
व्यक्तित्व को आकर्षक बनाने के लिए अच्छे विचार, मधुर वाणी और सकारात्मकता जरूरी हैं। मन में सकारात्मकता, व्यवहार में सरलता और कर्मों में ईमानदारी होनी चाहिए। बनावट से व्यक्तित्व की सुंदरता कम होती है। जब व्यक्ति किसी स्वार्थ के कारण पक्षपात नहीं करता है, सहज, सरल और निष्कपट रहता है, तब उसका व्यक्तित्व आकर्षक बन जाता है। इसलिए हमें अपने मन, वचन और कर्मों को शुद्ध और सही रखना चाहिए। अच्छे विचारों को अपनाकर, मधुर व्यवहार करके और सद्कर्मों के मार्ग पर चलकर ही व्यक्तित्व को सुंदर बनाया जा सकता है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए अपने व्यवहार में किन बातों से बचना चाहिए?
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