
अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करीब 11 करोड़ खर्च कर बनाए गए सेवन वंडर्स तोड़ दिए गए हैं। हालांकि इसका बिजली का बिल अभी भी बकाया है। करीब डेढ़ साल में यह बिल बढ़ता जा रहा है, लेकिन अजमेर विकास प्राधिकरण (एडीए) और ठेकेदार की ओर से इसे चुकाया नहीं जा रहा है।
ADA ने सेवन वंडर्स के संचालन की जिम्मेदारी ठेकेदार को दे रखी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में इसे 11 मार्च 2025 को तोड़ना शुरू किया गया था। हालांकि तब एक मूर्ति (प्रतिकृति) को तोड़ा गया था। इसके बाद 12 सितंबर 2025 से फिर सभी सेवन वंडर्स को हटाना शुरू किया गया।
मार्च 2025 को इसके बिजली का बिल करीब 13 लाख रुपए बकाया था। अब ये बकाया राशि बढ़कर 15 लाख से ज्यादा हो गई है। चौंकाने वाली बात ये है कि करीब 10 महीने से बिजली का कनेक्शन कटवाने की जहमत भी किसी ने नहीं उठाई। इसके बाद इस साल 5 जनवरी को बिजली कनेक्शन काटा गया था।

अफसरों की अनदेखी का आलम ये है कि अब तक ये तय नहीं किया गया कि बकाया राशि का भुगतान ठेकेदार की ओर से किया जाएगा या ADA की ओर से।
बिजली वितरण का जिम्मा संभाल रही टाटा पावर ने करीब डेढ़ महीने पहले जून 2026 को ADA को इसके लिए नोटिस भी दिया है।

जिम्मेदारों ने ये कहा…
इस संबंध में बात करने पर टाटा पावर के पीआरओ लक्ष्मीकांत शर्मा ने बताया- सेवन वंडर्स का बिजली का कनेक्शन ADA ने लिया था। बकाया के लिए ADA को 24 जून को नोटिस दिया है। नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
वहीं ADA के अधिशाषी अभियंता राकेश गहलोत ने कहा- बिजली बिल बकाया है। लेकिन इस संबंध में ठेकेदार के एमओयू को देखकर ही बता सकता हूं कि इसका भुगतान कौन करेगा?

स्मार्ट सिटी में निर्माण, बाद में ठेके पर संचालन
अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 11 करोड़ खर्च कर सेवन वंडर्स का निर्माण किया गया था। बाद में इसे अजमेर विकास प्राधिकरण को सौंपा गया। प्राधिकरण ने इसका संचालन ठेके पर दिया। इसमें एंट्री के लिए ठेकेदार की ओर से फीस वसूली जाती थी।
इस पार्क में दुनिया के सात अजूबों की प्रतिकृतियां स्थापित की गई थीं। इनमें आगरा का ताजमहल, पेरिस का एफिल टावर, मिस्र के पिरामिड, पीसा की झुकी हुई मीनार, रोम का कोलोसियम, न्यूयॉर्क का स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और रियो डी जेनेरियो की क्राइस्ट दी रिडीमर की प्रतिमा शामिल थीं।
11 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सिर्फ स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी हटाई गई थी और छह महीने का समय मांगा गया था। बाद में 12 सितंबर 2025 से इसे पूरा हटाया गया। आनासागर ग्रीन बेल्ट और वेटलैंड में किए गए पक्के निर्माण सेवन वंडर्स की चारदीवारी भी हटाई जानी है।

इन आईएएस अफसर के जिम्मे रहा स्मार्ट प्रोजेक्ट
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और जिला कलेक्टर
- पूर्व- गौरव गोयल, आरती डोगरा, विश्व मोहन शर्मा, प्रकाश राजपुरोहित, अंशदीप, डॉ. भारती दीक्षित
- वर्तमान- लोकबंधु (आईएएस)
अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (ACEO) और नगर निगम आयुक्त
- पूर्व- हिमांशु गुप्ता, चिन्मयी गोपाल, कुशाल यादव, देवेन्द्र कुमार, सुशील कुमार, देशलदान
- वर्तमान कार्यवाहक- के. नित्या (आईएएस)।
अजमेर विकास प्राधिकरण के आयुक्त
- पूर्व- नमित मेहता, निशांत जैन, गौरव अग्रवाल, रेणु जयपाल, अक्षय गोदारा, गिरधर, ललित गोयल (कार्यवाहक), श्रीनिधि बीटी
- वर्तमान- नित्या के (आईएएस)







