एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग और उससे पैदा हो रही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) की चुनौती से निपटने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज, टोंक में सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम आयोजित किया गया। सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग की ओर से एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर एवं ग्लोबल पब्लिक हेल्थ अवेयरनेस एंड रिसर्च (जीपीएचएआर) के सहयोग से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने डॉक्टरों और मेडिकल विद्यार्थियों को संक्रामक रोगों की रोकथाम तथा एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग के बारे में जानकारी दी।

प्राचार्य डॉ. लोकेन्द्र शर्मा ने कहा कि बदलते समय में चिकित्सकों का नवीनतम वैज्ञानिक जानकारियों से अपडेट रहना जरूरी है। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करते हैं और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. निधि सिंह ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक और गलत उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या को बढ़ा रहा है। इससे बचने के लिए संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन और एंटीबायोटिक का जिम्मेदारी से उपयोग जरूरी है।
सीएमई के आयोजन सचिव डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों, इंटर्न और मेडिकल विद्यार्थियों को संक्रामक रोगों तथा एएमआर से जुड़े नवीनतम वैज्ञानिक शोध और उपचार पद्धतियों की जानकारी देना था।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर की वरिष्ठ प्रोफेसर व सूक्ष्मजीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. रजनी शर्मा ने ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस: वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यदि एंटीबायोटिक दवाओं का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं किया गया तो भविष्य में सामान्य संक्रमण का उपचार भी चुनौती बन सकता है। उन्होंने एंटीबायोटिक स्ट्यूवर्डशिप और संक्रमण नियंत्रण की प्रभावी रणनीतियों पर भी विस्तार से जानकारी दी।
इसके बाद वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. भारती मल्होत्रा ने मौसमी संक्रामक रोगों पर जानकारी दी। उन्होंने बरसात के मौसम में फैलने वाले संक्रमणों की शीघ्र पहचान, बचाव और समय पर उपचार के उपाय बताए।
कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य डॉ. ममता चौधरी ने किया। इस दौरान डॉ. दिनेश कुमार, विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, रेजिडेंट चिकित्सक, इंटर्न व मेडिकल विद्यार्थी उपस्थित रहे।






