
भगवान शांति देने वाले नहीं हैं, बल्कि वे शांति की प्राप्ति का मार्ग बताते हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही आत्मा में वास्तविक शांति प्राप्त की जा सकती है। यह बात मुनि सुप्रभ सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।

मुनि श्री ने कहा कि जीवन में शांति बनाए रखने के लिए व्यक्ति को तीन फैक्ट्रियां लगाने की आवश्यकता है। मुख में शुगर फैक्ट्री, हृदय में प्रेम फैक्ट्री और दिमाग में आईस फैक्ट्री होनी चाहिए। अर्थात जब भी बोलें, मीठा बोलें, सभी के प्रति प्रेम और वात्सल्य का भाव रखें तथा विपरीत परिस्थितियों में भी अपने दिमाग को ठंडा रखें। इन तीन बातों को जीवन में उतार लिया जाए तो अशांति व्यक्ति के पास नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति शांति प्राप्त करना चाहता है, लेकिन शांति के अनुरूप स्वयं को बदलना नहीं चाहता।
व्यक्ति के पास सोफा सेट है, डिनर सेट है और डायमंड सेट भी है, लेकिन माइंड सेट नहीं है। माइंड अपसेट होने के कारण ही जीवन में अशांति बढ़ रही है। इसलिए बाहरी सुविधाएं जुटाने के साथ अपने विचारों को व्यवस्थित करना भी जरूरी है। मन और विचारों पर नियंत्रण होगा तो जीवन में शांति स्वतः आने लगेगी।
सुविधा की चिंता ही दुविधा का कारण बन जाती है : धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि वैराग्य सागर जी महाराज ने कहा कि जो व्यक्ति लगातार तनाव में रहता है और संक्लेश परिणाम करता है, उसका अकाल मरण हो सकता है। संक्लेश के कारण जीवन में दुविधाएं बढ़ती जाती हैं। व्यक्ति सुविधाएं प्राप्त करने के लिए संक्लेश करता है, लेकिन बाद में वही सुविधाएं उसकी चिंता और दुविधा का कारण बन जाती हैं।




