अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग बोला- RSS पर बैन लगे:यहां आने वाले संघ के नेताओं को सम्मान न मिले; भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे

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RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वे भारतीय प्रवासी समुदाय से संवाद करेंगे।- फाइल फोटो

अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है।

आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।

पाकिस्तानी मूल के महमूद का यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे।

भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

भागवत सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे और शिकागो में वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस को संबोधित किया था। उपलब्ध रिपोर्टों में इस दौरे में उनकी किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या औपचारिक राजनयिक सम्मान का जिक्र नहीं मिलता।

आयोग के कमिश्नर बोले- भारत सरकार से जुड़े RSS नेताओं को सम्मान न मिले

USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।

100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के कनाडा दौरे का समर्थन किया

कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की।

संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए और कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

USCIRF भारत को ‘विशेष चिंता का देश वाली सूची’ में शामिल करने की सिफारिश कर चुका

USCIRF ने कई बार भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी CPC घोषित करने की सिफारिश की है।

आयोग ने पहली बार 2004 में यह सिफारिश की थी और 2020 में इसे फिर दोहराया। इसके बाद 2021 से 2026 तक की रिपोर्टों में भी USCIRF ने भारत को CPC सूची में शामिल करने की मांग की।

हालांकि, USCIRF की सिफारिश का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत को CPC घोषित कर दिया है।

RSS और RAW पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन कर चुका

मार्च 2026 में USCIRF की सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी संस्थाओं और कुछ लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

भारत ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि USCIRF संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक सोच के आधार पर लगातार देश की खराब छवि पेश करता है।

16 मार्च को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत की चुनिंदा आलोचना करने के बजाय USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

USCIRF के बारे में जानिए

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी USCIRF अमेरिका की स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट के तहत बनाया था।

इसके सदस्य राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों की ओर से नियुक्त होते हैं। USCIRF का काम निगरानी और सलाह देना है।

यह किसी देश या संगठन पर प्रतिबंध की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार का होता है। यानी इसकी सिफारिश से प्रतिबंध अपने-आप लागू नहीं होता। इसकी रिपोर्टें अमेरिकी सरकार के फैसलों और विदेश नीति पर असर डाल सकती हैं।

USCIRF के बारे में जानिए

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी USCIRF अमेरिका की स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट के तहत बनाया था।

इसके सदस्य राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों की ओर से नियुक्त होते हैं। USCIRF का काम निगरानी और सलाह देना है।

यह किसी देश या संगठन पर प्रतिबंध की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार का होता है। यानी इसकी सिफारिश से प्रतिबंध अपने-आप लागू नहीं होता। इसकी रिपोर्टें अमेरिकी सरकार के फैसलों और विदेश नीति पर असर डाल सकती हैं।

USCIRF का काम क्या है…

  • अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक उत्पीड़न की स्थिति की निगरानी करती है।
  • अपनी रिसर्च और जांच के आधार पर सालाना रिपोर्ट जारी करती है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देती है।
  • कुछ देशों को ‘विशेष चिंता का देश’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश कर सकती है।
  • गैर-सरकारी संगठनों/समूहों के लिए ‘विशेष चिंता वाली संस्था/समूह’ EPC की सिफारिश कर सकती है।
  • अमेरिकी सरकार से प्रतिबंध, राजनयिक दबाव या अन्य कदम उठाने की सिफारिश कर सकती है।

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