
निवाई उपखंड क्षेत्र के अद्वैत आश्रम हरभांवता से जुड़े संत स्वरूपानन्द महाराज (75) का शुक्रवार देर शाम निधन हो गया। वे लंबे समय से सेदरिया खुर्द और मित्रपुरा आश्रम में रहकर तपस्या कर रहे थे। मित्रपुरा आश्रम में उनके निधन की खबर मिलते ही आश्रम से जुड़े श्रद्धालुओं और संत समाज में दुख फैल गया।
समाधि पर स्नान के बाद निकली अंतिम यात्रा
संत स्वरूपानन्द महाराज के शव को हरभांवता आश्रम लाया गया। यहां हीरानंद गिरी महाराज की समाधि पर पंचामृत से स्नान कराने के बाद अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। इसके बाद उनके शव को अंतिम समाधि के लिए निवाई उपखंड क्षेत्र के सेदरिया खुर्द आश्रम ले जाया गया।
सेदरिया खुर्द आश्रम में समाधि देने से पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु अंतिम यात्रा में शामिल हुए। बैंड-बाजे के साथ निकली यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा की। रामधुनी गाते हुए श्रद्धालुओं ने संत स्वरूपानन्द महाराज को अंतिम विदाई दी। आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी रही।
सैकड़ों संत पहुंचे
हरभांवता आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर बालकानंद गिरी महाराज की मौजूदगी में सैकड़ों संत सेदरिया खुर्द आश्रम पहुंचे। संत समाज और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संत स्वरूपानन्द महाराज को समाधि दी गई। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
40 साल पहले अपनाया था संत जीवन
आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, संत स्वरूपानन्द महाराज करीब 40 साल पहले संत जीवन में आ गए थे। उन्होंने संत स्वामी सेवानन्द गिरी महाराज से दीक्षा ली थी। इसके बाद वे अलग-अलग आश्रमों में रहकर साधना और तपस्या में लगे रहे। उनका पैतृक गांव सवाईमाधोपुर जिले का कुटका गांव बताया गया है और उनका सांसारिक नाम रामस्वरूप था।






