टोंक, 1 घंटे पहले

प्रसंस्करण मशीनरी पर अधिकतम 9.90 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा।
केंद्र सरकार खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है। साथ ही आयातित खाद्य तेलों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से साल 2024-25 से 2030-31 तक नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-तिलहन शुरू किया गया है।

मिशन के तहत तिलहन उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय में सुधार और उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों को बीज उपलब्ध कराएगी सरकार
टोंक जिला परिषद के संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) रामलाल जाट ने बताया- टोंक जिले में प्रमुख तिलहनी फसलों सरसों, मूंगफली एवं तिल का उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक उत्पादन देने वाली और शीघ्र पकने वाली किस्मों के बीज किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
साथ ही फ्रंटलाइन एवं ब्लॉक स्तरीय प्रदर्शनों के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।
500 हेक्टेयर का होगा क्लस्टर
योजना का क्रियान्वयन क्लस्टर आधारित होगा। प्रत्येक क्लस्टर 500 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा, जिसमें कम से कम 200 किसान शामिल किए जाएंगे। क्लस्टर का प्रबंधन वैल्यू चेन पार्टनर करेगा। इसमें एफपीओ, सहकारी संस्था अथवा सार्वजनिक/निजी निगम पात्र होंगे।
वैल्यू चेन पार्टनर द्वारा किसानों का पंजीकरण, मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, प्रशिक्षण, फार्मर्स फील्ड स्कूल एवं सलाहकार सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
प्रसंस्करण मशीनरी पर मिलेगा अधिकतम 9.90 लाख का अनुदान
10 टन क्षमता तक की तिलहन प्रसंस्करण मशीनरी एवं उपकरण पर योजना लागत का 33 प्रतिशत या अधिकतम 9.90 लाख रुपए, जो भी कम हो, अनुदान दिया जाएगा।
इच्छुक एफपीओ, केवीएसएस एवं ग्राम सेवा सहकारी समितियां सहित अन्य पात्र संस्थाएं 5 अक्टूबर तक निर्धारित प्रपत्र में आवेदन कर सकती हैं। अधिक जानकारी के लिए कृषि विभाग के संबंधित कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।





