निवाई, 1 घंटे पहले

निवाई के शांतिनाथ मंदिर में पर्युषण पर्व के समापन पर क्षमावाणी महोत्सव हुआ। आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने कहा, शत्रु और मित्र दोनों को क्षमा करना वीरों का भूषण है। उन्होंने उत्तम क्षमा धर्म को पहला बताया, किसी को कष्ट न देना और क्रोध न करना।

आर्यिका सुलक्ष्यमति माताजी ने कहा कि क्षमा आत्मा का धर्म है और हर इंसान के लिए जरूरी है। क्षमावान व्यक्ति का कोई शत्रु नहीं होता।
जैन समाज के प्रवक्ता सुनिल भाणजा और विमल जौंला ने बताया कि आचार्य सुन्दर सागर महाराज, आर्यिका चिन्तनमति माताजी और सुलक्ष्यमति माताजी संघ की मौजूदगी में बड़ा और बिचला जैन मंदिर में जिनेन्द्र देव का सामूहिक कलशाभिषेक हुआ। इसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
चतुर्दशी को श्रावक श्रेष्ठी श्रवण मल, बोनू जैन, ज्योति जैन शाह बोली वाले, राजकुमार संघी और रितिक संघी को भगवान को माला पहनाने का मौका मिला। जिनेन्द्र देव को पालकी में बैठाकर वेदी में विराजमान किया गया।





