रूस का UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन:जर्मनी-जापान का विरोध किया, सुरक्षा परिषद में 5 परमानेंट मेंबर, भारत 8 बार अस्थायी सदस्य रहा

Spread the love

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शनिवार को न्यूयॉर्क में यूएन महासभा को संबोधित किया था।

रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। हम ब्राजील और भारत की स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।

लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सीटों का विरोध किया। उन्होंने खासतौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए उन पर ‘सैन्यवाद और बदले की भावना की ओर बढ़ने का आरोप लगाया।

लावरोव ने साथ ही कहा कि UNSC में सुधार के दौरान मौजूदा स्थायी सदस्यों के अधिकारों और शक्तियों में कमी नहीं होनी चाहिए।

UNSC में कुल 15 सदस्य, 5 परमानेंट मेंबर्स

भारत UNSC में छठी परमानेंट सीट का सबसे मजबूत दावेदार

दुनिया की 17% आबादी भारत में रहती है। 142 करोड़ जनसंख्या के साथ भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। UNSC में इतनी बड़ी आबादी का रिप्रेजेंटेशन होना जरूरी है।

पिछले एक दशक में भारत की औसतन सालाना विकास दर 7% से ज्यादा रही है। यह चीन के बाद किसी भी दूसरे बड़े देश की तुलना में सबसे ज्यादा है। इस आर्थिक ताकत को UNSC में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारत परमाणु शक्ति संपन्न है, लेकिन वो इसका दिखावा नहीं करता। अगर भारत को सुरक्षा परिषद में शामिल किया जाता है तो परमाणु निरस्त्रीकरण प्रोग्राम में वह अहम भूमिका निभा सकता है।

इंटरनेशनल थिंक टैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ के सर्वे के मुताबिक यदि अगले एक दशक में UNSC का विस्तार होता है तो उसमें सबसे ज्यादा मौके भारत के लिए होंगे। एक्सपर्ट्स के बीच कराए गए सर्वे के अनुसार, भारत के स्थायी सदस्य बनने की संभावना 26% रहेगी।

भारत की स्थायी सदस्यता की मांग 1990 से जारी

भारत की UNSC में स्थायी सदस्यता की मांग 1990 के दशक से उठती रही है। 2008 से UN में सुरक्षा परिषद सुधार पर औपचारिक बातचीत शुरू हुई। 2010 में भारत ने ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह बनाकर स्थायी सीट की मांग आगे बढ़ाई। 2026 में भी सुधार को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन सदस्य देशों के बीच UNSC के नए ढांचे पर सहमति नहीं बनी है।

परिषद के सदस्य 15, वीटो राइट सिर्फ 5 को

सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य- अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं। इन सबको वीटो पावर हासिल है। इसके अलावा 10 गैर-स्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें 2 साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।

सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य बढ़ाने के लिए UN चार्टर में बदलाव करना होगा। इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत और दो-तिहाई सदस्य देशों की औपचारिक मंजूरी जरूरी है। इसमें सभी पांच मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी आवश्यक है।

स्थायी सदस्यता को लेकर 4 मुश्किलें

1. चीन का विरोधी रुख भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का रुख सबसे महत्वपूर्ण अड़चनों में से एक माना जाता है। चीन के भारत के साथ क्षेत्रीय व रणनीतिक मतभेद भी हैं। उसने स्थायी सदस्यता को लेकर भारत का कभी भी समर्थन नहीं किया है।

2. G4 के खिलाफ दूसरे देशों की आपत्ति भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील स्थायी सीटों के विस्तार का समर्थन करते हैं। लेकिन Uniting for Consensus (UfC) जैसे समूह का एक प्रस्ताव है कि UNSC में नए स्थायी सदस्यों के बजाय गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई जाएं।

3. अफ्रीकी देशों की सीटों पर सहमति न बनना

अफ्रीकी देशों की मांग भी UNSC सुधार का बड़ा हिस्सा है। कितनी सीटें होंगी और उनका स्वरूप क्या होगा, इस पर भी बातचीत जारी है। अभी तक सर्वसम्मति नहीं बन सकी है।

4. वीटो का सवाल

नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर मिलेगी या नहीं, यह सबसे जटिल मुद्दों में से एक है। मौजूदा पांच स्थायी सदस्य अपने अधिकारों को बनाए रखने पर जोर देते हैं। G4 स्थायी सदस्यता के वास्तविक अधिकारों की बात करता है, जिसमें वीटो राइट्स भी शामिल हैं।

भारत ने चीन को UNSC में सीट दिलाने का समर्थन किया था

आज चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर भारत का विरोध करता है, लेकिन एक समय भारत ने चीन को सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह दिलाने का समर्थन किया था।

1950 में नेहरू चीन को संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में शामिल कराने के पक्ष में थे। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री डीन एचिसन से बातचीत में चीन को सुरक्षा परिषद में शामिल करने का रास्ता निकालने की बात कही थी।

बाद में 1955 में यह चर्चा सामने आई कि भारत को सुरक्षा परिषद की स्थायी सीट देने का प्रस्ताव मिला था और नेहरू ने इसे चीन के लिए छोड़ दिया। द नेहरू आर्काइव के मुताबिक, नेहरू ने संसद में इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि भारत को ऐसी सदस्यता का न कोई औपचारिक और न ही अनौपचारिक प्रस्ताव मिला था।

Related Posts

SIR का विरोध, जंतर-मंतर से 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में:12वां मेट्रो स्टेशन भी बंद; CJP मुंबई में प्रदर्शन करेगी, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

Spread the love

Spread the loveदिल्ली में SIR के खिलाफ लेफ्ट, AAP और स्टूडेंट यूनियन ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर से सौरभ भारद्वाज समेत 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर…

Read more

PM मोदी ने कैप्टन स्मित से बात की, VIDEO:174 जानें बचाने वाले पायलट बोले- हनुमान चालीसा पढ़ रहा था, भगवान ने ही हमें बचाया

Spread the love

Spread the lovePM मोदी पायलट स्मित मच्छर से बातचीत करते हुए। 30 सितंबर को इजराइल जा रही प्लेन में स्मित ने सूझबूझ दिखाकर 174 लोगों की जान बचाई थी। प्रधानमंत्री…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

करेंट अफेयर्स 2 अक्टूबर:वैभव सूर्यवंशी टाइम मैगजीन के 100 राइजिंग स्टार्स में शामिल; कोटक बैंक के MD और CEO बने अनूप कुमार

  • October 2, 2026
करेंट अफेयर्स 2 अक्टूबर:वैभव सूर्यवंशी टाइम मैगजीन के 100 राइजिंग स्टार्स में शामिल; कोटक बैंक के MD और CEO बने अनूप कुमार

भारत को 44 साल बाद एशियाड विमेंस हॉकी का गोल्ड:चीन को हराकर ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया; 13वें दिन इंडिया को 6 गोल्ड

  • October 2, 2026
भारत को 44 साल बाद एशियाड विमेंस हॉकी का गोल्ड:चीन को हराकर ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया; 13वें दिन इंडिया को 6 गोल्ड

निवाई के 25 केंद्रों पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा:1100 छात्र हुए शामिल, मेरिट में आने वाले छात्र जिला स्तर पर होंगे सम्मानित

  • October 2, 2026
निवाई के 25 केंद्रों पर भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा:1100 छात्र हुए शामिल, मेरिट में आने वाले छात्र जिला स्तर पर होंगे सम्मानित