नरेश मीणा बोले- बीजेपी में नहीं जाऊंगा, रविंद्र भाटी साथी:दोबारा थप्पड़कांड जैसी आशंका पर बोले- मैं गांधीवादी, फिर देखते हैं क्या होता है

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दो साल पहले विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम को थप्पड़ मारकर सुर्खियों में आए नरेश मीणा नंगे पांव पदयात्रा पर थे। मुद्दा था- किसानों को डीएपी यूरिया खाद मिलने में आने वाली परेशानी का। हालांकि मांगों पर सहमति के बाद जयपुर कूच के लिए निकले नरेश मीणा ने बुधवार रात आंदोलन वापस ले लिया।

लेकिन ये सिर्फ किसान आंदोलन था या 2028 के चुनावों की तैयारी? तीसरे मोर्चे को लेकर क्या प्लान है? रविंद्र भाटी EWS सरलीकरण की यात्रा…भाजपा-कांग्रेस को लेकर रणनीति जैसे कई सवाल भास्कर ने उनसे पूछे। ये भी पूछा कि अगर फिर भी 2024 के थप्पड़कांड जैसी परिस्थिति बनती है तो नरेश मीणा क्या करेंगे?

पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

पदयात्रा के दौरान रास्ते में कई लोगों ने नरेश मीणा का स्वागत किया था।

पदयात्रा के दौरान रास्ते में कई लोगों ने नरेश मीणा का स्वागत किया था।

भास्कर : आपने कहा कि किसानों को 1,350 रुपए प्रति कट्टा डीएपी बिना अटैचमेंट के नहीं मिल रहा। टोंक कलेक्टर टीना डाबी कह रही हैं 2 हजार टन और आने वाला है, कमी नहीं है। सच क्या है?

नरेश मीणा : ये बात तो बारां कलेक्टर ने भी कही है, लेकिन वहां भी इस मामले में जाम लगा। इसी नाराजगी में मैंने जयपुर कूच किया था। उन्होंने एक लिमिट बना रखी है कि 5 ही कट्‌टे देंगे। कल पता लगा कि 5 से घटाकर 2 कट्‌टे कर दिए, यानी आपके पास पर्याप्त खाद नहीं है।

उनियारा से निकला तो कई किसान मिले। बाेले- अब खाद आने लगा है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या अटैचमेंट की है। इसमें खाद के बैग के साथ एक्स्ट्रा आइटम खरीदने पड़ते हैं। जो डीएपी का कट्‌टा 1350 का है, 2200-2300 रुपए तक पड़ता है। ये अटैचमेंट कहां से आ रहा है, कौन दे रहा है, किसके अंडर में है, यह एक हजारों करोड़ का बड़ा घपला है।

टोंक कलेक्टर टीना डाबी से निवेदन करूंगा कि वो अधिकारियों को फील्ड में उतारें। पर्याप्त खाद है तो किसान लाइनों में क्याें खड़े हैं।

भास्कर : टीना डाबी से मोबाइल पर हुई बातचीत का वीडियो क्यों बनाया और इसे वायरल क्यों किया?

नरेश मीणा : उनका कॉल आया, तब मैंने उन्हें कहा था- मैडम मैं इसको ओपन स्पीकर पर ले रहा हूं। और इसके बाद उनसे लगतार मेरी जो भी बात हुई, वो सब सामने है। उन्होंने जिस तरह किसानों के हित में बात की, उसे लोगों ने सराहा।

बारां से जयपुर कूच के दौरान टोंक कलेक्टर टीना डाबी ने नरेश मीणा से किसानों की समस्याओं पर बात की थी।

बारां से जयपुर कूच के दौरान टोंक कलेक्टर टीना डाबी ने नरेश मीणा से किसानों की समस्याओं पर बात की थी।

भास्कर : कांग्रेस से बगावत, निर्दलीय लड़ाई और अब भाजपा-कांग्रेस दोनों पर हमला…क्या पॉलिटिकल प्लान हैं?

नरेश मीणा : मैं कभी बीजेपी में नहीं जा सकता। दूसरा मेरा ये भी मन है कि राजस्थान में तीसरा मोर्चा मजबूती से आए। कमी है तो ये कि तीसरे मोर्चे की सोच रखने वाले लोग अभी तक एक मंच पर नहीं आ पा रहे हैं। तीसरे मोर्चे का उदाहरण अभी बारां में है। वहां निकाय चुनाव में जनता ने बीजेपी-कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया। आप ने जीत हासिल की।

भास्कर : रविंद्र भाटी EWS सरलीकरण की यात्रा निकाल रहे हैं। आप दोनों निर्दलीय हैं, ये संयोग है या तीसरे मोर्चे की दौड़ शुरू हो गई है?

नरेश मीणा : रविंद्र भाटी हमारे साथी हैं। खुशी होती है कि मेरा एक साथी उधर लड़ाई लड़ रहा है। रविंद्र भाटी स्टूडेंट पॉलिटिक्स से हैं। इन्होंने छात्र जीवन भी प्रोटेस्ट और आंदोलनों में निकाला है।

राजस्थान के टॉप क्लास नेता स्टूडेंट पॉलिटिक्स से निकले, लेकिन उन छात्र संघ चुनावों को ही बंद कर दिया गया है। क्योंकि नेता परिवारवाद को आगे बढ़ना चाहते हैं।

EWS सरलीकरण यात्रा को लेकर नागौर में स्थानीय लोगों ने रविंद्र सिंह भाटी का स्वागत किया।

EWS सरलीकरण यात्रा को लेकर नागौर में स्थानीय लोगों ने रविंद्र सिंह भाटी का स्वागत किया।

भास्कर : जेल से निकलते ही तीन जिलों के 8 विधानसभा क्षेत्रों में तीसरे मोर्चे से पंचायत चुनाव लड़ने का ऐलान किया। यह किसान आंदोलन है या 2028 से पहले राजनीतिक जमीन बनाने की तैयारी?

नरेश मीणा : मेरा अब तक का जीवन ही आंदोलन में निकला है। 42 मुकदमे लगे हैं। मुझे फर्क नहीं पड़ता कब चुनाव हैं? जो किसान सड़कों पर, लाइनों में खड़े हैं…वो लाठियां खा रहे हैं और मैं वोट मांगू, ये मुझे शोभा नहीं देता। चुनाव बाद में हैं। मुझे पहले किसानों की लड़ाई लड़नी है।

भास्कर : पहले एससी-एसटी कोर्ट ने आपकी जमानत रद्द की थी, अब फिर से राहत मिली है, इस पर क्या कहेंगे?

नरेश मीणा : जिस तरह से राजस्थान सरकार और पुलिस मेरे मामले में कोर्ट के सामने गई है, वो गलत है। इसमें माननीय कोर्ट गलत नहीं हैं।

कोर्ट तो न्याय ही कर रहा है, पर ये पुलिस कार्रवाई ही तो अजीब है। मैंने तो एक थप्पड़ ही तो मारा था। इसमें महज एक राजकार्य में बाधा व मारपीट का साधारण सा मामला, लेकिन मुझ पर जानलेवा हमले की धारा लगाई। एक दिन में जमानत होनी थी, उस तरह के मामले में मैंने 8 महीने जेल काटी।

भास्कर : चुनाव के दौरान आपने एसडीएम को थप्पड़ मार दिया। दोबारा ऐसी परिस्थिति बनी तो क्या नरेश मीणा फिर आपा खो देंगे?

नरेश मीणा : अब हम गांधीवादी तरीके से काम कर रहे हैं। माननीय कोर्ट का भी ऑर्डर है कि किसी भी तरह से कोई कानून हाथ में नहीं लें तो ज्यादातर तो अपने आपको बचाने का ही प्रयास करूंगा, और फिर देखते हैं क्या होता है।

13 नवंबर 2024 को टोंक के समरावता गांव में देवली-उनियारा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।

13 नवंबर 2024 को टोंक के समरावता गांव में देवली-उनियारा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।

भास्कर : पहले आप शोषित और वंचित तबके की बात करते थे, अब 36 कौम की…ये बदलाव क्यों और कैसे आया?

नरेश मीणा : हाड़ौती में एक समय में ब्राह्मण और राजपूत के हाथ में कमान थी। मजबूत स्थिति में थे। मेरा मानना है, वो जब तक थे तब तक वहां पर कॉमर्शियल पॉलिटिक्स नहीं थी। ललित किशोर चतुर्वेदी, रघुवीर सिंह कौशल, बृजराज सिंह और भरत सिंह कुंदनपुर… ये लोग ईमानदार थे।

अभी जो वहां पॉलिटिक्स हो रही है, वो पूरी कॉमर्शियल है। बजरी पर कब्जा नेताओं का। गिट्टी पर कब्जा नेताओं का। कोई रोड बनेगा तो उसके ठेके नेताओं के। मैं इसके खिलाफ काम कर रहा हूं। इनके खिलाफ लड़ रहा हूं और इसकी कीमत भी चुका रहा हूं। हत्या-रेप केस में मैंने तीन-तीन महीने में जमानतें होती देखी हैं और मैं 8 महीने सिर्फ एक थप्पड़ के मामले में जेल में रहता हूं।

बारां में आज तक 6 जिला प्रमुख बने। तीन बार सामान्य सीट आई है, लेकिन ब्राह्मण एक बार भी जिला प्रमुख नहीं बना। ऐसे में हम वहां लोगों के लिए काम करने वाले और एक बहुत अच्छे व्यक्ति संदीप शर्मा को जिला प्रमुख का चेहरा बना कर चुनाव लड़वा रहे हैं। बाकी प्रधान की जो सीटें हैं, उसमें भी हमारा मन है कि हम सभी समाजों को बराबर-बराबर मौका दें। तीसरे मोर्चे में सबकी हिस्सेदारी बराबर है।

भास्कर : आप भाजपा में नहीं जाने की बात कहते हैं। कांग्रेस में वापसी का दरवाजा बंद है या सौदेबाजी के लिए खुला है?

नरेश मीणा : सौदेबाजी तो क्या है इसमें? हमें लगेगा कि थर्ड मोर्चे के माध्यम से नई राजनीति पैदा कर सकते हैं तो पहला प्रयास तो वही रहेगा। लेकिन मेरी इच्छा है कि कांग्रेस में हमें सम्मान मिले। हम चाहते हैं कि टिकट दे रहे हों तो हमें भी तौल लें कि उसमें कितना दम है और हममें कितना? जितना हम लोग दे सकते हैं, तो उसका कुछ हमें भी मिले।

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