
राजस्थान हाईकोर्ट (जयपुर पीठ) ने एक सिविल रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए संदिग्ध और फर्जी पट्टे को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति प्रमिल कुमार माथुर की खंडपीठ ने मामले की गहन जांच करने के आदेश जारी किए हैं।
अदालत ने पक्षकार बनाने के आवेदन की सुनवाई के दौरान पाया कि प्रस्तुत किया गया पट्टा प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत होता है। दस्तावेज में न तो कोई फाइल नंबर दर्ज है और न ही कोई प्रविष्टि नंबर मौजूद है। ऐसा लगता है कि इसे केवल खाली जगहों को भरकर तैयार किया गया है।
हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारी को एक निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 06 अगस्त 2026 के पिछले आदेश के अनुपालन में अगली सुनवाई की तारीख से पहले स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए।

हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारी को एक निष्पक्ष जांच शुरू करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई पूर्व निर्धारित तिथि यानी 07 सितंबर 2026 को तय की गई है। यह आदेश 24 अगस्त 2026 को प्रमुख सचिव से जुड़ी सिविल रिट याचिका (नंबर 19408/2025) पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया था।
आदेश के बाद बुधवार को दूनी तहसील की टीम घाड़ कस्बे में पहुंची और अपने स्तर पर जांच की। इस दौरान मौके पर लोग एकत्रित थे। राजस्थान हाईकोर्ट ने यह आदेश 25 अगस्त मंगलवार शाम को अपने वेब पोर्टल पर जारी किया है।






