उनियारा, 5 घंटे पहले

उनियारा,
सुखोदय तीर्थ क्षेत्र सूंथड़ा में दशलक्षण महापर्व भक्ति भाव और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। महापर्व को लेकर प्रबंध कमेटी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रबंध कमेटी अध्यक्ष महावीर पराणा व सन्तु जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व जैन समाज का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक महापर्व है। यह पर्व दस दिन चलेगा। श्रद्धालु आत्मशुद्धि, आत्मचिंतन, संयम, तप, साधना के जरिए दस उत्तम धर्मों की आराधना करेंगे।

दशलक्षण महापर्व भौतिक आनंद या मनोरंजन का पर्व नहीं है। यह आत्मा के वास्तविक स्वरूप को समझने का अवसर है। यह कर्मों की निर्जरा का भी अवसर है।
दस दिनों में क्रमशः उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य, उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना होगी। उत्तम क्षमा में क्रोध का त्याग होगा। सभी जीवों के प्रति क्षमा भाव रखा जाएगा। मार्दव में अहंकार छोड़ा जाएगा। विनम्र बनने की प्रेरणा दी जाएगी। आर्जव में छल-कपट छोड़ा जाएगा। मन-वचन-कर्म में सरलता अपनाई जाएगी। शौच में लोभ का त्याग होगा।
सत्य में हितकारी और यथार्थ वचन पर जोर रहेगा। संयम में इंद्रियों पर नियंत्रण होगा। तप में आत्मसाधना होगी। त्याग में निस्वार्थ दान होगा। आकिंचन्य में भौतिक वस्तुओं के प्रति अनासक्ति रहेगी। ब्रह्मचर्य में आत्मा के शुद्ध स्वरूप में लीन होने का भाव रखा जाएगा।
शास्त्री हिमांशु जैन के निर्देशन में धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत मंगलाष्टक से होगी। प्रतिदिन नित्य अभिषेक और शांतिधारा होगी। इसमें पुण्यार्जक 51 परिवारों के नामों का वाचन किया जाएगा। शांतिधारा के बाद देवशास्त्र पूजा होगी। मूलनायक भगवान की पूजा होगी। सोलहभावना होगी। नंदीश्वरद्वीप, चौबीस भगवान, दश लक्षण पूजा सहित अन्य अनुष्ठान होंगे। दशलक्षण महामंडल विधान का आयोजन भी होगा।
महापर्व के दौरान श्रद्धालु स्वाध्याय करेंगे। सामायिक करेंगे। पूजा-अर्चना करेंगे। तप-साधना में भाग लेंगे। कई श्रद्धालु व्रत करेंगे। उपवास करेंगे। एकासन जैसी साधनाएं करेंगे। सात्विक जीवन अपनाकर आत्मचिंतन करेंगे। जैन दर्शन में दशलक्षण पर्व को संचित कर्मों की निर्जरा और नए कर्मों के बंध को रोकने की साधना का महत्वपूर्ण अवसर माना गया है।
हुकम चंद जैन ने बताया कि दसों दिन प्रतिदिन शाम 7 बजे भक्तामर दीपार्चना भक्ति भाव के साथ होगी। महापर्व में समाज के श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग धार्मिक आयोजन होंगे। समापन पर क्षमावाणी होगी। वर्षभर में हुई भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी जाएगी। आपसी मनमुटाव खत्म करने का संदेश दिया जाएगा। भाईचारे और सामाजिक एकता पर जोर रहेगा।




