निवाई, 10 मिनिट पहले

निवाई के देवधाम जोधपुरिया में मंगलवार को तीन दिवसीय लक्की मेले का ध्वज पूजन के साथ शुभारंभ हुआ। भगवान देवनारायण की आस्था का यह प्रमुख केंद्र है। हरभावंता आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर बालकानंद गिरी महाराज के सानिध्य में दर्जनों संतों की मौजूदगी में मंदिर परिसर में ध्वज स्थापित किया गया। इसके साथ ही मेले की विधिवत शुरुआत हुई। यह मेला 15 से 17 सितंबर तक चलेगा।

कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
इस मेले में राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रशासन ने मेले की तैयारियां करीब 15 दिन पहले ही शुरू कर दी थीं। मंगलवार को ध्वज पूजन के बाद प्रतिभा सम्मान समारोह भी शुरू हुआ। इसमें विभिन्न श्रेणियों की 551 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह कार्यक्रम देर रात तक चलेगा।
150 से ज्यादा कर्मचारियों की लगाई ड्यूटी
श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन ने भी तैयारियां की हैं। उपखंड अधिकारी गंभीर सिंह ने बिजली, पानी और चिकित्सा सहित कई विभागों के 150 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। ये कर्मचारी 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में काम करेंगे। कर्मचारियों की टीमें मेले के दौरान व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखेंगी।
मेले के दौरान 16 सितंबर की रात सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसी रात भामाशाह सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा। 17 सितंबर को भगवान देवनारायण को खीर-पुए का भोग लगाया जाएगा। इसके बाद मुख्य मेला आयोजित होगा।
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गुर्जर ने बताया कि मेले के लिए मंदिर परिसर को खास सजावट से सजाया गया है। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए करीब एक लाख लोगों के बैठने की क्षमता वाला डोम बनाया गया है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हर स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
2 हजार से अधिक ध्वजों के साथ पहुंचेंगे श्रद्धालु
मेले में शामिल होने के लिए अलग-अलग स्थानों से भगवान देवनारायण के 2 हजार से अधिक ध्वज लेकर श्रद्धालु निवाई पहुंचेंगे। इसके साथ ही बड़ी संख्या में पैदल यात्री भी देर रात तक निवाई पहुंचेंगे। यहां ध्वज पूजन के बाद बुधवार सुबह श्रद्धालु पैदल यात्रा के रूप में देवधाम जोधपुरिया के लिए रवाना होंगे। देवधाम जोधपुरिया में हर वर्ष आयोजित होने वाले तीन दिवसीय मेले में राजस्थान सहित दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से करीब 5 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले को लेकर मंदिर प्रशासन की ओर से करीब 15 दिन पहले से तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।
क्यों आयोजित होता है जोधपुरिया मेला ?
मंदिर के भोपा घासीराम गुर्जर ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को भगवान देवनारायण के नीलाघर घोड़े का जन्म हुआ था। इसी की स्मृति में देवधाम जोधपुरिया में हर वर्ष तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। मेले में दूर-दराज से श्रद्धालु भगवान देवनारायण के दर्शन और ध्वज लेकर पहुंचते हैं।




