
निवाई उपखंड की सहकारी समितियों में खाद लेने के लिए किसान सुबह से ही कतारों में लग गए। दहलोद सहकारी समिति में करीब 600 कट्टे डीएपी पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में किसान खाद लेने पहुंच गए। भीड़ बढ़ने से वितरण
खाद लेने के लिए किसानों की लंबी कतारें लग गईं। किसानों का आरोप है कि कुछ लोग सांठगांठ कर बड़ी मात्रा में खाद ले जा रहे हैं। इससे सामान्य किसानों को अपनी जरूरत के मुताबिक डीएपी लेने में परेशानी हो रही है।
किसानों का कहना है कि खाद की जरूरत के मुकाबले उपलब्धता सीमित है। वितरण के दौरान प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से समितियों पर भीड़ बढ़ रही है।
बोले- प्रशासन की निगरानी से सुधर सकती है व्यवस्था
किसानों ने मांग की कि खाद वितरण के दौरान प्रशासन की निगरानी और स्पष्ट नियम लागू किए जाएं। इससे भीड़ को नियंत्रित करने के साथ प्रत्येक किसान को नियमानुसार खाद उपलब्ध कराई जा सकेगी।
किसानों का कहना है कि यदि वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो और किसानों की जरूरत के अनुसार खाद दी जाए तो अव्यवस्था और अनियमितता की आशंका कम होगी।
अप्रैल से 14 अगस्त तक 10,556 डीएपी की प्राप्ति
कृषि विभाग के खरीफ 2026 के आंकड़ों के अनुसार डीएपी की मांग 12,000 दर्ज की गई है। 1 अप्रैल को विभाग के पास शुरुआती स्टॉक 2,453 था। अप्रैल से 14 अगस्त तक कुल 10,556 डीएपी की प्राप्ति हुई, जबकि इसी अवधि में 8,475 की बिक्री दर्ज की गई है।
विभाग बोला- मांग और उपलब्धता के अनुसार हो रही व्यवस्था
कृषि विभाग टोंक के संयुक्त निदेशक रामलाल जाट ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग और उपलब्धता के अनुसार व्यवस्था की जा रही है। डीएपी सहित अन्य उर्वरकों की प्राप्ति और बिक्री का रिकॉर्ड विभागीय स्तर पर संधारित किया जा रहा है।
बुवाई से पहले पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग
किसानों ने मांग की है कि सरसों की बुवाई शुरू होने से पहले डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही सहकारी समितियों पर ऐसी वितरण व्यवस्था लागू की जाए, जिससे प्रत्येक किसान को नियमानुसार खाद मिल सके और किसी भी स्तर पर अनियमितता की गुंजाइश न रहे।






