
यह तस्वीर 20 दिन पहले सड़क पर आए प्रदर्शनकारियों की है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं।

पाक पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के खिलाफ नारे गूंज रहे हैं। जॉइंट अवामी लीग (JAL) के नेताओं ने ऐलान किया है कि पाक सरकार को पुंछ और मेंढर का रास्ता खोलना होगा। ये रास्ता भारत की ओर जाता है।
पांच जून से PoK में जारी आंदोलन के 115वें दिन सोमवार को मंधोल के इलाके में खासी गहमागहमी रही। PoK के मुजफ्फराबाद से लोग एलओसी के पास जमा होने लगे। एलओसी पर लोगों का हुजूम रोज बढ़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने बरसों तक उनके हकों को दबाया है, लेकिन अब इंतेहा हो चुकी है। फैसला होकर रहेगा। वहीं, पाकिस्तानी सरकार ने प्रदर्शनों के कारण PoK की सप्लाई लाइन काट दी है। लोगों के पास आटा और खाने का सामान नहीं है।
ISI की ‘डाला ब्रिगेड’ की जीपें अब PoK में फेल हो रही हैं
PoK में अब क्या हालात?
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की डाला ब्रिगेड यानी वो जीपें जिनमें लोगों को गिरफ्तार कर डाला जाता था, वो अब फेल हो रही हैं। हालात ये हो गए हैं कि आईएसआई के एजेंट इन्हें लेकर जाने से घबराने लगे हैं। PoK के प्रदर्शनकारी इन पर पथराव करते हैं।
आर्मी चीफ मुनीर क्या करेंगे?
पाकिस्तान के लिए PoK को कब्जे में रखना बेहद जरूरी है। आर्मी चीफ मुनीर इसके लिए गुपचुप PoK में अपने फौजियों को भेज रहे हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत पाक आर्मी अपने सैनिकों को PoK में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ नहीं उतार सकती है।
क्या PoK खुल पाएगा?
पाक आर्मी जेएएल के आंदोलन को कुचलने में विफल रही है। PoK के हालात ऐसे है कि वहां के लोग अब पाक हुकूमत के जुल्मों को और ज्यादा नहीं सहने वाले हैं। PoK का खुल पाना काफी हद तक लोगों के आंदोलन की तीव्रता पर निर्भर करेगा। 1948 के कबाइली हमले के दौरान बने PoK के दौर को बदला भी जा सकता है।
PoK सरकार क्या करेगी?
PoK में 27 जुलाई को स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद चुनाव कराए गए। पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएलएन आर्मी के साथ सांठगांठ कर सरकार बनाने में कामयाब रही। लेकिन हालात ये है कि यहां की कैबिनेट के लोग आंदोलनकारियों के सामने जाने से कतरा रहे हैं।
विरोध के बाद भी चुनाव, नवाज शरीफ की पार्टी जीती






