निवाई, 3 घंटे पहले

देवधाम जोधपुरिया में चल रहे तीन दिवसीय मेले के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल देखने को मिला। निवाई में ध्वज पूजन के बाद शाम करीब 6 बजे बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान देवनारायण के ध्वज लेकर देवधाम जोधपुरिया पहुंचे। मंदिर ट्रस्ट की ओर से ध्वज को मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया।

ध्वज यात्रा के दौरान वनस्थली से देवधाम जोधपुरिया तक श्रद्धालुओं पर हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए गए। आसमान से होती फूलों की बारिश के बीच हाथों में भगवान देवनारायण के ध्वज लेकर चल रहे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया। यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
गुर्जर आरक्षण आंदोलन के 73 शहीदों के परिवारों का सम्मान
मेले के दौरान ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें गुर्जर आरक्षण आंदोलन में शहीद हुए समाज के 73 लोगों की माताओं और पत्नियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से शहीदों की माताओं और पत्नियों के चरण धोकर उनका सम्मान किया गया। कार्यक्रम में शहीद परिवारों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों ने आंदोलन में शहीद हुए लोगों के योगदान को याद किया और उनके परिवारों के सम्मान को समाज की ओर से महत्वपूर्ण पहल बताया।

श्रद्धालु भगवान देवनारायण के ध्वज लेकर देवधाम जोधपुरिया पहुंचे। भगवान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
रात 9 बजे भामाशाह सम्मान समारोह
मेले के दूसरे दिन रात 9 बजे भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से मेले के आयोजन में सहयोग करने वाले भामाशाहों का सम्मान किया जाएगा। कार्यक्रम को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
कांस्य की थाली में कमल पुष्प बनाकर होंगे देवनारायण के दर्शन
रात 11 बजे मेले में विशेष धार्मिक आयोजन होगा। भोपा कांस्य की थाली में कमल पुष्प बनाकर श्रद्धालुओं को भगवान देवनारायण के दर्शन कराएंगे। इस पारंपरिक आयोजन को देखने और भगवान के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।
राजस्थान के अलावा कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
देवधाम जोधपुरिया में हर साल आयोजित होने वाले मेले में राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले में हर साल करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान रहता है। इसे देखते हुए मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और मेले की व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं।




