अलीगढ़ के जगत श्रवण मंदिर में क्षत्रिय खंगार समाज रामपुरा की ओर से श्रावण मास के अवसर पर सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का हुई। मंगलवार को कथा के चौथे दिन गौरी शंकर विवाह महोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। कथा के चौथे दिन की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई। कथावाचक ने उपस्थित श्रद्धालुओं को रुद्र संहिता के अंतर्गत सती खंड का प्रसंग सुनाया। भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रसंग का वर्णन करते ही पूरा पांडाल ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान महिलाओं ने मंगल गीत गाए।
गौर कृपा धाम वृंदावन से पधारे कथावाचक आश्रित वैष्णव दासानुदास भरत अभिराम दास महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए अपने प्रवचन में कहा कि “श्रद्धा जितनी मजबूत होगी, उतना ही विश्वास का आकर्षण करेगी।”

महाराज ने अध्यात्म का गहरा संदेश देते हुए समझाया कि माता पार्वती श्रद्धा की प्रतीक हैं और भगवान शिव विश्वास के प्रतीक हैं। जब जीवन में इन दोनों (श्रद्धा और विश्वास) का गठजोड़ होता है, तब विवेक रूपी गणेश का जन्म होता है।
उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य के जीवन में कितनी भी प्रतिकूलताएं या संकट क्यों न आ जाएं, भगवान की कृपा हमेशा जीव को संभालती है। शर्त केवल इतनी है कि जीवन में श्रद्धा और विश्वास का अटूट मेल बना रहना चाहिए। कथा के दौरान देश प्रेम और सनातन धर्म के संरक्षण पर भी विशेष बल दिया गया।
इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में क्षत्रिय खंगार समाज के पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों का विशेष सहयोग रहा। कथा के दौरान मुख्य रूप से जितेंद्र खंगार, चंचल खंगार, शंकरलाल खंगार, रमेश चंद शर्मा, भंवरलाल शर्मा, नरोत्तम गौतम सहित समाज के कई गणमान्य नागरिक, युवा और मातृशक्ति उपस्थित रहे।






