
विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील और ‘डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत’ के लेखक
दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने वर्ष 2024 में कहा था कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण डकैती से भी बड़ा अपराध है। तंज कसते हुए उन्होंने कहा था कि इंडिया गेट खरीदकर वहां भी अवैध घर बनाया जा सकता है।

दिल्ली में अवैध निर्माण रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में निगरानी समिति बनाई थी। लेकिन अतिक्रमण और हादसों से साफ है कि भ्रष्ट-तंत्र के आगे संविधान और अदालतें दोनों पस्त हैं। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा और दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा था कि कानून का पालन करने वाले देश में तकलीफें झेलते हैं, जबकि अवैध निर्माण करने वालों को रियायतें मिलती जाती हैं। इससे जुड़े 4 कानूनी पहलुओं को समझना जरूरी है :
1. दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग मालिक और पीजी संचालक ने नींव कमजोर होने की जानकारी के बावजूद निर्माण कराया। इसके लिए 81 साल के पूर्व वायुसेना अधिकारी और उनकी 75 साल की पत्नी को अदालत ने 14 दिन के लिए जेल भेजा। तीन महीने पहले हौजरानी में आग से जलने वाले 5 मंजिला होटल को भी एमसीडी के अफसरों ने ही चाय की दुकान के नाम पर लाइसेंस दिया था। उसके बाद मंत्री आशीष सूद ने कहा था कि अवैध निर्माण करने वालों को 2 साल की जेल होगी। लेकिन अवैध निर्माण करवाने वाले निगम अधिकारी और सरकारी बिल्डिंग में आग के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं होती। बड़े हादसे के बाद छोटे लोगों को जेल और बड़े खिलाड़ियों को बचाने का खेल खत्म होना चाहिए।
2. रक्षा मंत्रालय के अनुसार देश में 10 हजार एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में 780 एकड़ वन्य भूमि पर अवैध निर्माण हैं। दिल्ली में डीडीए के लैंड पूलिंग एरिया में 3500 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर अवैध निर्माण है। महाराष्ट्र के ठाणे में 2021 में एक इमारत ढह जाने के बाद अवैध निर्माणों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर हाईकोर्ट ने पीआईएल पर सुनवाई शुरू की थी। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने इसके लिए राज्य सरकार और बीएमसी को फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकारी जमीन कार्यपालिका की पैतृक सम्पत्ति नहीं है और उस पर मनमाने तरीके से अवैध बस्ती बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
3. हरियाणा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो 2600 अनधिकृत कॉलोनियों की जांच कर रहा है। फरवरी 2021 में हरियाणा के ही एक अन्य मामले में जस्टिस चन्द्रचूड़ के फैसले के अनुसार सरकारी जमीन में अवैध निर्माण को नियमित नहीं किया जा सकता। लेकिन बस्तियों की अवैध बसाहट के खेल से माफिया को बड़ी आमदनी होती है, वहीं नेताओं का भी वोटबैंक मजबूत होता है। दिल्ली में 2022 तक बनी 1731 अवैध कॉलोनियों में 45 लाख लोग रहते हैं, जिन्हें नियमित किया जा रहा है। भोपाल में 2022 के सर्वे में 576 अवैध कॉलोनियां मिली थीं। उसके बाद डेढ़ साल में 300 नई अवैध कॉलोनियां बस गईं। मध्य प्रदेश सरकार ने मार्च 2024 में कहा था कि अवैध कॉलोनी काटने वालों पर रासुका लगाने के साथ जोनल अफसर और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
4. नई दिल्ली में लुटियंस बंगला जोन नियमों के अनुसार पुराने बंगलों में नए फ्लोर नहीं बन सकते। लेकिन उस इलाके में नया संसद भवन, सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, भारत मंडपम जैसी वीआईपी इमारतों का निर्माण हो गया। सांसदों-मंत्रियों के बंगलों को पोटा केबिन से बढ़ाया गया है। अवैध निर्माण के छोटे मामलों में जुर्माना लगाकर नियमितीकरण करने से भ्रष्टाचार में कमी आने के साथ ही जनता का उत्पीड़न भी रुकेगा। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और अवैध बस्तियों के संगठित माफिया के लिए जिम्मेदार तंत्र की जवाबदेही तय करनी जरूरी है।
अवैध निर्माण करने वालों को तो सजा हो जाती है, पर अवैध निर्माण करवाने वालों और हादसों के जिम्मेदार अफसरों पर कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होती। बड़े हादसे के बाद छोटे लोगों को जेल और बड़े खिलाड़ियों को बचाने का यह खेल अब खत्म होना चाहिए।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)






