
गांव की नाबालिग लड़की समझ नहीं पाती। दोस्ती करके हमारे लड़के उसे फंसा लेते हैं, मौज-मस्ती करते हैं। इसी चक्कर में प्रेग्नेंट हो जाती है। लड़का तो डर बताकर भाग जाता है, लेकिन लड़की की आफत बढ़ जाती है। हम लोग आगे बढ़कर केस ले लेते हैं, दो तीन महीने बाद अबॉर्शन में मौत का डर दिखा दिया जाता है। इससे पूरा परिवार डर जाता है।

यही खौफ दिखाकर हम डिलीवरी का रास्ता तैयार करते हैं। फिर कुंवारी लड़कियों के गर्भ में पल रहा बच्चा हमारे लिए लॉटरी हो जाता है। मुंह मांगा दाम मांगते हैं, क्योंकि ऐसे बच्चों के लिए क्लेम करने ना मां आती है, ना पिता..।
नवजात बच्चों को बेचने का नया ट्रेंड बताती एजेंट ललिता भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हुई है। वह सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों से जुड़े एजेंट्स का बड़ा सिंडिकेट चलाती है। आशा वर्कर बनकर 90 दिनों तक एजेंट्स के संपर्क में रहने के बाद भास्कर की महिला रिपोर्टर काे ललिता का इनपुट मिला था।
गर्भवती लड़की की डील और गोद भराई से लेकर रिपोर्टर की गोद में बच्चा आने तक, ये पूरी इन्वेस्टिगेशन 6 महीने चली। नवजात की खरीद-बिक्री की पूरी मोडस ऑपरेंडी समझने और गैंग को एक्सपोज करने के लिए इस बार रिपोर्टर पति-पत्नी बनकर एजेंट्स के बीच बेटा खरीदने पहुंचे..।
ऑपरेशन कुंवारी कोख के पार्ट- 2 में पढ़िए और देखिए नाबालिग के गर्भवती होने से लेकर गोद भराई और बच्चे की डिलीवरी तक की पूरी कहानी..।

बेतिया की रहने वाली एजेंट ललिता पहले आशा वर्कर थी, अब अपना हॉस्पिटल चलाती है। उस तक पहुंचने के लिए रिपोर्टर को पति-पत्नी बनना पड़ा। ललिता फोन पर कई दिनों तक बातचीत करने के बाद रिपोर्टर ऐसे पति-पत्नी बनकर पहुंचे, जिन्हें बच्चा नहीं था। ललिता के घर बच्चा खरीदने और बेचने वालों की भीड़ लगी थी।
ललिता को प्रभावित करने के लिए रिपोर्टर मिठाई का डिब्बा और फल की टोकरी लेकर पहुंचे थे। ललिता को लगा मोटी पार्टी है, इसलिए वह बड़ी डील को तैयार हो गई।
रिपोर्टर – अभी कुछ व्यवस्था हुई है या नहीं?
ललिता- हो जाएगा, लेकिन आप लोगों को थोड़ा समय देना होगा। दो दिन पहले एक आया था, लेकिन बुक हो गया। आप थोड़ा इंतजार कीजिए, आप लोगों को कुंवारी का बेटा दूंगी। कोई लफड़ा नहीं होगा, मां-बाप कोई सामने नहीं आएंगे। कल एक डिलीवरी कराई, लेकिन बच्चा डेथ कर गया। मेरे टच में जितने लोग हैं, सभी को एक्टिव कर दिया है। बच्चा मिलने से पहले एक बार पूजा करा दी जाएगी।
इस दौरान साड़ी और फल भी दे दिया जाएगा। आप लड़की को भी देख लीजिएगा। इससे बच्चे से अपनापन बढ़ जाएगा।
रिपोर्टर- पहले किसी की पूजा हुई है या नहीं?
ललिता- कई की करवा दी है, बेटा था। कुंवारी लड़की गर्भवती मिलती है तो उसको अपने पास रख लिया जाता है। गोद भराई हो जाती है, डिलीवरी के बाद वह बच्चा छोड़कर चली जाती है। आप लोगों को बिना किसी क्लेम वाला बच्चा देंगे।
रिपोर्टर- कुंवारी लड़की वाला ही दीजिए, क्योंकि आप बता रहीं हैं सेफ होगा?
ललिता- आप लोग थोड़ा लेट कर गए। एक कुंवारी लड़की का ही बच्चा कुछ दिनों पहले यूपी का एक डॉक्टर ले गया है। मिलना शुरू होता है तो लगातार मिलता है। कुंवारी लड़की का एक बच्चा तो आज भी डेथ कर गया है। ऑपरेशन करना नहीं होता है, इसलिए बच्चों पर दिक्क्त आ जाती है।
रिपोर्टर- ऐसा क्यों हो जाता है?
ललिता- बड़ा ऑपरेशन होगा तो लड़की की शादी में दिक्कत होगी। हम लोग चाहते हैं, गर्भवती हुई तो बच्चे को मारने से अच्छा डिलीवरी कराकर किसी को दे दिया जाए। इसलिए केस आते ही पूरा प्लान कर लेते हैं। केस आएगा आपको बुलाकर पूजा करा देंगे, फिर आपके सामने पेट में बच्चा बड़ा होगा।

नवजात की खरीद-बिक्री की गैंग को एक्सपोज करने के लिए रिपोर्टर निसंतान दंपती बनकर एजेंट्स के बीच बेटा खरीदने पहुंचे।
16 साल की गर्भवती को दिखाया, 3 माह में बेटा हो जाएगा
बातचीत के दौरान ललिता ने एक एजेंट को कॉल किया और एक 16 साल की कुंवारी गर्भवती लड़की को बुलवाया। लड़की को दूर से दिखाकर बोली- इसमें थोड़ा समय लगेगा। जांच कराया है, गर्भ में बेटा है। पहले से कई लोग थे, इसलिए उनसे भी बातचीत हो रही थी। देखते हैं, बहुत जल्दी ऐसी ही लड़की का बच्चा देंगे।
ललिता बोली- आप लोग कुछ दिन बाद बात करके आइएगा, एक कुंवारी लड़की के प्रेग्नेंट होने का पता चला है, वह अगर तैयार हो गई तो सामने से मिल लीजिएगा। मामला सब वहीं सेट कर दिया जाएगा। अगर वह सामने आने को तैयार नहीं हुई तो मैं सेट कर आप लोगों को मिलने का रास्ता बता दूंगी। अब ये आपकी टेंशन नहीं है, मेरी है। बहुत जल्दी आपका काम हो जाएगा।
एजेंट ने बताया, हम लोग एक-दूसरे के कॉन्टैक्ट से भी डील करा देते हैं। कुंवारी लड़की के लिए गर्भ तो बोझ ही होता है। ऐसी डील कई बार हुई जिसमें लड़की सामने नहीं आना चाहती थी, लेकिन बच्चा देने को तैयार हो गई। एक बार यहीं संत घाट में एक लड़की थी, उसका भी बच्चा होना था। मामला इसी तरह का था। बच्चा लेने वाले ने कहा, मां को दिखा दो। मैं धीरे से ले गई, इशारा किया। बच्चे की मां को बच्चा लेने वालों ने देख लिया, फिर डील फाइनल हो गई।
3 अनमैरिड नाबालिग लड़कियों से मिलवाया
इन्वेस्टिगेशन के दौरान 5 बार की मुलाकात में ललिता के नेटवर्क का अंदाजा लग गया था। इसलिए हम ललिता के संपर्क में रहते हुए उसके पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गए। हम उन लड़कियों तक पहुंचना चाहते थे, जो पहले बिन ब्याही मां बनती हैं फिर उनके बच्चों की खरीद-बिक्री होती है। महिला रिपोर्टर ने बेटे के लिए परेशान होने का नाटक किया। रोई-गिड़गिड़ाई जिससे ललिता को पूरी तरह से भरोसा हो गया। उसने रिपोर्टर के सामने ही कई एजेंट्स को कॉल किया और ऐसी लड़कियों की तलाश करने को कहा।
ललिता बेतिया में आशा और अन्य महिला हेल्थ वर्कर से फोन पर बातचीत करने लगी। एक घंटे के अंदर 3 लड़कियों से मिलवाया। देखने में लड़कियां काफी मासूम और बहुत कम उम्र की लग रही थीं, लेकिन वो गर्भवती थीं। देखने से ऐसा लग रहा था कि बहुत जल्द इनकी डिलीवरी होने वाली है।

इन्वेस्टिगेशन के दौरान एजेंट से डील करती महिला रिपोर्टर।
गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच, फिर गोद भराई
पति-पत्नी बनकर कई बार हुई मुलाकात से ललिता को पूरी तरह से भरोसा हो गया था। वह हर मुलाकात में कोई न कोई बड़ा राज खोल रही थी। ललिता से डील के बाद रिपोर्टर शांत हो गए थे, उधर ललिता बड़ी पार्टी समझकर बच्चे का इंतजाम करने में जुट गई थी। एक दिन रात 11 बजे ललिता ने कॉल किया और बोली, एक कुंवारी लड़की मिली है, जांच कराया है, पेट में बेटा है।
आप लोग बेतिया आ जाइए, डील फाइनल हो जाएगी। ललिता की तरफ से हरी झंडी मिलते ही रिपोर्टर बेतिया पहुंच गए। ललिता ने रात 8 बजे मिलने का समय दिया। अंधेरे में वह हमें बेतिया से लगभग 50 km दूर मोतिहारी की तरफ गांव में ले गई।
घर के आसपास पूरी तरह से सन्नाटा था। ललिता ने दिन में ही बोल दिया था कि शगुन की टोकरी (फल, मिठाई, ड्राई फ्रूट,पैस) लेकर आइएगा। शर्त यही थी कि लड़की से बात नहीं करनी है। हाथ में शगुन की टोकरी देनी है। इसके बाद उसके पेट में पल रहा बेटा आपका हो जाएगा।
ललिता की शर्त के मुताबिक, महिला रिपोर्टर ने शगुन की टोकरी और 51 सौ रुपए बच्ची के हाथ में रख दिए। इसके बाद ललिता ने बताया कि लड़की 16 साल की है, वह दोस्त से प्रेग्नेंट हो गई। अब घर वालों ने आशा के घर में छोड़ दिया है। डिलीवरी के बाद वह बच्चा वहीं छोड़कर वापस घर चली जाएगी। अगले दिन ललिता ने दो और नाबालिग गर्भवती लड़कियों से मिलवाया और उनकी डिलीवरी की अलग-अलग तारीख बताई।
शगुन पूरा होने के बाद ललिता लगातार रिपोर्टर से फोन पर बातचीत करती रही। वह विश्वास दिलाती रही कि जांच में बेटा निकला है, इसलिए बेटा ही दिया जाएगा। वह बीच में कोई नया केस आया तो बताने की बात बोलती रही। बच्चे तक पहुंचने के लिए हमने ललिता से संपर्क बनाए रखा और उसकी हर बातचीत, हर दावे और हर कड़ी को जोड़ते हुए इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश की।

अनमैरिड प्रेग्नेंट लड़की से एजेंट ने मिलवाया। एजेंट के कहने पर रिपोर्टर ने उसे शगुन के तौर पर मिठाइयां-फल दिए।
एजेंट बोली – एक अनमैरिड की बेटी हुई
ललिता के नेटवर्क का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता कि बच्चे की डील पूरी होने के बाद भी जब किसी कुंवारी लड़की को बेटी हुई तो वह कॉल कर बताती रही। ललिता ने कहा बेटी-बेटा दोनों ले लीजिए। एक ही बार में सारा सपना पूरा हो जाएगा। बेटी के लिए दो लाख और बेटे के लिए साढ़े 4 लाख रुपए देने होंगे। दोनों लीजिएगा तो कुछ कम लगा दिया जाएगा।
रिपोर्टर को उस लड़की का बेटा देखना था जिसकी पूजा कराई थी, इसलिए बेटी लेने से मना कर दिया। ललिता बोली- बेटी सुंदर होगी क्योंकि उसकी मां भी खूबसूरत है। ललिता के लाख मनाने के बाद भी हम उसी लड़की के बच्चे के लिए जिद करते रहे, एजेंट ने जिसकी गोद भराई कराई थी। मामले की पूरी तह तक पहुंचने के लिए हमने ललिता को यह कहकर मना किया कि हमें तो बेटा ही चाहिए।
ललिता बोली- अब तो डॉक्टर भी हमसे लेते हैं बच्चा
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में खुलासा हुआ है कि बिहार में अनमैरिड लड़कियों के बच्चों को भारत ही नहीं नेपाल में भी बेचा जाता है। एजेंट ललिता ने दावा किया कि नेपाल के नवल परासी, बीरगंज, कैलाली, त्रिवेणी, परसा, चितवन और बारा तक बच्चों को दिया है। ललिता ने दावा किया है कि नेपाल में बच्चों की काफी डिमांड है।
ललिता और उसके नेटवर्क के एजेंट्स से बातचीत में यह साफ हो गया कि नेपाल में बच्चों की बिक्री डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मी और आशा वर्कर के माध्यम से होती है। एजेंट ललिता और एजेंट पायल ने खुलासा किया कि यूपी, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, झारखंड से लेकर दिल्ली तक बच्चों को दिया जाता है।
ललिता ने दावा किया कि सबसे अधिक बच्चे यूपी में जाते हैं। बिहार से यूपी सटा है। इसलिए यूपी के कई डॉक्टर्स मेरे संपर्क में हैं। बिहार की तरह यूपी में भी बड़ा नेटवर्क है, यहां के हेल्थ वर्कर कॉन्टैक्ट में रहते हैं। बातचीत होती रहती है, जब कोई बच्चा ऐसा आता है, जिसकी मां की शादी नहीं हुई होती है, उन्हें कोशिश कर अलग ही राज्य में बेचा जाता है, ताकि बाद में कोई दिक्कत नहीं हो सके।

ललिता ने 5 दिन बाद राजू से बात कराई। राजू का परिचय डॉक्टर बताकर कराया गया। राजू से संपर्क होने के बाद कई दिनों तक महिला रिपोर्टर की राजू से बात होती रही। एक दिन राजू ने कॉल किया और बोला आपका काम हो गया है, आप आज ही आ जाइए। हम इसे होल्ड नहीं कर सकते।
घर वाले आज ही हटाना चाहते हैं। 4.5 लाख लेकर आइए, बेटा ले जाइए। आपने जिसकी पूजा की हैं, उसमें अभी टाइम है। राजू बोला पैसे दे दीजिए, बच्चे को किसी हॉस्पिटल में रखवा देंगे। जब रिपोर्टर ने कहा कि इसका मुझे कोई आइडिया नहीं है तो राजू बोला – आप टेंशन नहीं लीजिए, मैं मुजफ्फरपुर में बात कर अस्पताल में भर्ती करा दूंगा।
यहां एक फोन पर काम हो जाएगा। भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम को उस कुंवारी लड़की तक पहुंचना था, जिसकी ललिता ने गोद भराई कराई थी। इसलिए राजू से बाहर होने की बात कहकर हम मामले को टाल गए।
4 महीने बाद डिलीवरी, गोद में दिया बेटा
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम जिस लड़की की गोद भराई की थी, उसकी डिलीवरी का इंतजार करती रही। इस दौरान ललिता और राजू से बातचीत होती रही। वह हर दो चार नई-नई लड़कियों और उनके बच्चों के बारे में बताते रहे। बातचीत का सिलसिला चलता रहा। 4 महीने बीत गए।
इस बीच ललिता ने कई बार नई महिलाओ और नए बच्चों के फोटो-वीडियो भेजे, लेकिन अपनापन की बात कहकर रिपोर्टर पूजा की हुई लड़की का बच्चा लेने की बात बोलती रही। 4 महीने बाद एक दिन ललिता ने कॉल किया और सूचना दी कि जिस बच्ची की गोद भराई हुई थी, उसकी डिलीवरी हो गई है। बच्चा बगहा के धानी में एक हॉस्पिटल में है। वहां से डिलीवरी हो जाएगी।
बेटा बहुत सुंदर-स्वस्थ हुआ है। कोई दिक्कत नहीं है। ललिता ने कहा बच्चे को हॉस्पिटल के NICU में भर्ती कराकर फोन कर रही हूं। ललिता का फोन कटते ही रिपोर्टर पटना से लगभग 300 km दूर बगहा के मधुबनी के उस हॉस्पिटल पहुंच गई, जहां का लोकेशन दिया गया था। काफी रात हो चुकी थी, लोकेशन ढूंढने में भी काफी समय लगा।
ललिता कॉल पर गाइड करती गई और हम हॉस्पिटल तक पहुंच गए। यहां ललिता के एजेंट बच्चे की देखरेख में लगे थे। ऐसा लग रहा था कि डॉक्टर को भी सबकुछ पता है। महिला रिपोर्टर ने वहां पहुंचकर ललिता को कॉल किया, इसके बाद एजेंट रिपोर्टर को उस बेड के पास ले गया जहां बच्चा रखा हुआ था। और उसकी गोद में बच्चे को दे दिया। दूसरी तरफ ललिता फोन पर थी, वह एजेंट को गाइड कर रही थी।
ललिता ने एजेंट को बोल रखा था कि हॉस्पिटल में 4.5 लाख रुपए जमा कराने के बाद भी बच्चे को देना है। एजेंट पैसे की डिमांड करने लगी। रिपोर्टर बोली स्कैनर दीजिए, पैसे भेज देते हैं। रिपोर्टर को यह बात पहले से पता थी कि पूरा धंधा कैश पर चलता है। इसलिए ऑनलाइन पेमेंट की बात की। मामला ललिता तक पहुंचा तो उसने ऑनलाइन पैसे लेने से मना कर दिया और बोली की कैश लेकर आइए, बच्चा ले जाइए।
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन पूरी हो गई थी। इन्वेस्टिगेशन टीम एजेंट से कुंवारी लड़की के बच्चे की डील की और फिर गोद भराई की रस्म की और फिर इंतजार कर कुंवारी लड़की के गर्भ से आए बेटे को गोद तक ले लिया।

डिलीवरी के बाद एजेंट ने नवजात को रिपोर्टर की गोद में दे दिया।
बेतिया तक किया रिपोर्टर का पीछा
रिपोर्टर को अंदाजा नहीं था कि जिस हॉस्पिटल में बच्चा रखा गया था, वहां ललिता के कई एजेंट मौजूद हैं। रिपोर्टर ने जब एटीएम से पैसे निकालकर देने की बात कही तो कुछ एजेंट रिपोर्टर के साथ हो गए। रिपोर्टर एटीएम से पैसे निकालने के बहाने जब लौरिया की तरफ निकली तो पीछे से कुछ बदमाश लग गए। रिपोर्टर को इसका अंदाजा हो गया था कि कोई पीछा कर रहा है।
रिपोर्टर तेजी से भागी लेकिन उसका पीछा 25km दूर बेतिया तक किया गया। वह काफी एग्रेसिव दिख रहे थे और रिपोर्टर को पकड़ पाते तो कोई घटना भी कर सकते थे। रिपोर्टर जान बचाकर किसी तरह से बेतिया से पटना पहुंची।
6 माह की इन्वेस्टिगेशन में नवजात की बिक्री का इंटरनेशनल कनेक्शन
भास्कर की 6 महीने की इस इन्वेस्टिगेशन से साफ हो गया कि देश में बच्चों को बेचने का यह नया पैटर्न है जो बिहार में तेजी से बढ़ रहा है। हमारी इन्वेस्टिगेशन में यह साफ हो गया कि बच्चे बिहार से नेपाल और यूपी, बंगाल, राजस्थान और झारखंड तक जा रहे हैं। इस पूरे नेक्सस में सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल और स्टाफ के साथ एजेंट्स का एक बड़ा नेटवर्क काम करता है। लड़कियों को टारगेट करता है, इसके बाद उनके बच्चों को बेचता है।

नवजात लड़के के लिए एजेंट ने साढ़े 4 लाख की डिमांड की। रिपोर्टर ने जानबूझकर ऑनलाइन पेमेंट की बात कही। एजेंट ने इससे इनकार किया और कैश मांगा।
क्यों होती है कुंवारी कोख के बच्चों की मांग
भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि एजेंट्स ने नवजात की खरीद-बिक्री का पूरा ट्रेंड बदल दिया है। अस्पतालों से बच्चों की चोरी होने के बढ़ते मामलों को लेकर सरकार काफी सख्त हो गई। अस्पतालों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ ऐसे मामले में कार्रवाई को लेकर भी सरकार ने नियम सख्त कर दिए हैं।
बच्चों की चोरी केस में सबसे बड़ी समस्या मां-बाप को लेकर थी, कई मामलों में बवाल हुआ। नवजात के मां-बाप सामने आ गए और एजेंट्स से लेकर पूरे नेटवर्क पर खतरा बढ़ गया। ऐसे में नवजात की खरीद-बिक्री का पूरा ट्रेंड बदल दिया गया। अब टारगेट ऐसी लड़कियों को किया जा रहा है, जिनकी शादी नहीं हुई है।
गांव के लव अफेयर के मामले एजेंट्स के लिए कमाई का साधन बन गए। गांवों में जागरूकता की कमी और अफेयर के बढ़ते मामलों को लेकर अब प्रेग्नेंसी के केस भी बढ़ गए हैं। कुंवारी लड़कियों की प्रेग्नेंसी को पहले छिपाकर गर्भपात कराया जाता था, लेकिन अब एजेंट्स ने इसी को अपनी काली कमाई का रास्ता बना लिया है।
इन्वेस्टिगेशन के दौरान एजेंट्स ने बताया कि कुंवारी लड़कियों के बच्चे लेने में बहुत फायदा है। ऐसे बच्चों के लिए कभी कोई क्लेम नहीं करेगा। बाप तो कार्रवाई के डर से पहले ही भाग जाता है, लड़की के घर वाले बदनामी के डर से कभी सामने ही नहीं आएंगे। इसलिए ऐसे बच्चों की डिमांड बदली है, इसमें एजेंट्स से लेकर खरीददार तक सब सेफ रहते हैं।







