प्रो. चेतन सिंह सोलंकी का कॉलम:4 विचारों से समझें कि हम पर्यावरण को लेकर कहां गलती कर रहे हैं

Spread the love

प्रो. चेतन सिंह सोलंकी आईआईटी बॉम्बे में प्रोफेसर

जलवायु परिवर्तन शायद मानवता द्वारा स्वयं के लिए पैदा की गई सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। तापमान बढ़ रहा है, बारिश का स्वरूप बदल रहा है और प्राकृतिक आपदाओं के कारण दुनिया भर में नुकसान बढ़ता जा रहा है।

सरकारें इससे जूझने के लिए नीतियां तो बना रही हैं, उद्योग नई तकनीक विकसित कर रहे हैं, सौर ऊर्जा बढ़ रही है और पेड़ भी लगाए जा रहे हैं। फिर भी ग्लोबल वार्मिंग लगातार बढ़ रही है। हम कहां गलती कर रहे है? शायद हमें केवल अधिक समाधान नहीं, बल्कि समस्या की गहरी समझ की भी जरूरत है।

इस लेख में अलग-अलग समय और पृष्ठभूमि के 4 लोगों द्वारा दिए गए ये 4 विचार यह समझने में हमारी मदद कर सकते हैं कि हम कहां गलती कर रहे हैं और जलवायु सुधार की सही दिशा क्या हो सकती है। सऊदी अरब के पूर्व तेल मंत्री शेख अहमद जकी यमानी ने कहा था, “पाषाण युग पत्थरों की कमी के कारण समाप्त नहीं हुआ था और तेल युग (पेट्रोल, डीजल, गैस का युग) भी दुनिया में तेल समाप्त होने से बहुत पहले खत्म हो जाएगा।’

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में इसका अर्थ बहुत स्पष्ट है। हम कोयला, पेट्रोल और गैस के खत्म होने का इंतजार नहीं कर सकते। हमें उनका उपयोग इसलिए कम और अंततः बंद करना है, क्योंकि उन्हें जलाने से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड पृथ्वी को लगातार गर्म कर रही है।

तेल युग को कब समाप्त करना चाहिए, उसके लिए बराक ओबामा ने एक प्रसिद्ध कथन दिया था- “हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को महसूस करने वाली पहली पीढ़ी हैं और इसके बारे में कुछ कर सकने वाली आखिरी पीढ़ी।’ यानी जलवायु परिवर्तन अब आने वाली पीढ़ियों की समस्या नहीं है, हमें अभी, इसी समय, प्राथमिकता के साथ इस पर कार्रवाई करनी होगी।

लेकिन तेजी से कार्रवाई करना भी पर्याप्त नहीं होगा, यदि हमारी सोच वही बनी रहे, जिसने समस्या पैदा की है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था, “जिस चेतना के स्तर ने किसी समस्या को जन्म दिया है, उसी चेतना के स्तर से उस समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता।’

अधिक उत्पादन, अधिक उपभोग और लगातार आर्थिक वृद्धि को हमने प्रगति का आधार बनाया, जिसके कारण जलवायु परिवर्तन हुआ है। उनके अनुसार हम अधिक सौर ऊर्जा, अधिक इलेक्ट्रिक वाहन या नई तकनीक के सहारे इस समस्या को हल नहीं कर सकते। हमे अलग दिशा में सोचना पड़ेगा।

सही दिशा के लिए गांधी जी का एक प्रसिद्ध विचार शायद सबसे महत्वपूर्ण है, “पृथ्वी पर हर व्यक्ति की आवश्यकता पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लालच के लिए नहीं।’ पृथ्वी सीमित है। उसकी जमीन, पानी, जंगल, खनिज सीमित हैं। इसलिए हमारा उपभोग भी सीमित होना चाहिए।

हमें जरूरत और लालच के अंतर को फिर से समझना होगा। बिजलीघर अपने लिए बिजली नहीं बनाते और कारखाने अपने लिए सामान नहीं बनाते। वे इसलिए बनाते हैं, क्योंकि हम भोजन, कपड़े, वाहन, मकान, मोबाइल, यात्रा और हजारों वस्तुओं व सेवाओं को खरीदते हैं और उसकी डिमांड करते है। चाहे गाड़ी हो, कपड़े हों, या लाइट या पंखा हो, हमारे हर उपभोग के पीछे प्रकृति को कुछ ना कुछ नुकसान होता है।

इन चार विचारों को साथ रखें तो जलवायु परिवर्तन का कारण और सुधार की दिशा स्पष्ट दिखाई देती है। जीवाश्म ईंधन से बाहर निकलें। अभी कार्रवाई करें। अपनी सोच बदलें। उपभोग सीमित करें। जीवन और व्यवस्थाओं को जहां संभव हो, छोटा, सरल और स्थानीय बनाएं।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Related Posts

आज का एक्सप्लेनर:₹500 की टिकट, ₹30 करोड़ का इनाम; केरलम सरकार क्यों चलाती है लॉटरी, क्या आप भी खरीद सकते हैं

Spread the love

Spread the loveकेरलम के एक शख्स ने महज 500 रुपए की एक लॉटरी टिकट खरीदी। कुछ महीने बाद उसे 30 करोड़ रुपए का जैकपॉट लगा। ये लॉटरी सिस्टम है- केरलम…

Read more

70th District Gymnastics Meet: Dominant Schools Sweep All Four

Spread the love

Spread the love70वीं जिला स्तरीय जिम्नास्टिक प्रतियोगिता का समापन, Across all four categories, the winning schools dominated the event. Mahatma Gandhi Government School, Devli, hosted the 70th district-level gymnastics competition’s…

Read more

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

एशियन गेम्स ब्रांज मेडलिस्ट धर्मवीर चौधरी निवाई पहुंचे:मंडी सचिव सहित व्यापारियों ने किया स्वागत, डीएसपी भी रहे मौजूद

  • October 3, 2026
एशियन गेम्स ब्रांज मेडलिस्ट धर्मवीर चौधरी निवाई पहुंचे:मंडी सचिव सहित व्यापारियों ने किया स्वागत, डीएसपी भी रहे मौजूद

टोंक में 20वां कला पर्व ‘क्रेयान्स’ शुरू:रूस-नेपाल सहित देश के कई राज्यों से पहुंचे चित्रकार; दिखाएंगे अपने कल्चर का हुनर

  • October 3, 2026
टोंक में 20वां कला पर्व ‘क्रेयान्स’ शुरू:रूस-नेपाल सहित देश के कई राज्यों से पहुंचे चित्रकार; दिखाएंगे अपने कल्चर का हुनर

सरकारी स्कूलों में अब होगा रीडिंग पीरियड:अलग-अलग गतिविधियों से स्टूडेंट्स में विकसित होगी पढ़ने और समझने की क्षमता

  • October 3, 2026
सरकारी स्कूलों में अब होगा रीडिंग पीरियड:अलग-अलग गतिविधियों से स्टूडेंट्स में विकसित होगी पढ़ने और समझने की क्षमता