एन. रघुरामन का कॉलम:आप कैसे हैं? जिंदगी को ‘मेंटेन’ कर रहे हैं या ‘बदल’ रहे हैं?

Spread the love

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु

मैंने उनसे पूछा कि ‘आप कैसे हैं?’ वर्माजी बड़े खिन्न अंदाज में बोले कि ‘मुझे लगता है कि मेरी ‘टू-डू-लिस्ट’ मेरे दुनिया से जाने के बाद भी खत्म नहीं होगी।’ उन्होंने अपने साथियों की शिकायत की, जो ऑफिस में उनका समय खराब करने में लगे रहते हैं। इसलिए वर्माजी खुद को ओवरलोडेड महसूस करते और हमेशा तनाव में घर लौटते थे। ये 6 महीने पुरानी बात है। इसीलिए शाम को परिवार के साथ जो समय मिलता, वो भी खराब हो जाता था।

उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या करूं? मैंने उन्हें एक लाइन की सलाह दी- ‘एक ‘नॉट-टू-डू लिस्ट’ बनाना शुरू कीजिए।’ बड़ी मासूमियत से वर्माजी ने पूछा कि ‘आपका मतलब है कि पुरानी ‘टू-डू-लिस्ट’ के साथ मैं यह नई लिस्ट भी जारी रखूं?’ उनके बच्चों जैसे सवाल पर मैं मुस्कुराया और कहा, ‘आप ‘हैम्स्टर-व्हील’ लाइफ में फंसे हुए हैं, इसलिए आपको क्लाउडिया हैमंड की किताब ‘ओवरव्हेल्म्ड: वेज टू टेक द प्रेशर ऑफ’ पढ़नी चाहिए।’

‘हैम्स्टर-व्हील’ लाइफका मतलब है ऐसी दिनचर्या, जिसमें आप दिन-रात काम करते हैं और बेहद व्यस्त रहते हैं, लेकिन असल में कभी ठोस प्रगति नहीं कर पाते और न ही किसी नई दिशा में बढ़ पाते हैं। इस रविवार वे मेरे घर आए और उस एक छोटी-सी टिप के लिए मुझे धन्यवाद दिया। ‘हैम्स्टर-व्हील’ लाइफ का अर्थ अनिवार्य तौर पर बहुत ज्यादा काम करना ही नहीं है। इसका मतलब है असल में जो चीज मायने रखती है, उसके करीब पहुंचे बिना बहुत-सी चीजें बार-बार करते रहना। इससे बाहर निकलने के कुछ व्यावहारिक तरीके यहां पेश हैं।

1 काम करना रोकें, फैसले लेना शुरू करें दिन शुरू करने से पहले उस एक काम की पहचान करें, जो दिन को वास्तव में प्रोडक्टिव बनाएगा। बाकी सब सेकंडरी है। आपकी ‘टू-डू-लिस्ट’ तीन हिस्सों में बंटी होनी चाहिए। ए. ‘डू इट’, यानी जिस काम को आपके अलावा कोई और नहीं कर सकता। बी. ‘डेलीगेट इट’, इसे ही ‘नॉट-टू-डू-लिस्ट’ कहते हैं। इसमें गैरजरूरी मीटिंग, कॉल, स्क्रॉलिंग, छोटे-मोटे काम और जिम्मेदारियां शामिल कर सकते हैं। सी. ‘डिलीट इट’ यानी ऐसे काम जो सहकर्मियों को खुश करने के लिए किए जाते हैं, लेकिन यहां दिखाई देते हैं। खुद से पूछें कि ‘अगर मैंने यह काम नहीं किया तो क्या होगा?’ अगर जवाब है, ‘कुछ नहीं’, तो उसे डिलीट कर दें।

2. कैलेंडर में खाली जगह छोड़ें पूरी तरह भरा हुआ कैलेंडर सोचने की गुंजाइश नहीं छोड़ता। हर दिन कुछ अन-शेड्यूल टाइम रखें- जिसमें सोच सकें, प्लान बना सकें या बस थोड़ा सांस ले सकें। इस हिस्से में व्यस्तता नहीं, बल्कि नतीजों को मापना चाहिए। ‘मैंने 10 घंटे काम किया’ यह अपने-आप में उपलब्धि नहीं, बल्कि खुद से पूछें कि मैंने 10 घंटे काम किया तो क्या बदला? प्रोग्रेस दिखनी चाहिए।

3. सोमवार की शुरुआत साप्ताहिक ‘एस्केप रिव्यू’ से करें सोमवार को 30 मिनट पहले पहुंचें, अपनी डेस्क पर बैठें और खुद से तीन सवाल पूछें। ए. पिछले हफ्ते किस चीज ने मुझे आगे बढ़ाया? बी. किस चीज ने मुझे व्यस्त रखा? सी. इस हफ्ते मैं क्या करना बंद कर सकता हूं? यह ‘हैम्स्टर-व्हील’ को आपकी डिफॉल्ट लाइफस्टाइल बनने से रोकेगा।

4. भविष्य के लिए एक घंटा इन्वेस्ट करें रोजाना बिना किसी रुकावट के एक घंटा ऐसी चीज पर लगाएं, जिसका फायदा समय के साथ बढ़े- सीखना, लिखना, एक्सरसाइज, रिश्ते बनाना, कोई स्किल डेवलप करना या कमाई का कोई अतिरिक्त जरिया बनाना। ‘हैम्स्टर-व्हील’ आज का दिन चलाता है, लेकिन यह एक घंटा आपका कल बनाता है। तय करें कि आपको वास्तव में क्या ज्यादा चाहिए- समय, पैसा, सेहत, परिवार, आजादी, क्रिएटिविटी या सुकून। फिर ऐसा कैलेंडर बनाएं, जिसमें यह चॉइस रिफ्लेक्ट हो।

फिजिकल प्रेजेंस या लगातार कुछ करते रहने के बजाय नतीजों पर ध्यान देना ही अंतत: वास्तविक प्रोडक्टिविटी को महज दिखावे की व्यस्तता से अलग करता है। लोग अकसर खुद को बहुत सारे काम तले दबा हुआ दिखाते हैं या अपने हैवी शेड्यूल का प्रचार करते हैं, ताकि अपना स्टेटस बनाए रख सकें, स्किल गैप्स छिपा सकें या आगामी जिम्मेदारी से बच सकें।

अगर आप अकसर प्रमोशन पाने वाले लोगों को देखेंगे तो उनमें इम्प्रेशन और इम्पैक्ट को अलग-अलग कर सकने की क्षमता होती है। वर्माजी ने दिन का मूल्यांकन इस आधार पर करना शुरू किया कि उन्होंने वास्तव में क्या प्रोड्यूस या हल किया, न कि इस आधार पर कि उनके कैलेंडर में कितने टास्क भरे हुए थे।

फंडा यह है कि जब आप वर्कप्लेस पर इम्प्रेशन मैनेजमेंट से इम्पैक्ट मैनेजमेंट की ओर बढ़ते हैं तो असल में आप जीवन को महज ‘मेंटेन’ करने के बजाय उसे ‘बदलने’ की राह पर चलना शुरू कर देते हैं। चुनाव आपका है।

Related Posts

स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र:सोचते, बोलते और काम करते समय 9 बातें ध्यान रखें, जीवन हो सकता है सफल

Spread the love

Spread the loveजीवन को सही दिशा देने के लिए हमें अपने मन, वाणी और कर्म, इन तीनों पर ध्यान देना चाहिए। समय-समय पर खुद का निरीक्षण करें कि हमारे विचार…

Read more

मेंटल हेल्थ- पेरेंट्स से मिलने पर ट्रिगर होता चाइल्डहुड ट्राॅमा:वे आज भी बहुत लड़ते हैं, एक-दूसरे को ताने देते हैं, क्या करूं

Spread the love

Spread the loveसवाल- मेरी उम्र 40 साल है। मेरे पेरेंट्स काफी बूढ़े और कमजोर हो चुके हैं। लेकिन मैं जब भी उनसे मिलती हूं, तो मेरे बचपन का पुराना ट्रॉमा…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

टोंक में तीसरे और चौथे चरण में होंगे चुनाव:140 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी; जानें- पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल

  • October 3, 2026
टोंक में तीसरे और चौथे चरण में होंगे चुनाव:140 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी; जानें- पंचायत चुनाव का पूरा शेड्यूल

टोंक में पंचायती राज चुनावों का शेड्यूल जारी:8.22 लाख वोटर चुनेंगे सरकार; 148 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी

  • October 3, 2026
टोंक में पंचायती राज चुनावों का शेड्यूल जारी:8.22 लाख वोटर चुनेंगे सरकार; 148 महिला सरपंच और 4 महिला प्रधान बनेंगी

राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायत चुनाव:20 नवंबर को आएगा परिषद और पंचायत समिति सदस्य का रिजल्ट; 16 नवंबर तक होंगे सरपंच के चुनाव

  • October 3, 2026
राजस्थान में 4 चरणों में होंगे पंचायत चुनाव:20 नवंबर को आएगा परिषद और पंचायत समिति सदस्य का रिजल्ट; 16 नवंबर तक होंगे सरपंच के चुनाव