
माधोराजपुरा|
कस्बे के मुख्य बाजार स्थित प्राचीन श्री सीताराम जी महाराज मंदिर प्रांगण में आयोजित 16 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन श्रद्धा, भक्ति और संस्कारों का त्रिवेणी संगम नजर आया।

कथा व्यास पं. कृपाशंकर शास्त्री ने ध्रुव चरित्र, पितृ कृपा की महत्ता और राजा असमंजस के प्रसंगों का सजीव वर्णन कर श्रद्धालुओं को धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।पं. शास्त्री ने कहा कि बालक ध्रुव ने अटूट श्रद्धा और कठोर तप के बल पर नारायण की कृपा प्राप्त की थी। उनका जीवन सिखाता है कि दृढ़ संकल्प के आगे कठिन परिस्थितियां भी नतमस्तक हो जाती हैं। माता-पिता के आशीर्वाद को सबसे बड़ा संबल बताते हुए उन्होंने कहा कि पितृ कृपा से ही जीवन में यश, सम्मान और उन्नति संभव है। वहीं राजा असमंजस के प्रसंग से सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया।समारोह में मूल भागवत वाचक पं. प्रियांशु शास्त्री एवं माला जापक पं. गणेशकांत रामाचार्य का सान्निध्य रहा। कथा के समापन पर भव्य महाआरती हुई और श्रद्धालुओं में महाप्रसाद का वितरण किया गया।





