
दिल्ली के विजय विहार में पांच मंजिला एक बिल्डिंग है। इस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है आध्यात्मिक विश्वविद्यालय। दीवार पर मनुस्मृति का श्लोक है- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता, यानी जहां नारी की पूजा और सम्मान होता है, वहां देवता वास करते हैं।

लेकिन अंदर की कहानी अलग ही है। आश्रम में जबरन लड़कियों को रखने के आरोप लग रहे हैं। आरोप आश्रम शुरू करने वाले वीरेंद्र देव दीक्षित के वकील रहे अमोल कोंकणे पर हैं। अमोल खुद को वीरेंद्र देव का उत्तराधिकारी बताता है। पीड़ित परिवारों का दावा है कि अमोल ने लड़कियों का ब्रेनवॉश किया। वो कहता है कि मेरे अंदर ईश्वर आते हैं। मैं ही शिव हूं।
वीरेंद्र देव दीक्षित पर भी दिल्ली के 8 अलग-अलग थानों में रेप और लड़कियों को जबरन बंधक बनाने के केस दर्ज थे। आरोप लगा कि वो महिला अनुयाइयों से कहता था, ‘मैं ही राम हूं, कृष्ण हूं और शिव हूं। तुम मेरी 16 हजार रानियों में से एक हो। जैसे शिवलिंग की पूजा होती है, मेरे लिंग की पूजा करो। तुम्हें जगदंबा बना दूंगा।’
2017 में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। आश्रम में छापेमारी हुई। पता चला कि अंदर लड़कियों को कैद करके रखा जाता था। आश्रम से करीब 200 लड़कियां मिलीं। इनमें 46 नाबालिग थीं। 2023 में वीरेंद्र देव की मौत हो गई। इसके बाद केस बंद हो गया।

सफेद रंग की ये 5 मंजिला इमारत आध्यात्मिक विश्वविद्यालय का मुख्य आश्रम है। बिल्डिंग का नाम शिव शक्ति भवन है।
2017 से 2026 तक आश्रम के ‘भगवान’ बदल गए, लेकिन एक चीज नहीं बदली- आश्रम पर लगने वाले आरोप। भास्कर ने पीड़ित परिवारों, पुराने मामले से जुड़े लोगों, CBI की चार्जशीट और उपलब्ध वीडियो-चैट्स की पड़ताल की। पढ़िए रिपोर्ट…
लोहे की खिड़कियां, बंद दरवाजे, आश्रम में अंदर जाने की इजाजत नहीं ये आश्रम रिठाला मेट्रो स्टेशन से दो किमी दूर है। हमने अंदर जाने की परमिशन मांगी। जवाब नहीं मिला। बाहर से बिल्डिंग को देखा, तो लगभग हर खिड़की पर लोहे की ग्रिल नजर आई। खिड़कियों के अंदर एक और जाली और उसके पीछे टिन जैसी परत दिखाई दी।
दरवाजा थोड़ा खुला, तो सफेद साड़ी में दो महिलाएं दिखाई दीं। नजर पड़ते ही दरवाजा बंद हो गया। करीब आधे घंटे में कई बार दरवाजा खुला-बंद हुआ। गेट और छत से भी हमारे ऊपर नजर रखी जाती रही।

आश्रम से एक शख्स बाहर आया और पूछताछ करने लगा। अमोल कोंकणे के बारे में पूछने पर उसने गेट बंद कर लिया।
आश्रम के ठीक सामने रहने वाली नेहा गाबा बताती हैं, ‘यहां क्या होता है, किसी को नहीं पता। कई बार गाड़ियों में लड़कियों को आते-जाते देखा है। वे मास्क पहने रहती हैं। लोकल होकर भी हमें अंदर नहीं घुसने देते। इतनी लड़कियां रहती हैं, लेकिन उनकी आवाज बाहर नहीं आती। कोई दिखती भी नहीं।’
इसके बाद हम विक्टिम परिवारों तक पहुंचे। परिवार की पहचान उजागर न हो, इसलिए पेरेंट्स के नाम बदले गए हैं।
पहला परिवार: जगदंबा बनाने के नाम पर बेटी मांगी; फिर रेप का आरोप
दिल्ली के रहने वाले रमेश की दो बेटियां आश्रम जा चुकी हैं। वे बताते हैं, ‘मैं वीरेंद्र देव दीक्षित को भगवान मानता था। पत्नी और बेटियों के साथ उनके पास जाता था। एक दिन बेटी बोली- मैं कुछ दिन आश्रम में रहूंगी। हमने सोचा कि भगवान के सानिध्य में रहेगी। 15 दिन बाद वह वापस आ गई। पूछा क्यों आई, तो कुछ नहीं बताया।’
‘कुछ समय बाद सुबह 5 बजे वीरेंद्र देव का फोन आया। बोला- बड़ी बेटी गई, अब छोटी बेटी मुझे समर्पित कर दो। उसे जगदंबा बनाना है। मैंने कहा- बालिग होगी, तो भेज दूंगा। वह बोला- बच्चों पर मां-बाप का हक हमेशा रहता है, भले वे बालिग न हों।’
‘हमने छोटी बेटी को भी भेज दिया। तब से वह वहीं है। बड़ी बेटी कहती थी- इसे आश्रम मत भेजो, वहां माहौल सही नहीं है, लेकिन मैं उसकी बात नहीं समझ सका। फिर एक NGO ने मुझसे संपर्क किया। उनके पास ऐसी लड़कियां थीं, जिन्होंने वीरेंद्र देव पर रेप का आरोप लगाया था। NGO वालों ने मेरी बेटी से बात की। तब उसने बताया कि आश्रम में उसका यौन शोषण हुआ था।’

आश्रम में अब भी लोहे की खिड़कियां लगी हैं। उनके अंदर भी दो लेयर हैं। आसपास के लोगों का दावा है कि खिड़कियां ज्यादातर बंद ही रहती हैं।
पुलिस अधिकारी बोले- कुछ बता नहीं सकते, कोर्ट में रिपोर्ट देंगे
CBI ने वीरेंद्र देव पर गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद उसका पता नहीं चला। CBI ने कोर्ट को बताया कि उसकी मौत हो चुकी है। सितंबर 2025 में CBI ने कोर्ट में कार्रवाई खत्म करने की मांग की। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने विजय विहार पुलिस को आश्रम के कामकाज की दोबारा जांच कर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। थाने के इंस्पेक्टर मनोहर लाल का कहना है कि स्टेटस रिपोर्ट समय से कोर्ट में देंगे। इस पर बात नहीं कर सकते।
अमोल कोंकणे पर लगे आरोपों पर आश्रम का पक्ष जानने के लिए भास्कर टीम आश्रम पहुंची। अमोल कोंकणे से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन नंबर स्विच ऑफ था। उनका पक्ष मिलने पर खबर में शामिल किया जाएगा।






