
निसर्ग ने अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (US DoJ) की वेबसाइट पर सिक्योरिटी से जुड़ी कमियों की पहचान कर इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी। उनके इस अचीवमेंट के लिए उन्हें US DoJ के हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है। जहां सुरक्षा से जुड़ी कमजोरियां बताने वाले रिसर्चर्स को मान्यता दी जाती है।

CBSE OSM पोर्टल मे कमियां बताई
इससे पहले मई 2026 में CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में सुरक्षा संबंधी खामियां बताने के लिए भी वे चर्चित हुए थे। उनकी साइबर सिक्योरिटी स्किल के चलते IIT कानपुर के C3iHub में उन्हें थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के तौर पर काम करने का मौका मिला था।
US DoJ के हॉल ऑफ फेम में मिली जगह
निसर्ग अधिकारी ने ट्विटर पर इस उपलब्धि की जानकारी शेयर की। उन्होंने US DoJ के एकनॉलेजमेंट पेज का स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किया। इस पेज पर उन रिसर्चर्स के नाम शामिल किए जाते हैं, जिन्होंने विभाग को सिक्योरिटी से जुड़ी कमियों की जिम्मेदारी से जानकारी दी है।

निसर्ग ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट की सिक्योरिटी को चेक करते हुए कुछ टेक्निकल कमियों की पहचान की. इसके बाद उन्होंने इन खामियों की जानकारी विभाग को दी ताकि जरूरी सुधार किए जा सकें.
निसर्ग ने एक ब्लॉग पोस्ट लिखकर CBSE पोर्टल की सुरक्षा कमजोरी को उजागर किया था। उसके बाद IIT कानपुर ने उन्हें ओपन सोर्स इंटेलिजेंस और थ्रेट इंटेलिजेंस इंजीनियर के रूप में नियुक्त किया है।
इस काम को करते हुए निसर्ग ने IIT कानपुर में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोर्सेज से काम की जानकारी का एनालिसिस किया। साथ ही वेबसाइट्स व एप्लिकेशन में कमियों का पता भी लगाया।
साइबर सिक्योरिटी को लेकर फोकस्ड हैं निसर्ग
एक्सपर्ट टीम के एक सदस्य ने कहा था कि निसर्ग ने कई अहम कमियों का पता लगाया है। टीम ने मैसेज पर बातचीत के जरिए पाया कि वह साइबर सिक्योरिटी को लेकर बहुत फोकस्ड है। इसके बाद उसे सिस्मट ठीक करने में मदद करने के लिए बुलाया गया था।
बड़े स्टार्टअप्स के साथ काम का अनुभव
12वीं पास करने से पहले ही निसर्ग ने कई स्टार्टअप्स के साथ काम किया है। अलग-अलग ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स में पार्टिसिपेट किया है और फाउंडिंग इंजीनियर के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इसके अलावा निसर्ग को वेंचर कैपिटल द्वारा फंडेड बड़े स्टार्टअप्स के साथ भी काम करने का अनुभव है।
कंप्यूटर में बचपन से दिलचस्पी
निसर्ग की कंप्यूटर में बचपन से ही रुचि थी। करीब 13 साल की उम्र में उन्होंने साइबर सिक्योरिटी को मजे के लिए सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे यह शौक गंभीर रिसर्च और प्रोग्रामिंग में बदल गया।






