टोंक, 4 घंटे पहले

त्याग, तपस्या और साधना के माध्यम से आत्मा को शुद्ध करने वाले दशलक्षण महापर्व के तहत गुरुवार को दूसरे दिन श्री दिगंबर जैन नसिया, अमीरगंज में धार्मिक आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुए। सुबह अभिषेक एवं शांतिधारा के बाद तीनलोक महामंडल विधान की आराधना की गई।

तीनलोक महामंडल विधान में इंद्र-इंद्राणी ने नित्य नियम पूजन के बाद विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना कर अर्घ्य समर्पित किए। विधान का आयोजन पंडित बृजेश शास्त्री महुआ के सानिध्य में हुआ। वहीं पीयूष जैन, भोपाल के भक्तिमय भजनों से वातावरण धर्ममय हो गया।
मान और कषाय के अभाव का नाम ही उत्तम मार्दव धर्म
पंडित बृजेश शास्त्री ने उत्तम मार्दव धर्म की व्याख्या करते हुए कहा- मान और कषाय के अभाव का नाम ही उत्तम मार्दव धर्म है। मनुष्य को अपनी शक्ति, धन, पद और दान का कभी घमंड नहीं करना चाहिए। मन के भावों को निर्मल रखते हुए अहंकार एवं अभिमान का त्याग करना ही सच्चे अर्थों में मार्दव धर्म है। उन्होंने कहा कि विनम्रता आत्मा को निर्मल बनाने का मार्ग है।

दशलक्षण महापर्व के उपलक्ष में श्री दिगंबर जैन नसिया, अमीरगंज में विद्युत सजावट की है।
जैन धर्म पर अंताक्षरी प्रतियोगिता
समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं कमल सर्राफ ने बताया- दशलक्षण महापर्व के दौरान प्रतिदिन प्रातःकाल धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सायंकालीन आरती, प्रश्न मंच एवं शास्त्र ज्ञान-स्वाध्याय का आयोजन किया जा रहा है। महिला मंडल ने प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को जैन धर्म पर आधारित अंताक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।




