निवाई, 3 घंटे पहले

निवाई में पर्युषण दशलक्षण पर्व के छठे दिन श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन अग्रवाल मंदिर और श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। यह आयोजन सकल दिगम्बर जैन समाज ने आचार्य सुन्दर सागर महाराज के सानिध्य में किया।

बड़ा जैन मंदिर में वार्षिक कलशाभिषेक हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस दौरान प्रकाशचंद बडेरा को माला पहनाने का सौभाग्य मिला। सन्मति सुन्दर श्रावक संस्कार शिविर में उत्तम संयम धर्म की विशेष पूजा की गई, जिसमें त्यागी तपस्वियों समेत 200 शिविरार्थियों ने भाग लिया।
चातुर्मास कमेटी के मीडिया प्रभारी सुनील भाणजा और विमल पाटनी ने बताया कि कार्यक्रम से पहले मूलनायक भगवान शांतिनाथ जी के सामने मंदिर अध्यक्ष सुशील जैन, दिगम्बर जैन अग्रवाल समाज अध्यक्ष विष्णु बोहरा, नेमीचंद सिरस और महेश मोटूका ने दीप जलाया।
आचार्य सुन्दर सागर महाराज, मुनि श्रुंताश सागर महाराज और आर्यिका सुलक्ष्य मति माताजी के मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान शांतिनाथ जी का अभिषेक और शांतिधारा की।
आचार्यों की संगीतमय पूजन की
चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता हितेश छाबड़ा और रौनक बोहरा ने बताया कि धार्मिक शिविर में ध्यान और योगा क्रिया भी की गई। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नव देवता पूजा, देव शास्त्र गुरु पूजन और विभिन्न आचार्यों की संगीतमय पूजन की।
इनमें आचार्य आदि सागर महाराज अंकलीकर, आचार्य महावीर कीर्ति महाराज, आचार्य विमल सागर महाराज, आचार्य सन्मति सागर महाराज और आचार्य सुन्दर सागर महाराज शामिल थे।
इसके बाद आचार्य सुन्दर सागर महाराज ने पांच दिन के उपवास के बाद छठे दिन महापारणा किया। इस मौके पर आचार्य सुन्दर सागर महाराज और आर्यिका सुलक्ष्य मति माताजी ने उत्तम संयम धर्म पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि संयम आत्मा की शुद्धि का मार्ग है।
इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं, वे आग में घी की तरह काम करती हैं। संयम ही वह रास्ता है जो मनुष्य को ‘क्या चाहिए’ से हटाकर ‘क्या आवश्यक है’ की ओर ले जाता है।






