देवली, 52 मिनट पहले

देवली में जलझूलनी एकादशी के मौके पर मंगलवार को ठाकुर जी नगर भ्रमण पर निकले और फिर उन्हें जल विहार करवाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखी गई।

मंदिरों में बाल गोपाल और सालिगराम जी का सुंदर श्रृंगार किया गया। इसके साथ ही उनकी पालकियों को भी सजाया गया, जिनमें बैठकर शाम को वे नगर भ्रमण पर निकले। इस मौके पर शहर के सभी मंदिरों में विशेष पूजा की गई।
शाम को शहर के नेकचाल बालाजी मंदिर पर सभी मंदिरों से पालकियां पहुंचीं। जहां भगवान की सामूहिक रूप से आरती की गई। इस दौरान स्थानीय श्री राम व्यायाम शाला के अखाड़ेबाजों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए।

खास बात यह रही कि इस अखाड़े में देवली नगर पालिका अध्यक्ष कजोडी देवी के बेटे और पूर्व पार्षद हरेन्द्र बैरवा ने भी करतब दिखाए। पालिकाध्यक्ष के पति तनसुख बैरवा इस अखाड़े के मुख्य उस्ताद हैं।
शहर का चारभुजानाथ मंदिर लगभग सवा सौ साल पुराना है। इस मंदिर में भगवान विष्णु के सालिगराम विराजते हैं, जिनकी पालकी निकलती है। यह पालकी पिछले सौ सालों से निकाली जा रही है और शहर से निकलने वाली पालकियों में यह सबसे आगे चलती है।
शहर का दूसरा प्रमुख मंदिर राठौड़ तेलियान मंदिर है। इस मंदिर को देवली शहर के साहू समाज ने बनवाया है। यहां पर भगवान लक्ष्मीनाथ जी की मूर्ति स्थापित है। इस बार भगवान लक्ष्मीनाथ जी का बेवाण लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। बेवाण में इस बार भगवान सायरन के साथ नगर भ्रमण पर निकले।
देवली शहर के एजेंसी एरिया में स्थित गोपाल मंदिर भी काफी पुराना है। यहां से भी हर साल ठाकुरजी को नगर भ्रमण पर ले जाया जाता है।
शहर के रावण चौक के पास स्वर्णकार समाज की धर्मशाला में स्थित भगवान नृसिंह की रेवाड़ी भी हर साल नगर भ्रमण पर निकलती है। इस मंदिर को स्वर्णकार समाज ने बनवाया था।
देवली के प्राचीन मंदिरों में नीलकंठ महादेव मंदिर का नाम भी आता है। यहां स्थित भगवान राम दरबार के मंदिर से भी हर साल रेवाड़ी निकाली जाती है।






