवस्थापक रूपेंद्र, इफको के क्षेत्रीय सहायक सचिन गुर्जर, लादूराम मीणा, देवराज गुर्जर, ब्रजमोहन मीणा, शौकत खान सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।






