
गांधी जयंती पर क्षेत्र की सुनारा ग्राम पंचायत ने बाल विवाह के खिलाफ मिसाल कायम करते हुए खुद को बाल विवाह मुक्त घोषित किया। भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत सुनारा सहित क्षेत्र की कुल 13 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन कर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

इस पहल में क्षेत्र की लालवाड़ी, सेदरिया, झिलाई, चैनपुरा, पलाई, खण्डदेवत, मुडिया और सुनारा तथा पीपलू क्षेत्र की कठवाना, सन्देडा, बोरखंडीकला, बनवाड़ा और रानोली ग्राम पंचायतें शामिल रहीं।
ग्राम सभा में ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने बाल विवाह रोकने, बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने तथा उन्हें शिक्षा और सुरक्षित बचपन उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई। सुनारा ग्राम पंचायत का बाल विवाह मुक्त पंचायत के रूप में सामने आना क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता और सामूहिक भागीदारी का महत्वपूर्ण उदाहरण है। भारत सरकार के बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित करने और प्रमाणन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहल की गई। इसमें पंचायती राज विभाग, महिला एवं बाल अधिकारिता विभाग, सरपंच, पंचायत सचिव, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय की भूमिका रही। सिकोईडिकोन टोंक की ओर से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के पार्टनर के रूप में न्याय तक परियोजना के तहत मई 2023 से बाल विवाह उन्मूलन, बाल अधिकार संरक्षण और जागरूकता के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। परियोजना समन्वयक देवेन्द्र कुमार जांगिड़ ने कहा कि बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत बनाना केवल घोषणा नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी है।
गांधी जयंती पर सुनारा सहित 13 ग्राम पंचायतों का यह संकल्प बाल विवाह के खिलाफ गांव स्तर पर सामाजिक बदलाव की मजबूत पहल के रूप में सामने आया।




