
निवाई में सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ गुन्सी में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ के सानिध्य में तीन दीक्षार्थियों को जैनेश्वरी दीक्षा दी गई। इस दीक्षा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञातीर्थ के कार्याध्यक्ष सुनील भाणजा ने बताया- समारोह का शुभारंभ भगवान शांतिनाथ के अभिषेक और शांतिधारा से हुआ। इसके बाद गणधर वलय विधान हुआ, जिसमें सौधर्म इंद्र दिनेश कुमार और प्रियांशु माधोराजपुरा ने मंडप पर अर्घ्य चढ़ाए। समारोह में ध्वजारोहण संदीप कुमार हरिद्वार ने किया, जबकि मंगलाचरण विज्ञाश्री महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत किया गया।

दीक्षार्थियों को जयकारों के साथ कार्यक्रम स्थल लाए दीक्षार्थियों को णमोकार महिला जयघोष के साथ कार्यक्रम स्थल पर लाया गया। महावीरप्रसाद और शिखरचंद माधोराजपुरा ने कार्यक्रम का चित्रावरण किया, जबकि सुरेंद्र कुमार और श्रेयांस कुमार जैन माधोराजपुरा ने दीप प्रज्ज्वलन किया।
आर्यिका विज्ञाश्री माताजी को ब्रजेंद्र कुमार जैन जयपुर ने पिच्छिका भेंट की। दीक्षार्थी रुचि दीदी को ललिता देवी छाबड़ा सवाई माधोपुर, मनु दीदी को सौम्य प्रभा जैन और तरुण कुमार जैन टूंडला तथा सुशीला जैन को सुरेंद्र कुमार जैन और श्रेयांस कुमार जैन माधोराजपुरा ने पिच्छिका प्रदान की।
भजनों पर झूमे लोग तीनों दीक्षार्थियों ने आर्यिका माताजी से दीक्षा की अनुमति मांगी। दीक्षा महोत्सव के संस्कार कार्यक्रम में अखंड सौभाग्यवती महिलाओं ने चौक पूरण किया। संगीतकार सुभाष एंड पार्टी महुआ ने इस अवसर पर भजनों की प्रस्तुतियां दीं। महोत्सव के दौरान आर्यिका विज्ञाश्री माताजी को अगले चातुर्मास जयपुर में करने के लिए श्रीफल भेंट किया गया।
हरिद्वार समाज के श्रद्धालुओं ने विज्ञाश्री माताजी को ‘संकल्प साधिका’ उपाधि से विभूषित किया। राजेंद्र कुमार जैन टोडारायसिंह ने रुचि दीदी को प्रथम शास्त्र भेंट किया, जबकि गुरु भक्तों ने मनु दीदी को और दिनेश कुमार जैन माधोराजपुरा ने सुशीला दीदी को जिनवाणी भेंट की।
रिद्धि सिद्धि ज्वेलर्स जयपुर को आर्यिका विज्ञाश्री माताजी का पाद प्रक्षालन, जिनवाणी, पिच्छिका और वस्त्र भेंट करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद विज्ञाश्री माताजी ने दीक्षार्थियों के संस्कार कर उनका नामकरण किया। रुचि दीदी को छुल्लिका ज्ञावीश्री माताजी, मनु दीदी को छुल्लिका ज्ञायिकाश्री माताजी और सुशीला दीदी को ज्ञापिकाश्री माताजी नाम दिया गया।






