जरूरत की खबर- पेपर कप में चाय-कॉफी, सूप न पिएं:उसमें छिपे माइक्रोप्लास्टिक से 7 गंभीर हेल्थ रिस्क, कांच या स्टील का कप ही बेहतर

Spread the love

फर्ज करिए, आप किसी दुकान पर चाय पीने के लिए रुकते हैं और आपको गर्म चाय डिस्पोजेबल पेपर कप में दी जाती है। आपको लगता है कि पेपर कप तो सेफ और इकोफ्रेंडली है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसे कप में गर्म चाय-कॉफी पीना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? पेपर कप में गर्म ड्रिंक डालने पर क्या होता है, इसे लेकर वैज्ञानिकों ने रिसर्च भी की है।

साल 2021 में ‘जर्नल ऑफ हेजार्डस मैटेरियल्स’ में एक स्टडी पब्लिश हुई। रिसर्चर्स ने 5 अलग-अलग कंपनियों के पेपर कप लिए और उनमें खौलता पानी डाला। पानी को 15 मिनट तक कप में रखा गया।

रिसर्च के मुताबिक, 100ml गर्म पानी में औसतन करीब 25,000 माइक्रोन आकार के माइक्रोप्लास्टिक कण मिले। इसके अलावा कप की अंदरूनी प्लास्टिक कोटिंग में लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसे हैवी मेटल्स भी पाए गए।

स्टडी बताती है कि पेपर कप में गर्म ड्रिंक पीने से माइक्रोप्लास्टिक एक्सपोजर बढ़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर डेली पेपर कप में गर्म चाय-कॉफी पीते हैं तो इसका सेहत पर क्या असर हो सकता है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज पेपर कप में चाय-कॉफी पीने के हेल्थ रिस्क पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • पेपर कप के रिस्क से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?
  • पेपर कप की जगह कौन-से विकल्प बेहतर हैं?

एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- जैसाकि नाम से जाहिर है, क्या पेपर कप कागज का बना होता है?

जवाब- नहीं, डिस्पोजेबल पेपर कप पूरी तरह कागज के नहीं होते। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • इन्हें मजबूत और लीक-प्रूफ बनाने के लिए अंदर की तरफ प्लास्टिक (आमतौर पर पॉलीएथिलीन) या कभी-कभी बायोप्लास्टिक (PLA) की पतली कोटिंग की जाती है।
  • यही लेयर चाय या कॉफी जैसे वार्म ड्रिंक के संपर्क में आने पर धीरे-धीरे घुलती है और माइक्रोप्लास्टिक या अन्य केमिकल रिलीज करती है।

सवाल- पेपर कप में गर्म चीजें डालने से कौन-से टॉक्सिन्स रिलीज होते हैं?

जवाब- गर्म चीजें डालने पर पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक्स और कुछ केमिकल पार्टिकल्स रिलीज होते हैं, जो शरीर में पहुंचकर हार्मोन, इम्यून सिस्टम और सेल्स के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। ग्राफिक में देखिए-

आइए इन पॉइंट्स को विस्तार से समझते हैं-

1. माइक्रोप्लास्टिक

  • अधिकांश पेपर कप के अंदर पॉलीएथिलीन (PE) या PLA की पतली प्लास्टिक कोटिंग होती है।
  • गर्म चाय-कॉफी डालने पर इससे सूक्ष्म प्लास्टिक कण निकलते हैं। इसे माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं। लंबे समय में ये सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं।

2. नैनोप्लास्टिक

  • ये माइक्रोप्लास्टिक से भी छोटे कण होते हैं। इनका आकार 1 माइक्रोमीटर से कम होता है।
  • ये शरीर में सूजन, ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और सेल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनके लॉन्ग टर्म इफेक्ट पर अभी रिसर्च जारी है।

3. प्लास्टिक एडिटिव्स

  • प्लास्टिक कोटिंग को लचीला और टिकाऊ बनाने के लिए अलग-अलग एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है।
  • कुछ परिस्थितियों में ये पदार्थ ड्रिंक में घुल सकते हैं।
  • इसका जोखिम इस्तेमाल किए गए मटेरियल, तापमान और कप की क्वालिटी पर निर्भर करता है।

4. प्रिंटिंग इंक के केमिकल्स

  • कप की प्रिंटिंग या मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी खराब हो तो केमिकल के ड्रिंक में पहुंचने का रिस्क ज्यादा होता है।
  • अच्छी क्वालिटी वाले फूड-ग्रेड कप में यह रिस्क थोड़ा कम होता है, लेकिन जीरो नहीं होता।

5. हैवी मेटल्स

  • कुछ पेपर कप से लेड, क्रोमियम और कैडमियम जैसे हैवी मेटल्स भी रिलीज हाे सकते हैं।
  • लंबे समय में ये ब्रेन, लिवर, किडनी और हार्ट को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

सवाल- अगर ये टॉक्सिन्स शरीर के अंदर जाएं तो क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं?

जवाब- डेली पेपर कप में गर्म चाय-काॅफी या सूप पीने से कप के टॉक्सिन्स बॉडी में जाते हैं। लंबे समय में इसके कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। सभी संभावित हेल्थ रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन लोगों को रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब- जो लोग लंबे समय तक और दिन में कई बार पेपर कप में गर्म ड्रिंक (जैसेकि चाय, कॉफी, सूप) पीते हैं, उन्हें रिस्क ज्यादा है। इसके अलावा इन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए-

  • जिन्हें किडनी डिजीज है।
  • जिन्हें लिवर डिजीज है।
  • जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है।
  • गर्भवती महिलाएं
  • छोटे बच्चे
  • बुजुर्ग

सवाल- क्या पेपर कप से कैंसर हो सकता है?

जवाब- डॉ. अली शेर बताते हैं कि कुछ स्टडीज में पेपर कप से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक, केमिकल्स और हैवी मेटल्स के लॉन्ग टर्म एक्सपोजर को कैंसर समेत कई हेल्थ रिस्क से जोड़ा गया है। इसलिए एहतियात के तौर पर पेपर कप का कम-से-कम इस्तेमाल करना चाहिए।

सवाल- क्या पेपर कप में ठंडी चीजें पीना भी रिस्की है?

जवाब- डॉ. अली शेर के मुताबिक, कम तापमान पर कप की अंदरूनी प्लास्टिक कोटिंग से माइक्रोप्लास्टिक और केमिकल्स निकलने का रिस्क नहीं होता है। इसके बावजूद लंबे समय तक या बार-बार डिस्पोजेबल पेपर कप यूज करने की बजाय स्टील, कांच या सिरेमिक के बर्तनों का इस्तेमाल करना बेहतर है।

सवाल- पेपर कप की जगह कौन-से विकल्प बेहतर हैं?

जवाब- गर्म चाय-कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक (चीनी मिट्टी) के कप सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। पेपर कप की जगह कौन-से विकल्प बेहतर हैं, ग्राफिक में देखिए-

सवाल- पेपर कप के रिस्क से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें?

जवाब- कुछ आसान सावधानियां अपनाकर संभावित जोखिम को कम किया जा सकता है। ग्राफिक में सभी सावधानियां देखिए-

सवाल- पेपर कप बनाने और इसके इस्तेमाल को लेकर फूड सेफ्टी अथॉरिटीज के नियम क्या कहते हैं?

जवाब- भारत में पेपर कप बनाने और खाने-पीने की चीजों के संपर्क में आने वाली पैकेजिंग के लिए FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशन, 2018 लागू किए हैं। इनके अनुसार-

  • पेपर कप में इस्तेमाल होने वाला कागज, कोटिंग, इंक और अन्य सामग्री फूड-ग्रेड होनी चाहिए।
  • पैकेजिंग ऐसी होनी चाहिए कि उससे फूड या ड्रिंक की क्वालिटी, स्वाद, स्मेल और सुरक्षा प्रभावित न हो और फूड में हानिकारक पदार्थ न मिलें।
  • फूूड के सीधे संपर्क में आने वाली सामग्री भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और FSSAI के निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

इन सारी चीजों को सुनिश्चित करना फूड बनाने वाले का काम है और उसकी निगरानी करना अथॉरिटी का काम। जब दोनों ही अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ न कर रहे हों तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी सेहत की परवाह करें और पेपर कप का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।

Related Posts

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:सोचते, बोलते और काम करते समय 9 बातें ध्यान रखें, जीवन हो सकता है सफल

Spread the love

Spread the loveजीवन को सही दिशा देने के लिए हमें अपने मन, वाणी और कर्म, इन तीनों पर ध्यान देना चाहिए। समय-समय पर खुद का निरीक्षण करें कि हमारे विचार…

Read more

मेंटल हेल्थ- पेरेंट्स से मिलने पर ट्रिगर होता चाइल्डहुड ट्राॅमा:वे आज भी बहुत लड़ते हैं, एक-दूसरे को ताने देते हैं, क्या करूं

Spread the love

Spread the loveसवाल- मेरी उम्र 40 साल है। मेरे पेरेंट्स काफी बूढ़े और कमजोर हो चुके हैं। लेकिन मैं जब भी उनसे मिलती हूं, तो मेरे बचपन का पुराना ट्रॉमा…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

टोंक में तीसरे और चौथे चरण में होंगे चुनाव:140 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी; जानें- पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल

  • October 3, 2026
टोंक में तीसरे और चौथे चरण में होंगे चुनाव:140 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी; जानें- पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल

टोंक में पंचायती राज चुनावों का शेड्यूल जारी:8.22 लाख वोटर चुनेंगे सरकार; 148 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी

  • October 3, 2026
टोंक में पंचायती राज चुनावों का शेड्यूल जारी:8.22 लाख वोटर चुनेंगे सरकार; 148 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी

राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायत चुनाव:20 नवंबर को आएगा परिषद और पंचायत समिति सदस्य का रिजल्ट; 16 नवंबर तक होंगे सरपंच के चुनाव

  • October 3, 2026
राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायत चुनाव:20 नवंबर को आएगा परिषद और पंचायत समिति सदस्य का रिजल्ट; 16 नवंबर तक होंगे सरपंच के चुनाव