
राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत रही टोंक के नवाबी इतिहास को सहेजने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। टोंक रियासत के नौ नवाबों के वंशजों यानी खानदाने अमीरिया का पहली बार पूर्ण शिजरा (वंशावली) तैयार किया गया है। इसमें प्रत्येक खानदान की तीन से सात पीढ़ियों तक का विवरण दर्ज किया गया है। नवाबी वंशज एवं खानदाने अमीरिया के संरक्षक आफताब अली खां ने शिजरे का विधिवत विमोचन कर इसके प्रकाशन की अनुमति दी और इसे ऐतिहासिक दस्तावेज बताया।

उल्लेखनीय है कि टोंक रियासत की नींव नवाब अमीर खां के शासन से जुड़ी है। अमीर खां संबल मुरादाबाद से टोंक आए थे। अंग्रेजों के साथ संधि के बाद 1817 में अमीर खां टोंक के प्रथम नवाब बने। इसके बाद करीब डेढ़ सदी तक टोंक की नवाबी परंपरा ने क्षेत्र के सामाजिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य इतिहास पर गहरी छाप छोड़ी। इसी नवाबी परिवार की पीढ़ियों का क्रमबद्ध विवरण अब एक जगह संकलित किया जा रहा है। पूर्व पीआरओ याकूब अली खां ने बताया कि टोंक के नवाबों के खानदानों का शिजरा तैयार करने का सबसे पहला उल्लेख 1901 में असगर अली आबरू द्वारा प्रकाशित ‘हदीका-ए-राजस्थान टोंक’ में मिलता है। उर्दू में प्रकाशित इस पुस्तक में चार नवाबों के खानदान का विवरण नवाब इब्राहीम अली खां के मध्यकाल तक दिया गया था, लेकिन इसमें भी वंशावली सीमित रूप से करीब दो पीढ़ियों तक ही दर्ज थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद कई साहबजादों ने अपने-अपने खानदानों का शिजरा कलमी अथवा प्रकाशित रूप में तैयार किया। सईद अहमद खां और मोहम्मद नईम खां ने भी संपूर्ण शिजरा तैयार करने का प्रयास किया, लेकिन लंबी बीमारी के कारण यह कार्य पूरा नहीं हो सका।
हिंदी में होगा प्रकाशित : अब तैयार किए गए शिजरे की खास बात यह है कि इसे पहली बार हिन्दी में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे आम लोगों को टोंक के नवाबी परिवार और उसकी पीढ़ियों के बारे में व्यवस्थित जानकारी मिल सकेगी। साथ ही यह वंशावली खानदानी पेंशन सहित अन्य ऐतिहासिक एवं पारिवारिक दस्तावेजी जरूरतों में भी उपयोगी साबित हो सकेगा।




