
सम्मेद शिखरजी पर्वत पर सामूहिक चरण वंदना करते हुए टोंक के तीर्थयात्री
टोंक के तीर्थयात्रियों ने रविवार (6 सितंबर) को झारखंड के गिरिडीह स्थित पवित्र सम्मेद शिखर की वंदना की। सम्मेद शिखर पदमपुरा पदयात्रा संघ की ओर से ये यात्री गौरव यात्रा में शामिल हैं। टोंक से गए सभी तीर्थयात्री 10 सितंबर को सम्मेद शिखर से रवाना होकर 11-12 सितंबर को लौटेंगे।
तीर्थयात्रियों की सामूहिक पर्वत वंदना के दौरान पूरे मार्ग में भक्ति, जयकारों और धार्मिक वातावरण से सम्मेद शिखर की पावन धरा गुंजायमान रही।

सम्मेद शिखर की यात्रा कठिन तप साधना
गौरव यात्रा के संयोजक संदीप देवली और सुनील एनसीडेक्स ने बताया- सम्मेद शिखर पर्वत की वंदना अत्यंत कठिन तप-साधना वाली यात्रा है। तीर्थयात्रियों को दोपहर 1 बजे पर्वत पर चढ़ना प्रारंभ करना पड़ता है और शाम 5 से 6 बजे तक वापस लौटते हैं।
सम्मेद शिखरजी सिद्ध क्षेत्र जैन धर्म की अत्यंत पवित्र भूमि है। मान्यता है कि चौबीस तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पावन भूमि से मोक्ष प्राप्त किया। इसलिए यहां का प्रत्येक कण जैन श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय एवं वंदनीय है।

सम्मेद शिखरजी पर्वत पर सामूहिक चरण वंदना करते हुए टोंक के तीर्थयात्री
शुद्ध भाव से की गई वंदना का महत्व
उन्होंने कहा- सम्मेद शिखर की शुद्ध भावों से की गई वंदना का जैन धर्म में विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा को आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्षमार्ग की साधना के रूप में करते हैं।
संघ के हुकमचंद और विनोद दाईवालो ने बताया- वर्तमान में सम्मेद शिखर में आचार्य, मुनिराज एवं आर्यिकाओं सहित लगभग 190 साधु-संत विराजमान हैं। टोंक से पहुंचे सभी तीर्थयात्रियों ने साधु-संतों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
27 किलोमीटर की सामूहिक पर्वत वंदना की
टोंक के सभी तीर्थयात्रियों ने रविवार को सम्मेद शिखर में करीब 27 किलोमीटर की सामूहिक पर्वत वंदना की। सुबह पर्वत पर चढ़कर यात्रियों ने वंदना करते हुए भगवान के चरणों में श्रद्धा अर्पित की।
पर्वत की वंदना पूर्ण करने के बाद सभी तीर्थयात्रियों ने भगवान पारसनाथ की टोंक पर सामूहिक पूजा-अर्चना की तथा विश्व में शांति, अहिंसा, जगत कल्याण, सुख-समृद्धि एवं सभी जीवों के मंगल की भावना की।
इस अवसर पर तीर्थयात्रियों ने कहा- आज टोंक नगरी के निवासी अपने हृदय की गहराइयों से भगवान पारसनाथ प्रभु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। टोंक के प्रत्येक घर की आस्था, हर प्राणी की भक्ति और हर हृदय की श्रद्धा को लेकर प्रभु के चरणों में नमन किया गया।
उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि टोंक नगर पर सदैव प्रभु की कृपा बनी रहे तथा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में शांति, अहिंसा और सम्यक दर्शन का प्रकाश बना रहे।




