एसडीएम थप्पड़कांड केस में टोंक एससी/एसटी कोर्ट ने मंगलवार को नरेश मीणा की जमानत याचिका खारिज कर दी।
विशिष्ट लोक अभियोजक रामावतार सोनी ने बताया- आज(मंगलवार) शाम करीब 4:45 बजे जज आरती माहेश्वरी ने नरेश मीणा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
हालांकि नरेश के वकील फतेहराम मीणा ने बताया कि एससी/एसटी कोर्ट ने आज नरेश मीणा की रेगुलर जमानत याचिका खारिज की है। अब हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर करेंगे।

दरअसल, एसडीएम को थप्पड़ मारने के केस में नरेश मीणा को हाईकोर्ट से सशर्त जमानत मिली थी, लेकिन शर्तों के उल्लघंन के चलते एससी-एसटी कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को उनकी जमानत रद्द कर दी थी। इसके बाद नरेश मीणा ने 6 अगस्त की दोपहर नगरफोर्ट थाने में सरेंडर किया था।
अब जानिए- क्या था पूरा मामला
25 जुलाई 2025: झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल का कमरा गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। नगरफोर्ट थाना पुलिस की एप्लीकेशन के बाद 13 जुलाई 2026 को SC-ST कोर्ट ने उनकी जमानत कैंसिल कर दी थी।
13 नवंबर 2024: देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव में समरावता गांव के लोगों ने उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया था। निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। आरोप है कि जबरन तीन लोगों से मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।
14 नवंबर 2024: पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार किया और 15 नवंबर को कोर्ट के आदेश पर जेल भेज दिया। इस मामले में 60 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। नरेश मीणा को छोड़कर बाकी सभी आरोपियों को जमानत मिल गई थी। करीब 9 महीने बाद हाईकोर्ट ने नरेश मीणा को सशर्त जमानत पर रिहा किया था।






