निवाई, 59 मिनट पहले

जलझूलनी एकादशी का त्योहार निवाई शहर और ग्रामीण इलाकों में उत्साह से मनाया गया। इस मौके पर भगवान की डोल यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और दर्शन का लाभ लिया।

डोल यात्रा से पहले, मंदिरों के पुजारियों ने भगवान की मूर्तियों का घी, दूध, पंचामृत और जल से अभिषेक किया। इसके बाद भगवान को सजाकर विमानों में बैठाया गया।
जलझूलनी एकादशी के महापर्व पर दोपहर 4 बजे भगवान चारभुजानाथ मंदिर, नृसिंह मंदिर, सुनारों का मंदिर, दर्जियों का मंदिर, भगवान सत्यनारायण मंदिर और लक्ष्मीनाथ मंदिर सहित कई मंदिरों से बैंड बाजे के साथ भगवान के विमान भव्य शोभा यात्रा के लिए रवाना हुए।
भगवान के विमानों की यह भव्य शोभा यात्रा शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए भरा कुआ तालाब पर पहुंची। रास्ते में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह फूल बरसाकर और आरती कर शोभा यात्रा का स्वागत किया।
डोल यात्रा में महिलाएं भजन गाती हुई चल रही थीं, वहीं युवा डीजे के गानों पर नाचते हुए आगे बढ़ रहे थे।
ठाकुरजी के सभी विमानों को लेकर श्रद्धालु मेला स्थल भरकुंआ तालाब पहुंचे, जहां भगवान के विमानों को विराजित किया गया। सूर्यास्त के बाद भगवान की सामूहिक महाआरती की गई। इसके बाद विद्वान पंडितों की मौजूदगी में विमान में विराजमान भगवान को तालाब में विशेष सजी-धजी नौकाओं में भव्य जल यात्रा कराई गई। इस दौरान गायक कलाकारों ने भजन भी गाए।
जलझूलनी एकादशी पर्व पर भरकुआ तालाब पर भव्य मेले का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मेला स्थल पर लगी खिलौने, गुब्बारे, मिठाईयां, चाट, पकौड़ी सहित कई खाद्य पदार्थों की दुकानों पर महिलाओं, बच्चों और पुरुषों ने खूब खरीदारी की।
इसके बाद ठाकुरजी के विमान अपने मंदिरों में वापस पहुंचे। मेले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। नगर पालिका ने मेले में लोगों की सुविधाओं के लिए टेंट, पार्किंग, पेयजल और लाइट सहित सभी इंतजाम किए थे।
इसी तरह सिरस और पराना गांव में भी मंगलवार को जलझूलनी एकादशी के अवसर पर ठाकुर जी की डोली यात्रा निकाली गई।






