
बीता समय हमारे लिए एक प्रेरक शिक्षक की तरह है। उसके अनुभव हमें निरंतर संस्कारित और प्रेरित करते हैं। अतीत से मिली सीख के आधार पर हम वर्तमान के कार्यों में समझ और दूरदृष्टि रखकर आगे बढ़ सकते हैं। ऐसा करने से कार्य बेहतर होते हैं। केवल पुरानी स्मृतियों में खोए रहना या कल्पनाओं में जीते रहना उचित नहीं है। ऐसा करने से हम वर्तमान के अवसरों को खो सकते हैं। इसलिए हमें अतीत से सीख लेकर वर्तमान में सही कर्म करना चाहिए।

आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हमें किससे प्रेरणा लेनी चाहिए?
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