
“दिल तो बच्चा है जी…”
गुलजार का लिखा यह गाना सुनते ही एक मासूम, जिद्दी और भावुक दिल की तस्वीर उभरती है। दिल हमारी फिल्मों में है, शायरी में है और रोजमर्रा की भाषा में भी। हम ‘दिल लगाते हैं’, ‘दिल टूटता है’, ‘दिल जीतते हैं’ और कभी-कभी किसी बात को ‘दिल पर भी ले लेते’ हैं।
मशहूर फ्रेंच किताब ‘द लिटिल प्रिंस’ में लिखा है, “साफ-साफ देखने के लिए दिल से देखना पड़ता है।” शायद इसलिए सदियों से इंसान ने दिल को सिर्फ शरीर के एक अंग नहीं, बल्कि जीवन के केंद्र की तरह देखा है। लेकिन एक विडंबना भी है।
“जिस दिल को हम प्यार, भावनाओं और एहसासों का घर मानते हैं, उसकी सेहत के बारे में अक्सर सबसे कम सोचते हैं।”

दिल की एक खासियत ये भी है कि वह शिकायत बहुत कम करता है। जब हम घंटों कुर्सी से चिपके रहते हैं, देर रात तक मोबाइल चलाते हैं या तनाव को जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, तब भी यह बिना रुके अपना काम करता रहता है। यही वजह है कि दिल की बीमारी अक्सर अचानक नहीं होती। यह वर्षों तक हमारी आदतों का हिसाब जोड़ती रहती है।
आज ‘वर्ल्ड हार्ट डे’ है। इस मौके पर ‘फिजिकल हेल्थ’ में दिल की सेहत पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- हमारी कौन-सी आदतें दिल के लिए नुकसानदायक हैं?
- कैसे जानें कि आपका दिल हेल्दी है?
एक्सपर्ट- डॉ. प्रदीप कुमार नायक, डायरेक्टर, हेड- कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- हमारी कौन-सी आदतें हार्ट की सबसे बड़ी दुश्मन हैं?
जवाब- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हार्ट डिजीज के ज्यादातर मामलों के पीछे ऐसे रिस्क फैक्टर होते हैं, जिन पर हमारा कंट्रोल होता है। यानी हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल हार्ट हेल्थ पर बड़ा असर डालती है। कई आदतें धीरे-धीरे हार्ट और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करती हैं। इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ग्राफिक में सभी आदतें देखिए-

सवाल- लंबे समय तक बैठे रहना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- साल 2024 में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ (JACC) में एक स्टडी पब्लिश हुई।
- इसके मुताबिक, रोज 10.6 घंटे से ज्यादा बैठे रहने पर हार्ट फेल्योर का रिस्क बढ़ता है।
- लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर कम कैलोरी बर्न करता है और मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ने लगता है।
- इससे वजन और ब्लड शुगर बढ़ सकता है।
- साथ ही शरीर में फैट जमा होने का रिस्क बढ़ जाता है।
- समय के साथ ये बदलाव हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं।
सवाल- अगर हम रोज एक्सरसाइज करें तो क्या लंबे समय तक बैठने का नुकसान नहीं होता?
जवाब- नहीं, अगर कोई व्यक्ति रोज 30-60 मिनट वर्कआउट करता है, लेकिन बाकी समय ज्यादातर बैठा रहता है, तो उसके हार्ट पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए हार्ट हेल्थ के लिए पूरे दिन एक्टिव रहना जरूरी है।
सवाल- देर रात तक मोबाइल चलाना हार्ट को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
जवाब- मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी बॉडी क्लॉक को प्रभावित करती है। इससे नींद आने में देर हो सकती है। लगातार खराब नींद का असर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, वजन और स्ट्रेस लेवल पर पड़ता है। समय के साथ ये सभी बदलाव हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ाते हैं।

सवाल- नींद पूरी न होने या स्लीप क्वालिटी खराब होने से हार्ट पर लोड कैसे बढ़ता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- जब हम सोते हैं तो हार्ट और ब्लड वेसल्स भी रिलैक्स मोड में चले जाते हैं।
- नींद के दौरान आमतौर पर ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट कम हो जाते हैं।
- अगर नींद पूरी न हो या बार-बार टूटे तो हार्ट को आराम नहीं मिल पाता।
- इससे ब्लड प्रेशर हाई रह सकता है, स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं और ब्लड शुगर भी प्रभावित हो सकती है।
- समय के साथ ये बदलाव दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
सवाल- क्या रोज बाहर का खाना खाने से हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है?
जवाब- हां, बाहर के कई फूड्स में नमक, चीनी और अनहेल्दी फैट की मात्रा ज्यादा होती है। अगर रोजाना ऐसी डाइट लेते हैं तो धीरे-धीरे आर्टरीज और हार्ट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है।
सवाल- क्या पानी कम पीने का भी हार्ट से कोई रिलेशन है?
जवाब- हां, इसे ऐसे समझिए-
- जब शरीर में पानी की कमी होती है तो ब्लड वॉल्यूम कम होने लगता है।
- ऐसी स्थिति में शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए हार्ट को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।
- शरीर कुछ ऐसे हार्मोन रिलीज करता है, जो ब्लड प्रेशर और ब्लड वेसल्स को प्रभावित करते हैं।
- इसलिए लंबे समय तक डीहाइड्रेशन की स्थिति हार्ट हेल्थ के लिए अच्छी नहीं होती
- ‘यूरोपियन हार्ट जर्नल’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पर्याप्त पानी पीने वाले लोगों में भविष्य में हार्ट फेल्योर का रिस्क अपेक्षाकृत कम होता है।
सवाल- क्या गुस्सा, तनाव और चिड़चिड़ापन हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा सकते हैं?
जवाब- हां, इनका असर सीधे ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। 2024 में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, गुस्सा आने के बाद ब्लड वेसल्स के सामान्य रूप से फैलने की क्षमता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। ब्लड वेसल्स का हेल्दी रहना हार्ट तक पर्याप्त ब्लड पहुंचाने के लिए जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार तनाव, गुस्से या चिड़चिड़ेपन में रहता है, तो समय के साथ हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ जाता है।
सवाल- शराब का हार्ट पर क्या असर पड़ता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- ज्यादा शराब पीने से हार्ट बीट इररेगुलर हो सकती है।
- कई बार यह स्थिति ‘एट्रियल फाइब्रिलेशन’ (AFib) का रूप ले सकती है। इसमें हार्ट का अपर चैंबर सामान्य तरीके से नहीं धड़कता। इससे स्ट्रोक का रिस्क भी बढ़ता है।
- लंबे समय तक शराब पीने से हार्ट मसल्स कमजोर पड़ सकती हैं। इसे ‘ऐल्कोहलिक कार्डियोमायोपैथी’ कहते हैं। ऐसी स्थिति में हार्ट शरीर की जरूरत के मुताबिक ब्लड पंप नहीं कर पाता।

सवाल- हार्ट एज क्या होती है? क्या आपके दिल की उम्र आपसे ज्यादा हो सकती है?
जवाब- हां, आपके दिल की उम्र आपकी असली उम्र से ज्यादा हो सकती है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- ‘सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ (CDC) के मुताबिक, हार्ट और ब्लड वेसल्स की हेल्थ के आधार पर आंकी गई उम्र को हार्ट एज कहते हैं।
- अगर किसी व्यक्ति की उम्र 35 साल है, लेकिन उसके रिस्क फैक्टर 50 साल के व्यक्ति जैसे हैं, तो उसकी हार्ट एज 50 साल मानी जा सकती है।
- हार्ट एज जितनी ज्यादा होगी, भविष्य में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का रिस्क उतना अधिक माना जाता है।
अब समझते हैं हार्ट एज कैसे निकाली जाती है। डॉक्टर या कैलकुलेटर इन 8 बातों को देखते हैं-
- उम्र
- ब्लड प्रेशर
- कोलेस्ट्रॉल लेवल
- डायबिटीज है या नहीं
- धूम्रपान करते हैं या नहीं
- वजन और कमर का आकार
- फिजिकल एक्टिविटी
- अन्य हार्ट रिस्क फैक्टर्स
फिर इनकी तुलना आपकी उम्र के एक हेल्दी व्यक्ति से की जाती है।
अगर रिस्क फैक्टर्स ज्यादा हैं तो हार्ट एज भी असली उम्र से ज्यादा होगी।
सवाल- किन संकेतों से पता चलता है कि आपकी ‘हार्ट एज’ आपकी असली उम्र से ज्यादा है?
जवाब- हार्ट एज आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं बढ़ती। यह कई रिस्क फैक्टर्स के लंबे समय तक साथ रहने का नतीजा होती है। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए-

सवाल- अगर कोई व्यक्ति अपनी हार्ट हेल्थ को बेहतर करने के लिए अगले 10 साल में सिर्फ 3 आदतें सुधारे, तो वो तीन आदतें कौन सी होनी चाहिए?
जवाब- हार्ट हेल्थ में छोटे, लेकिन टिकाऊ बदलाव ज्यादा असर डालते हैं। इसमें ये तीन आदतें सबसे जरूरी हैं-
- धूम्रपान छोड़ना।
- रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करना।
- जंक फूड और शुगर से दूर रहना।
अब आपके लिए एक क्विज। ये क्विज बताएगी कि आप अपनी सेहत का कितना ख्याल रखते हैं। जितने सवालों का आपका जवाब हां में है, आपकी लाइफस्टाइल उतनी ही हार्ट फ्रेंडली है।

दिल की बीमारी की शुरुआत अक्सर सीने के दर्द से नहीं, बल्कि इस गलतफहमी से होती है कि “मुझे कुछ नहीं होगा।” सच यह है कि दिल की सेहत का फैसला अस्पताल में नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतों में होता है।






