
न्यूज टोंक
उर्वरक (खाद) लेने के लिए किसानों की परेशानी कम होने के बजाय अब उसका तरीका बदल गया है।
पहले किसान को घंटों कतार में खड़े रहते थे, अब ऑनलाइन बुकिंग, आधार, बारकोड और एफएफएस एप के फेर में उलझ रहे हैं। किसानों के अनुसार ऑनलाइन बुकिंग के बाद दुकान पर पहुंचने पर भी कई बार खाद नहीं मिल रही। आधार कार्ड और एफएफएस एप में दर्ज जानकारी में मामूली अंतर होने पर प्रक्रिया अटक जाती है। किसान के खुद खाद लेने नहीं पहुंचने की स्थिति में नामित व्यक्ति का नाम, आधार और मोबाइल नंबर दर्ज कराने की प्रक्रिया है। मैसर्स जैन खाद बीज भण्डार नानेर पर किसान गोपी लाल ने 20 कट्टे, रामलाल ने 20, छोटू ने 20 और धर्मराज ने 5 कट्टे यूरिया की ऑनलाइन बुकिंग करवाई। बुकिंग के बाद किसान दुकान तक पहुंचे, लेकिन खाद नहीं मिली। अंत में किसानों को खाली ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर वापस लौटना पड़ा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि एफएफएस एप पर दर्ज स्टॉक, ऑनलाइन बुकिंग और दुकान पर वास्तविक उपलब्धता में अंतर क्यों? लाइसेंस निलंबित दुकानों पर दर्ज खाद की बुकिंग किसानों तक कैसे पहुंचेगी? और टैगिंग व अधिक कीमत की शिकायतों पर कृषि विभाग कब प्रभावी कार्रवाई करेगा?

किसान नेता रामेश्वर चौधरी ने बताया कि जिले में 27 अगस्त से अब तक डीएपी की उपलब्धता एफएफएस एप पर शून्य बताई जा रही है।
दूसरी ओर किसानों का आरोप है कि यूरिया के साथ अन्य सामग्री लेने की टैगिंग और निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि व्यवस्था ऑनलाइन होने के बावजूद यदि खाद लेने के लिए उन्हें बार-बार दुकानों के चक्कर लगाने पड़ें तो तकनीक का फायदा किसे मिल रहा है?
केस 01 – छान केंद्र पर खाद लेने पहुंचे नूरपुरा खेडा निवासी किसान राजाराम का बेटा (रिसीवर) मोहनलाल उर्वरक (डीएपी) लेने पहुंचा तो मशीन खराब होने की जानकारी देकर लौटा दिया है। रतिराम को भी यही कहा गया। इसी प्रकार देवली रोड, टोक इफको ई-बाजार की दुकान पर डीएपी लेकर आए पापड़ा के गिरधारीलाल ने बताया कि एप के जरिए बुकिंग की थी, पहले भी खाद लेने पहुंचे आए थे, लेकिन बारकोड की समस्या के कारण खाद नहीं मिल पाई। बारकोड नहीं आने से उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। केस 02 : नानेर, पीपलू की किसान गीता देवी ने बताया कि मैसर्स जैन खाद बीज भंडार पर एफएफएस एप के माध्यम से 18 बैग यूरिया दर्ज किया। जब खाद लेने दुकान पर पहुंची तो दुकानदार ने लाइसेंस निलंबित होने की बात कही। ऐसे में एप पर खाद दर्ज व उपलब्ध होने के बावजूद किसान को परेशानी का सामना करना पड़ा। किसानों का आरोप है कि दुकान का लाइसेंस निलंबित होने की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं होने से वे बेवजह दुकान तक पहुंच रहे हैं।
धीरे-धीरे किसान इसे समझ जाएंगे उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग में किसानों को कुछ शुरुआती दिक्कतें आ रही हैं, चूंकि नई व्यवस्था है, इसलिए समझ नही पा रहे है, धीरे-धीरे किसान इसे समझ जाएंगे। जिले में डीएपी की उपलब्धता कम है। ऐसे में किसानों से डीएपी के विकल्प एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) का उपयोग करने की अपील की जा रही है। एसएसपी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है। कलेक्टर को स्थिति से अवगत कराकर सरकार से जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। — रामपाल जाट, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग, टोंक।






