
राजकीय अल्पसंख्यक बालक आवासीय विद्यालय की छात्र की संदिग्ध मौत के बाद धरने पर बैठे पीड़ित परिवार के पास पहुंचे और उनकी मांगें मानते हुए।
टोंक के राजकीय अल्पसंख्यक बालक आवासीय स्कूल में नाबालिग छात्र की संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर छात्रावास के बाहर चल रहा परिजनों का धरना खत्म हो गया। बीती रात करीब 2 बजे टोंक तहसीलदार अजयपाल यादव और जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण अधिकारी नितेश कुमार जैन दोबारा धरना स्थल पहुंचे और परिजनों से बातचीत की। परिवार ने अपनी मांगों को लेकर तहसीलदार को ज्ञापन दिया। बातचीत के बाद प्रशासन की ओर से 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने, सरकारी योजनाओं के तहत परिवार को लाखों रुपए का लाभ दिलाने और मामले की जांच के लिए कमेटी बनाने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद रात करीब ढाई बजे परिजनों ने प्रशासन पर भरोसा जताते हुए धरना खत्म कर दिया।

17 सितंबर को दिए जाएंगे 2 लाख रुपए
प्रशासन की ओर से बताया गया कि पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपए की सहायता 17 सितंबर को दी जाएगी। इसके अलावा अन्य सरकारी स्कीम के तहत मृतक छात्र के परिवार को लाखों रुपए का आर्थिक लाभ दिलवाया जाएगा। मामले की जांच के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार होगी।
जांच कमेटी में हॉस्टल के संचालक, गार्ड और अन्य संबंधित कार्मिकों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। प्रशासन की ओर से इन सभी बिंदुओं पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।

मृतक छात्र अरशद।
दोबारा धरना स्थल पहुंचे अधिकारी
इससे पहले शनिवार को परिजन छात्रावास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। देर रात तक प्रशासन और परिवार के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। इसके बाद जिला अल्पसंख्यक एवं कल्याण अधिकारी नितेश जैन भी वहां से चले गए, लेकिन परिजन धरने पर बैठे रहे।
बाद में उच्च अधिकारियों के निर्देश पर बीती मध्यरात करीब 2 बजे तहसीलदार अजयपाल यादव और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी नितेश जैन वापस धरना स्थल पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने परिवार से बातचीत कर उनकी मांगों पर सहमति बनाने की कोशिश की। आर्थिक सहायता, जांच कमेटी और सरकारी योजनाओं के लाभ का आश्वासन मिलने के बाद परिजन धरना खत्म करने पर सहमत हुए।
दादी ने मुख्यमंत्री को भेजा था पत्र
मृतक की दादी दूनी निवासी शमीम बानो ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नाम भेजे पत्र में न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने बताया था कि उनका पोता अरशद खान करीब दो साल से राजकीय अल्पसंख्यक बालक आवासीय स्कूल, टोंक में रहकर पढ़ाई कर रहा था।
दादी के अनुसार, 7 सितंबर की रात अरशद की तबीयत बिगड़ गई थी। साथी स्टूडेंट्स से बातचीत में उन्हें पता चला कि अरशद ने गार्ड को तबीयत खराब होने की बात बताई थी। आरोप है कि गार्ड ने उसे एक गोली देकर सो जाने और अगले दिन डॉक्टर को दिखाने की बात कही थी।
सुबह हालत बिगड़ी, अस्पताल पहुंचने पर मृत बताया
परिजनों के अनुसार, इसके बाद अरशद की तबीयत में सुधार नहीं हुआ और 8 सितंबर की सुबह उसकी हालत और बिगड़ गई। बाद में चार लोग उसे हाथ-पैर पकड़कर हॉस्टल से ऑटो तक ले गए और सीट के नीचे लिटाकर सआदत अस्पताल पहुंचाया।
परिजनों का आरोप है कि हॉस्टल प्रशासन की ओर से सुबह करीब साढ़े 7 बजे उन्हें फोन कर बताया गया कि बच्चा बीमार है और उसे हार्ट अटैक आया है, इसलिए वे जल्द अस्पताल पहुंचें। परिजन अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने अरशद को मृत बताया।
शव गांव ले जाकर दफनाया, कार्रवाई नहीं होने पर धरना
इसके बाद पीड़ित परिवार शव को गांव ले गया और रीति-रिवाज के अनुसार दफना दिया। परिजनों का आरोप है कि 3-4 दिन बीतने के बाद भी हॉस्टल के दोषी कार्मिकों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर परिवार शनिवार को टोंक पहुंचा और हॉस्टल के बाहर धरने पर बैठ गया।
देर रात तक सहमति नहीं बनने के बाद भी परिजन धरने पर डटे रहे। आखिरकार आधी रात के बाद अधिकारी दोबारा मौके पर पहुंचे और परिवार को आर्थिक सहायता, सरकारी योजनाओं का लाभ और जांच कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया। इसके बाद करीब ढाई बजे परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया।




